श्रम मंत्री श्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने प्रदेश में बाल अधिकारों के व्यावसायिक सिद्धांतों विषयक कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के लिये सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं, पूरे विश्व में बाल श्रम एक विकराल समस्या है। इसके समाधान के लिए बाल श्रम कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा। श्री सिसोदिया ने बताया कि अगले माह से बाल श्रमिकों के लिये बाल श्रम पंचायतों का आयोजन किया जायेगा। इसकी शुरूआत पीथमपुर से की जायेगी।

मंत्री श्री सिसोदिया ने कहा कि बाल श्रम का मूल कारण गरीबी और अशिक्षा है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के निदान के लिए सर्वप्रथम उन क्षेत्रों को चिन्हित करना होगा, जहां से बाल श्रमिक भारी तादाद में आते हैं। ऐसे क्षेत्रों में स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से जागरूकता पैदा करना होगी। इन बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना होगा।

श्रम मंत्री श्री सिसोदिया ने बताया कि राज्य सरकार बाल श्रमिकों के उत्थान एवं उनके शोषण की रोकथाम के लिए सजग होकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को सरकार के साथ बाल श्रम रोकने के लिए आगे आना होगा। श्रम मंत्री ने बताया कि प्रदेश में श्रमोदय विद्यालयों में श्रमिकों के बच्चे अच्छे स्कूलों की तरह शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप प्रदेश में 6 नये श्रमोदय विद्यालयों का निर्माण कराया जा रहा है। इन विद्यालयों में निर्माण श्रमिकों के बच्चों को नि:शुल्क उत्कृष्ट शिक्षा दी जायेगी। उन्होंने कहा कि बाल मजदूरी समाप्त करने के लिए राज्य सरकार दृढ़ संकल्पित है।

श्री सिसोदिया ने कार्यक्रम में 'सेव द चिल्ड्रन'' संस्था द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'कपास में बच्चे'' का विमोचन किया। इस अवसर पर गांधीवादी श्री राजा जी, एकता परिषद् के अध्यक्ष श्री रणसिंह, संस्था के प्रमुख श्री प्रभात कुमार एवं श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।