कभी मुख्यमंत्री रहने के दौरान कैबिनेट में गृह मंत्री रहे अमित अनिल चंद्र शाह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट में इस बार गृह मंत्री बनाया है। अमित शाह को गृह मंत्री बनाने के पीछे प्रधानमंत्री की कुछ जटिल चुनौतियों पर पार पा लेने की मंशा है। इन चुनौतियों से निबटने के लिए जरूरी संदेश अमित शाह ही दे सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद है। यह उनके पहले कार्यकाल में नासूर बना था। जितनी बड़ी जरूरत नियंत्रण रेखा और पाकिस्तान पर आतंकवाद को शह न देने पर दबाव बनाने की है, उससे कहीं बड़ी जरूरत जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाज, आंदोलनकारी और विघटनकारी, अलगाववादियों को काबू में रखने की है।  प्रधानमंत्री को भरोसा है कि अमित शाह के कार्यभार संभालते ही जम्मू-कश्मीर से लेकर पाकिस्तान में चल रहे आतंकी संगठनों तक इसका सकारात्मक संदेश जाएगा। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35ए को लेकर भाजपा ने देश से एक वादा किया है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा जम्मू-कश्मीर के लद्दाख के हित को भी जोड़ती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसे अमली जामा पहनाने में सक्षम हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण ने आकार लेना शुरू किया है। ज्वलंत मुद्दा है।  भाजपा बांग्लादेश के अनाधिकृत रूप से रह रहे विदेशियों को लेकर लगातार संवेदनशील रही है। असम विधान सभा के पिछले चुनाव में भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया था। इस साल वहां चुनाव भी होना है।  उनका केंद्रीय गृह मंत्री बनना ही पर्याप्त है।

अमित शाह के केंद्रीय गृह मंत्री बनने से नक्सल समस्या को नियंत्रित करने में आसानी होगी। अमित शाह सख्त हैं। उन्हें कड़े होमवर्क के साथ सख्ती से लागू कराने वाले चेहरे के तौर पर जाना जाता है। दूसरा, उनके गृह मंत्री बनने के बाद केन्द्र सरकार की नीतियों में एक स्पष्टता देखने को मिलेगी। इससे नक्सलवाद पर बड़ा दबाव बनाने में मदद मिलेगी। अलगाववादी ताकतों को इससे झटका लगेगा।