इन्दौर । पहले परिवार बड़े होते थे और सब एक साथ संयुक्त परिवार के रूप में आनंद से रहते थे, लेकिन अब एकांकी परिवारों का प्रचलन बढ़ रहा है। पहले चाल सिस्टम में रहने का आनंद कुछ और ही था। वहां असुविधा तो थी, लेकिन सुरक्षा भी थी। वर्तमान में व्यक्ति अकेले रहता है जहां सुविधाएं तो बहुत हैं, मगर सुरक्षा नहीं है। जन्म के समय जो माता-पिता हमारे पास मौजूद थे, क्या उनके अंतिम समय मंे हम उनके पास रहेंगे, इसकी कोई गारंटी है। जहां प्यार होता है वहां गलतियों पर ध्यान नहीं जाता, लेकिन जिनके प्रति प्यार नहीं होता, वहां एक-दूसरे की गलतियों और शिकायतों का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता। एक हंसता-खेलता परिवार तभी आकार ले सकता है, जब घर में रहने वालों के बीच परस्पर सहयोग भावना, एकता, सहयोगात्मक स्वभाव, सम्मान और संस्कृति की सुदृढ़ भावना होगी। 
पद्मभूषण जैनाचार्य रत्नसुंदर सूरीश्वर म.सा. ने आज दशहरा मैदान पर चल रही परिवर्तन प्रवचनमाला में ‘प्यार ही है परिवार का आधार’ विषय पर अपने प्रेरक, मार्मिक और दिलचस्प संबोधन के दौरान उक्त दिव्य विचार रखे। नव निर्वाचित सांसद शंकर लालवानी ने भी आज आचार्यश्री से भेंटकर उनके आशीर्वाद प्राप्त किए और समाजसेवी दिलसुखराज कटारिया, किशोर गोयल, श्रीमती वीणा शर्मा, हितेश काला के साथ दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आयोजन समिति की ओर से प्रेमचंद कटारिया, यश चोपड़ा, सिद्धार्थ ढ़ंढा, दिनेश डोसी, सुजान चोपड़ा आदि ने सभी संतों एवं अतिथियों की अगवानी की। प्रवचनमाला मंे दिनोंदिन श्रोताओं का सैलाब बढ़ने लगा है। सभी धर्मों के नागरिक बड़ी संख्या मंे सपरिवार आ रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कुर्सी पर बैठक व्यवस्था रखी गई है। आचार्यश्री एवं उनके साधु-साध्वी भगवंतों के प्रवचन स्थल पर आने-जाने के समय हजारों श्रद्धालु जब कतारबद्ध होकर उनके दर्शनों के लिए जमा होते है तो मैदान पर भावपूर्ण दृश्य बन जाता है। आज प्रवचनों के दौरान जब आचार्यश्री ने पिता-पुत्र और मां-बेटी तथा अन्य आत्मीय रिश्तों पर आधारित कुछ प्र्रसंग सुनाए तो अनेक श्रोताओं की आंखों से आंसू बह निकले। प्रवचनमाला में गुरूवार 30 मई को सुबह 8.45 से 10.15 बजे तक ‘संस्कार संवारें जिंदगी’ विषय पर प्रवचन होंगे। 
आचार्यश्री ने कहा कि परिवार के सभी सदस्यों के बीच जब तक को-आपरेशन, यूनिटी, काम्प्रोमाईज नैचर, रिस्पेक्ट एवं कल्चर जैसी भावना सुदृढ़ नहीं होगी, सभी सदस्यों के बीच या तो एक-दूसरे की गलतियां निकालने की होड़ मची रहेगी या कामों मंे बाधा डालने की। हमें जिसके प्रति प्यार होता है, उसकी गलतियां नजर नहीं आती। दूसरी ओर जहां प्यार नहीं होता, वहां छोटी-सी गलती भी बहुत बड़ी नजर आती है। याद रखें कि परिवार में सफलता एक को ही मिलती है, पर वह अकेला कभी सफल नहीं हो सकता। माता-पिता की सेवा और देखभाल परमात्मा के भी पहले की जाना चाहिए। समाज मंे कितने बेटे ऐसे हैं जो अपने से भी श्रेष्ठ और बढ़िया कपड़े, भोजन आदि अपने माता-पिता को उपलब्ध कराते हैं। आजकल एकल परिवारों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन संयुक्त परिवार का आनंद सबसे अनुपम होता है। सबसे बड़ी बात - संयुक्त परिवार अपने सभी सदस्यों के लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं।