Friday, 20 April 2018, 4:06 PM

साँच कहै ता मारन धावै

आभासी दुनिया से निकलो..प्यारो

Updated on 26 September, 2017, 18:22
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल छात्र जीवन में हम लोग राजनीति के बारे में खूब चर्चा करते थे। यह राजनीति कालेज और विश्वविद्यालय के परिसर के बाहर की भी होती थी। मँहगाई, बेरोजगारी समेत देश के वे तमाम मुद्दे जो उस समय उबाल पर होते थे। हमें नारे बहुत आकर्षित करते थे।... आगे पढ़े

अर्जन सिंह एन्ड पुअर बजरंगी प्रसाद

Updated on 18 September, 2017, 8:33
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल एयर मार्शल अर्जन सिंह के निधन की खबर के साथ एक पुरानी खबर आँखों के सामने तैर गई जो कई वर्षों से छाती में बोझ बनकर दफन थी। वह थी, टाइम्स आफ इंडिया..की  एक क्लिपिंग जिसे भारतीय तैराकी के पितामह और प्रथम अर्जुन पुरस्कार विजेता कैप्टन बजरंगी... आगे पढ़े

आदमी को पहाड़ खाते देखा है..।

Updated on 18 September, 2017, 8:32
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल भोपाल से इंदौर जाते हुए जब देवास बायपास से गुजरता हूँ तो कलेजा हाथ में आ जाता है। बायपास शुरू होते ही बाँए हाथ में हनुमानजी की विराट प्रतिमा है, उसके पीछे खड़े पहाड़ का जो दृश्य है,बेहद दर्दनाक है। उसे देखकर कई भाव उभरते हैं। कि... आगे पढ़े

जो ना समझे वो अनाडी़ है

Updated on 18 September, 2017, 8:32
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल एक मित्र सायकिल की दुकान पर मिल गए। बाहर उनकी चमचमाती कार खड़ी थी। मैंने पूछा-यहां कैसे? वो बोले- डाक्टर ने कहा सायकिल से चला करिए सो सायकिल से बचपन शुरू हुआ और अब बुढापा भी। दूकान वाले ने दार्शनिक अंदाज में कहा- क्या करियेगा ये जिंदगी... आगे पढ़े

श्रम,शौर्य और हुंकार है हिन्दी

Updated on 15 September, 2017, 19:26
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल अपना हिन्दी दिवस सैनिक स्कूल के बच्चों के बीच मना। रीवा का सैनिक स्कूल देश के सबसे पुराने और गौरवशाली स्कूलों में से है। भारत चीन युद्ध के बाद ऐसी जरूरत महसूस हुई कि पाँचवी से ही सैन्यशिक्षा दी जाए।  उन दिनों जब सब राजे रजवाड़े अपनी... आगे पढ़े

हिन्दी के दाँत,खाने के कुछ दिखाने के कुछ

Updated on 14 September, 2017, 21:49
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल दिलचस्प संयोग है कि हिन्दी दिवस हर साल पितरपक्ष में आता है। हम लगेहाथ हिन्दी के पुरखों को याद करके उनकी भी श्राद्ध और तर्पण कर लेते हैं। पिछले साल भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन रचा गया था। सरकारी स्तर पर कई दिशा निर्देश निकले,संकल्प व्यक्त किए... आगे पढ़े

अब चड्ढी पहन के फूल नहीं खिलते

Updated on 14 September, 2017, 21:49
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल ........जंगल जंगल बात चली है पता चला है, अरे चड्ढी पहनके फूल खिला है,फूल खिला है।                               ..    महाकवि गुलजार हम लोग के जमाने का बचपन क्या मस्त था। न पीठ पर बस्ते का बोझा, न सबक का टेंशन, न ट्यूशन की भागमभाग। माँ-बाप सबकुछ भगवान और स्कूल के मास्साब... आगे पढ़े

..रंगाखुश और राम रहीम

Updated on 12 September, 2017, 10:52
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल सन् 75 मे शोले के तूफानी दौर में एक फिल्म आई थी ..रंगाखुश..। इसे महानगरीय सिनेमा ने नोटिस नहीं लिया, लेकिन यह हमारे लिए खास थी। वजह लगभग समूची फिल्म अपने रीवा के गांवों कस्बों और खूबसूरत बरदहा और छहिया घाटी समेत सफेद बाघों के पर्यावासी जंगलों... आगे पढ़े

कौव्वे इसलिए हमारे पुरखे

Updated on 11 September, 2017, 10:55
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल पितरपख लगा है कौव्वे कहीं हेरे नहीं मिल रहे। इन पंद्रह दिनों में हमारे पितर कौव्वे बनके आते थे। अपने हिस्से का भोग लगाते थे।  कौव्वे पितर बनके तर गए या फिर पितर ही कौव्वा बनकर आने से मना कर दिया। मैंने मित्र से पूछा--आखिर क्या वजह... आगे पढ़े

अंधी रेहड़ के काने गड़रिये

Updated on 11 September, 2017, 10:53
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल घर से निकलते ही काना दिख जाए तो उसे बड़ा अशुभ मानते थेे।लोग रास्ता बदल देते थे या यात्रा रद्द कर देते थे। उन दिनों गाँवों में ऐसे टोटकों का रिवाज था।(टीवी चैनल तो इसे और पुख्ता करने में जुटे हैं) पढे़ लिखे लोग भी झांसे में... आगे पढ़े

शब्द संभारे बोलिए

Updated on 9 September, 2017, 8:41
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल फर्ज करिए कि एक ऐसी प्रयोगशाला बना ली जाए जो हवा में तैरते हुए शब्दों को पकड़कर एक कंटेनर में बंद कर दे, फिर भौतिकशास्त्रीय विधि से  उसका घनत्वीकरण कर ठोस पदार्थ में बदल दिया जाए तो उसका स्वरूप और उसकी ताकत क्या होगी? सृष्टि का ये... आगे पढ़े

लंकेश अवधेश के झगड़े में कबीर

Updated on 9 September, 2017, 8:41
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल सोशल मीडिया आँसुओं से तर है। शहर की सड़कों पर पिघले हुए मोम की परत है। कहा जा रहा है अभिव्यक्ति की आजादी रक्तरंजित है। बच सको तो बचो नहीं तुम भी मारे जाओगे। कुछ कह रहे हैं भागो भागो भेडिया आया। कुछ कह रहे जागो जागो... आगे पढ़े

जिंदा पितरों की भी सुधि लें

Updated on 7 September, 2017, 8:02
जयराम शुक्ल चलिए इस पितरपक्ष की शुरूआत जिंदा पितरों का हालचाल जानने से  करें। इनमें से कई घर में ही पितर बन जाने की प्रतीक्षा में हैं, कईयों को घर में ठौर नहीं इसलिए वृद्धाश्रम में जिन्दगी की उलटी गिनती गिन रहे हैं। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि कल हम भी... आगे पढ़े

शिक्षक दिवस पर पंडिज्जी कहिन

Updated on 6 September, 2017, 19:37
साँच कहै ता मारन धावै/जयराम शुक्ल तीज त्योहारों की तरह हर साल शिक्षक दिवस भी आता है। पूजाआराधना में जैसे गोबर की पिंडी को गणेश मानकर पूज लिया जाता है वैसे ही एक दिन के लिए सभी गोबर गणेश बन जाते हैं। यह एक अनिवार्य कर्मकाण्ड है जो हर साल यह... आगे पढ़े

फेंकिए.. इस ओढी हुई गुलामी को

Updated on 4 September, 2017, 22:05
         जयराम शुक्ल एक मित्र ने सवाल उठाया--जब फोर्ब्स और ट्रान्सपेरेसी इन्टरनेशनल आपको दुनियाभर में भ्रष्टतम बताती हैं तो आपको बुरा लगता है लेकिन ऐसी ही एजेन्सियां जब उपलब्धियों का बखान करती हैं तो आप न सिर्फ मुदित होते हैं सरकारी खर्चे से विग्यपन छपवाते हैं और उन्हीं का नाम लेकर... आगे पढ़े

जब हमें कोई दूजा भ्रष्ट कहता है

Updated on 3 September, 2017, 10:45
       जयराम शुक्ल ईमानदारी और बेईमानी का सर्टिफिकेट जारी करने वाली फोर्ब्स,ट्रान्सपेरेसी इंटरनेशनल जैसी विदेशी एजेंसियां अपनी रिपोर्ट में हमें परम भ्रष्ट बताती हैं तो बदन में आग सी लग जाती है।  इसका मतलब यह नहीं कि हम भ्रष्ट नहीं हैं सवाल ये है कि हमें भ्रष्ट कह कौन रहा है... आगे पढ़े

रूपए की इज्जत का सवाल है बाबा

Updated on 3 September, 2017, 10:45
                 जयराम शुक्ल जब जब रुपया धड़ाम से नीचे गिरता है तो अपने देश के स्वयंभू अर्थशास्त्रियों के बीच हाहाकार मच जाता है। तेजडिय़ों, मंदडिय़ों के चेहरे सूखने लगते हैं। शेयर बाजार में सेनसेक्स और निफ्टीे हार्टअटैक नापने की मशीन के कांटे की तरह ऊपर-नीचे होने लगते हैं। हाल फिलहाल ऐसा... आगे पढ़े

बात जो सीधे दिल से निकली है

Updated on 1 September, 2017, 11:28
जयराम शुक्ल मध्यप्रदेश के सतना जिले में एक गाँव है चूँद। इलाके में इसे शहीदों के गाँव के तौर पर जाना जाता है। सोमवंशी राजपूतों के इस गाँव में हर तीसरे घर का कोई न कोई जवान सरहद में मोर्चा लेते हुए शहीद हुआ है। औसतन हर घर में एक फौजी... आगे पढ़े

रुख हवाओं का जिधर को है उधर के हम हैं

Updated on 31 August, 2017, 9:53
जयराम शुक्ल वक्त की फिरंगी कमाल की होती है। हर मसले को पलभर में मथ के रख देती है। इस उल्टापलट को ढ़ोगी बाबा गुरमीत और गिरगिटिया चैनलों से बेहतर कौन समझ सकता है। कल तक जो चैनल मैसेंजर आफ गाँड.. के प्रोमो और प्राइम टाइम में बाबा के प्रायोजित इन्टरव्यू... आगे पढ़े

क्योंकि ध्यानचंद हाँकी के भगवान नहीं बने

Updated on 30 August, 2017, 8:15
जयराम शुक्ल भारतीय इतिहास में दो महापुरुष ऐसे भी हैं जो भारतरत्नों से कई,कई,कई गुना ज्यादा सम्मानित और लोकमानस में आराध्य हैं। प्रथम हैं नेताजी सुभाषचंद्र बोस और दूसरे मेजर ध्यानचंद। सुभाष बाबू आजादी के आंदोलन के सबसे तेजस्वी,ओजस्वी और प्रखर सेनानी हैं। महात्मा गाँधी यदि देश के पिता हैं तो... आगे पढ़े

ड्रैगन साँप का पुरखा, जरा सँभलके

Updated on 29 August, 2017, 9:33
जयराम शुक्ल चीन से अपन की तो पैदाइशी अदावत है। इधर मैं पैदा हो रहा था,उधर चीन बम बरसा रहा था। चीन के बमों का असर मेरे पैदा होने पर इसलिए पड़ा क्योंकि वो जगह जबलपुर में बम,गोला बनाने वाली फैक्ट्री के श्रमिकों की बस्ती थी। रात को ब्लैकाउट। वाहनों की... आगे पढ़े

टनाटनदास और तैमूर

Updated on 24 December, 2016, 10:17
वेशक नाम में कुछ भी नहीं धरा है। गधे को घोड़ा कह देने से वह घोड़ा नहीं हो जाता और न आम, इमली। गधा गधा ही रहेगा और आम आम ही। चरित्र नहीं बदलता। कपूत का नाम कुलदीपक रखो तो क्या उजियारा करने लगेगा कुलवंश का, नहीं। उसे जो करना है, वही करेगा।... आगे पढ़े

इस महाभारत में कौरव ही कौरव

Updated on 28 April, 2015, 12:37
इस महाभारत में कौरव ही कौरव    वेदव्यास ने महाभारत लिखने के बाद दावा किया कि दुनिया में जो कुछ है वो इसमें है और जो यहां नहीं है वह कहीं भी नहीं है। इस लोकसभा चुनाव में आप महाभारत की झलक देख सकते हैं। बात भीष्म से शुरू करें कि दुर्योधन... आगे पढ़े

चुनाव में राजनीति के गैंग्स आॅॅफ वासेपुर

Updated on 28 April, 2015, 12:36
चुनाव में राजनीति के गैंग्स आॅॅफ वासेपुर पार्टी का मतलब लोकतांत्रिक इकाई स्तर के कार्यकर्ताओं द्वारा चुना हुआ संगठन जो सदस्यों की सामूहिक राय के आधार पर चलता है। गिरोह में आंतरिक लोकतंत्र की कोई जगह नहीं होती। माफिया सत्तातंत्र के समानांतर अपराधियों का समूह होता है जो व्यवस्था को अपनी... आगे पढ़े

या मोदी सर्वभूतेषु पीएमरूपेण संस्थिता

Updated on 28 April, 2015, 12:34
या मोदी सर्वभूतेषु पीएमरूपेण संस्थिता घरों के रात में भी खुले ताले और शहर में निर्भयता से घूमते नर नरियों को देख कर इनदिनों ऐसे लग रहा है जैसे इस साल वसंत के साथ रामराज ने दस्तक दी हो। पूछने पर रहस्य का पता चला कि ये इलेक्शन का साइड इफेक्ट... आगे पढ़े

डेमोक्रेसी की पीठ पर शनि की अढैय्या

Updated on 28 April, 2015, 12:33
डेमोक्रेसी की पीठ पर शनि की अढैय्या अपने देश की दो खास बातें जो दुनिया में कहीं नहीं। इन्टेलीजेन्स ब्यूरो और ज्योतिष। इनके आंकलन कभी मिथ्या नहीं होते। जैसे मुंबई हमले के बाद आईबी ने कहा- कि मैंने पहले ही कहा था कि हमला होगा, तो हुआ। मान लीजिए हमला नहीं... आगे पढ़े

इस देश का यारो क्या कहना

Updated on 28 April, 2015, 12:30
इस देश का यारो क्या कहना प्रचंड राष्ट्रप्रेम की चाशनी में डूबे इस गाली-गलौज भरे चुनाव को यदि स्वर्ग से सरदार पटेल, विवेकानंदजी या बापू देख रहे होंगे तो वे निश्चित ही अफसोस करते होंगे कि उनके झंडाबरदारों के रगों में ये कौन सा लूहू हिलारें ले रहा है। उन्हें कौन... आगे पढ़े

सियासत के बाजार में रद्दी के भाव वाले लोग

Updated on 28 April, 2015, 12:28
सियासत के बाजार में रद्दी के भाव वाले लोग इस साल वसंत के बाद का पतझड़ पेड़ों में आने की बजाय कांग्रेस में आ गया। डाली-डाली, पत्ता-पत्ता सब झड़ने को बेताब दिख रहे हैं। जब सोए तब कांगे्रसी थे, जागते ही भाजपाई हो गए। कुछ तो मौका देखके चौका मार रहे... आगे पढ़े

चुनाव के रंगमंच में बेसिर-पैर के प्रहसन

Updated on 28 April, 2015, 12:26
चुनाव के रंगमंच में बेसिर-पैर के प्रहसन ऐसे विचित्र चुनाव से शायद ही किसी पीढ़ी का वास्ता पड़ा हो। देश के बुनियादी मुद्दों को छोड़कर सभी बातें हो रही हैं। कांग्रेस ने मोदी की पत्नी का क्या पता लगा लिया मानों वास्कोडिगामा ने भारत खोज लिया हो। अपने भोपाल के कांग्रेसियों... आगे पढ़े

चुनावी वॉर रूमों से निकलते कलह के कोरस

Updated on 28 April, 2015, 12:26
चुनावी वॉर रूमों से निकलते कलह के कोरस जब कोई इस चुनाव को लोकतंत्र का महोत्सव कहता है तब मुझे लगता है कि देश के लिए इससे भद्दा कोई दूसरा मजाकिया शब्द हो ही नहीं सकता। मैं इस चुनाव को मर्यादाहीन व अराजक एक ऐसा राष्ट्रीय कलह मानता हूं जिसमें चारित्रिक... आगे पढ़े