Sunday, 22 April 2018, 6:20 AM

साँच कहै ता मारन धावै

तुम्हीं ने दर्द दिया है तुम्हीं दवा देना

Updated on 8 November, 2017, 7:41
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   दो मसले मुझे हमेशा बहुत परेशान करते हैं। एक डाक्टरों की पर्ची और दूसरी बड़ी अदालतों के फैसलों की इबारत। मैं अँग्रेजी माध्यम से विग्यान का स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधिधारी हूँ जब मैं असहज और परेशान हो जाता हूँ तो उन लोगों की क्या कहिए जिन्हें पढाई... आगे पढ़े

खादी, मखमल और टाट के पैबन्द

Updated on 8 November, 2017, 7:40
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल    सत्तर के दशक में हम लोग एक कविता की दो पंक्तियों को दीवारों पर नारे की तरह लिखा करते थे ..खादी ने मखमल से ऐसी सांठ-गांठ कर डाली है, टाटा, बिड़ला, डामिलया की बरहों मास दिवाली है। उन दिनों किसी भी नेता के खिलाफ सबसे बड़ा लांछन... आगे पढ़े

इस साइबर सडांध से अपराध ही पनपेगा

Updated on 8 November, 2017, 7:39
.जयराम शुक्ल   अभी कुछ दिन पहले ही मित्र ने मैसज शेयर किया कि नोटबंदी होती न होती पोर्नबंदी हो जाती तो समाज का बड़ा कल्याण होता। रोज ब रोज अखबार की सुर्खियों और चैनल्स की ब्रेकिंग देखकर लगा कि बात में दम है, यह विचार सोलह आने सही है। दिल्ली के... आगे पढ़े

विन्ध्यप्रदेशः एक भूली बिसरी दास्तां

Updated on 8 November, 2017, 7:39
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   इतिहास के कुछ घटनाक्रम कभी कभी कचोटने वाले होते हैं। 1नवंबर हम विन्ध्यवासियों के लिए भारी साँसत का दिन होता है। वो इसलिए कि मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर हँसे कि विन्ध्यप्रदेश के बलिदान दिवस पर रोएं। मन को लाख दबा के रखें पर विन्ध्यप्रदेश सामने आ... आगे पढ़े

कोई हसीन नजारा तो है नजर के लिए

Updated on 8 November, 2017, 7:39
साँच कहै ता....जयराम शुक्ल हम फुरसतिया लोगों को बैठे-ठाले किसी का मजाक बनाने,खिल्ली उड़ाने में बहुत मजा आता है। परपीड़ा से उपजे आनंद की अनुभूति ही गजब की होती है। परसाई जी ने दसवें रस की खोज की थी..निंदारस। हमारा संभाषण, हमारी पत्रकारिता, हमारी रोजमर्रा की सोच निंदा रस की चासनी... आगे पढ़े

इसलिए हिन्दू राष्ट्रवादी हैं सरदार पटेल

Updated on 1 November, 2017, 13:14
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   31 अक्टूबर की तारीख का बड़ा महत्व है,इसी दिन ही सरदार बल्लभभवन भाई पटेल पैदा हुए थे। इस महान हस्ती को इतिहास के पन्ने से अलग कर दिया जाए तो हम भारतवासीयों की पहचान रीढविहीन और लिजलिजी हो जाएगी। इसलिए इस दिन को मैं प्रातः स्मरणीय मानता... आगे पढ़े

सत्ता में बौद्धिकों की अहमियत पर सवाल

Updated on 1 November, 2017, 13:14
साँँच कहै ता...जयराम शुक्ल   अभी हाल ही में एक राष्ट्रीय समेनार में भाग लेने का मौका मिला। विषय था..कुशल प्रशासनिक रणनीति बनाने में अकादमिक योगदान की जरूरत। इत्तेफाकन् मुझे ही मुख्य वक्ता की भूमिका निभानी पड़ी वजह जिन कुलपति महोदय को उद्घाटन के लिए आना था ऐन वक्त पर नहीं आए।... आगे पढ़े

कारपोरेट की इल्लियां अब खेतों की ओर

Updated on 1 November, 2017, 13:13
साँच कहै ता  .... जयराम शुक्ल   तरकारियों के भाव आसमान पर टँग गए। ठेलेवाले कुम्हड़े तक के दाम पौव्वा में बताते हैं। पूछो तो इसके पीछे भगवान को दोषी मानते हैं कि वे बरसे नहीं इसलिए ये समस्या है। गए साल बताते थे कि भगवान कुछ ज्यादा ही बरस गए इसलिए... आगे पढ़े

न हो कमीज तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे

Updated on 1 November, 2017, 13:13
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल   लोकभाषा के बडे़ कवि कालिका त्रिपाठी ने कभी रिमही में एक लघुकथा सुनाई थी। कथा कुछ ऐसी थी कि..दशहरे के दिन ननद और भौजाई एक खेत में घसियारी कर रही थी। घास काटते-काटते बात चल पड़ी..  ननद बोली-भौजी ये दशहरा क्या होता है..? भौजी ने अकबकाते हुए जवाब दिया-... आगे पढ़े

राजनीति में शाब्दिक पतन का दौर

Updated on 1 November, 2017, 13:13
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल लोकप्रिय व्यंगकवि माणिक वर्मा की एक कविता की अर्धीली है..इन नीचाइयों की अजब ऊँचाइयाँ..। पैमाना सफलता या उपलब्धि भर नापने का नहीं होता,उसके विलोम को भी आँकने का होता है। बुरा आदमी कितना बुरा है यह भी अच्छा आदमी कितना अच्छा है के बरक्स तय होता है।... आगे पढ़े

कुछ भी कहें पर ये वायरस अच्छे हैंं

Updated on 1 November, 2017, 13:13
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल बीमारियों का अपना समाजवाद होता है। उनके वायरस यह नहीं देखते कि कौन छोटा है कौन बड़ा। एसी में रहने वालों को भी डेंगू हो सकता है, झुग्गी में रहने वाले भी बचे रह सकते हैं। गाँव में सुना था कि झाड़फूंक करने वाले भूत,प्रेत,जिन्नों को पटाए... आगे पढ़े

चित्रकूट की चिंता राम हवाले

Updated on 1 November, 2017, 13:12
जयराम शुक्ल शब्द यदि वाकय में ब्रह्म होते तो इनकी अवहेलना करने वाले सारे पापी आज नरक में होते और इस धरती का बोझ कुछ कम होता। मैं ये इसलिये कह रहा हूँ कि पिछले तीन दशक में भाई लोगों ने चित्रकूट की चिंता में इतने शब्द खर्च कर दिये गए... आगे पढ़े

आर्थिक विषमताः तीन आने बनाम पंद्रह आने

Updated on 15 October, 2017, 11:00
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल मुट्ठीभर गोबरी का अन्न लेकर लोकसभा पहुंचे डा.राममनोहर लोहिया ने प्रधानमंत्री नेहरू से कहा-लो तुम भी खाओ इसे, तुम्हारे देश की जनता यही खा रही है। आज अखबार में जब विश्व के हंगर इन्डेक्स में 119 देशों में भारत के 100 वें स्थान में रहने की स्थिति... आगे पढ़े

विरोध की विश्वसनीयता भी सलीब पर

Updated on 15 October, 2017, 10:59
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल डाक्टर राममनोहर लोहिया के व्यक्तित्व के इतने आयाम हैं जिनका कोई पारावार नहीं। उनसे जुडा़ एक प्रसंग प्राख्यात समाजवादी विचारक जगदीश जोशी ने बताया था, जो विपक्ष के विरोध की मर्यादा और उसके स्तर के भी उच्च आदर्श को रेखांकित करता है। बात तिरसठ-चौंसठ की है। लोहिया... आगे पढ़े

सिस्टम के दो पाटों में पिसते वनवासी

Updated on 15 October, 2017, 10:59
जयराम शुक्ल पिछले महीने विकास संवाद के ओरछा काँन्क्लेव में जाते हुए पन्ना से गुजरना हुआ। रास्ते में सामने से आती हुई एक के बाद एक बसों को देखकर चौंका। चौकने की वजह थी, किसी में गुनौर से गुड़गांव तो किसी में पवई से रोहतक लिखा था। कई और बसों से... आगे पढ़े

इसलिए याद आ गए श्यामरुद्र पाठक

Updated on 15 October, 2017, 10:59
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल कितना अजीब है कि आदमी जब से मशीन बन गया तब से वह अपना धर्म भूल गया पर जिस मशीन को उसने बनाया वह अपना धर्म नहीं भूली। भोपाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में मातृभाषा पर मंथन चल रहा है। स्मृतियों में... आगे पढ़े

इस अरण्यसंस्कृति को नमन करिए

Updated on 10 October, 2017, 9:54
...जयराम शुक्ल अपन को जब भी मौका मिलता है जंगल निकल लेता हूँ। जंगल प्रकृति की पाठशाला है, हर बार कुछ न कुछ सीख मिलती है। जानवर,पेंड़ पौधे,नदी, झरने सभी शिक्षक हैं, बशर्तें उन्हें ध्यान से देखिए, सुनिए समझिए। ये सब उस विराट संस्कृति के हिस्से हैं जो सनातन से चलती... आगे पढ़े

जेपी और नानाजीः नदी-नाव संयोग

Updated on 10 October, 2017, 9:54
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल अक्टूबर का महीना बड़े महत्व का है। पावन,मनभावन और आराधन का। दशहरे से शुरू हुआ, देवप्रबोधिनी तक चलेगा। भगवान मुहूर्त देखकर ही विभूतियों को धरती पर भेजता है। 2 अक्टूबर को गांधीजी,शास्त्रीजी की जयंती थी। 11अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की जयंती है। चारों के... आगे पढ़े

चैनलों के चाल, चरित्र और चेहरे

Updated on 8 October, 2017, 11:17
जयराम शुक्ल सोशल मीडिया में जीएसटी के रोलबैक को लेकर मचे शोर की तस्दीक करने के लिए सोचा, कि चलो देखें टीवी चैनल्स में क्या चल रहा है। पिछले एक महीने से राम रहीम की वही एनीमेटेड रहस्यमयी गुफा देखते देखते उकता सा गया था सो कई दिनों से चैनल्स खोलने... आगे पढ़े

कलयुग केवल नाम "अधारा" वाकई

Updated on 8 October, 2017, 11:16
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल आज से कोई दस बारह साल पहले जब यूपीए सरकार ने यूनिक आईडी की अवधारणा दी थी  तब स्तंभकार व मैनेजमेंट गुरू रघुरामन ने इसकी बड़ी ही दिलचस्प सरल व सहज व्याख्या की थी। यही यूनिक आईडी को आधार कहा जाता है। यह आधार नंबर अब जीवन... आगे पढ़े

विषमता का बोझा और कबतक ढोएगी रेल

Updated on 8 October, 2017, 11:16
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल राज्यपाल या मुख्यमंत्री रेल से चलें आज कोई इसकी कल्पना नहीं कर सकता। इस दर्जे के महापुरुषों की यात्राएं भी खबर बनती हैं। पंद्रह साल पहले एक ऐसी ही घटना खबर बनी। हुआ यह कि अपने प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच पटरी नहीं बैठती थी।... आगे पढ़े

दुखिया एक किसान है रोवै औ खोवै

Updated on 8 October, 2017, 11:15
साँच कहै ता../ जयराम शुक्ल लगता है भगवान ने किसान और बैल की किस्मत एक साथ गढी है। दोनों परस्पर पूरक हैं इसलिए जब बैल का नाम लो तो किसान की आकृति उभरती है। दोनों के भाग्य में डंडा है। चौराहे पर बैल मिल जाए तो उस पर डंडे की बारिश,राजपथ... आगे पढ़े

जिन्हें रावण से हमदर्दी है उनके लिए

Updated on 8 October, 2017, 11:15
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल "त्रिलोक विजेता प्रकांड पंडित प्रचंड पराक्रमी परम शिवभक्त महान साहित्यकार लंकेश दशानन को षडयंत्र पूर्वक उसके भाई को मिला कर उसकी हत्या कर इस कपटी दुनिया से मुक्त कराने के दिन की बधाई।" इस दशहरे में एक शुभचिंतक ने जस का तस मुझे यही संदेश भेजा। यह उन्होंने... आगे पढ़े

जरख़ेज जमीन की बीमार फसलें

Updated on 8 October, 2017, 11:14
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल भोपाल से लौटते समय रेल में एक मित्र से भेंट हो गई। वे आरटीओ महकमे से थे। साथ में लाल रंग के लेदर के एक जैसे ही पाँच सूटकेस लिए । उनके साथ एक मिस्त्रीनुमा आदमी भी था,जो सूटकेस सँभाले था। मैंने मित्र से पूछा- बड़ी खरीदारी... आगे पढ़े

पर्वसंस्कृति का द्वंद्वात्मक बाजारवाद

Updated on 8 October, 2017, 11:14
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल बाजार के ढंग निराले होते हैं। वह हमारी जिंदगी को भी अपने हिसाब से हांकता है। कभी पंडिज्जी लोग तय करते थे कि किस त्योहार को कैसे मनाया जाय अब बाजार तय करता है। शरद ऋतु के स्वागत में श्री कृष्ण गोपियों के साथ रास रचाते थे।... आगे पढ़े

बीएचयू में सियासत की "लंकेटिंग"

Updated on 27 September, 2017, 9:46
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल छात्रों के साधारण से आंदोलन में राजनीति का मिर्च-मसाला कैसे मिल जाता है और उस पर मीडिया का छौंक बघार कौन सा रूप दे देता है बीएचयू प्रकरण इसका ताजा उदाहरण है। बात को बतंगड और मूल मुद्दों को लंगड़ ऐसे ही किया जाता है। छात्राओं का... आगे पढ़े

माँ पहाड़ावाली की भी तो कुछ सुनिए

Updated on 26 September, 2017, 18:23
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल चौतरफा भक्ति भाव का वातावरण है। इन नौ दिनों सभी झंझटों को ताक पर रखकर भक्तगण प्रमुदित, आनंदित रहते हैं। त्योहारों के रूप में आनंद का बंदोबस्त हमारे पुरखे कर गए । हर त्योहार मनुष्य की जिजीविषा बढा देता है। ये न होते तो सचमुच जिंदगी कितनी... आगे पढ़े

एक यायावर महाव्रती का स्मरण करते हुए

Updated on 26 September, 2017, 18:23
साँच कहै ता...जयराम शुक्ल अभी कुछ दिन पहले बात उठी कि मुगलसराय जंक्शन पं.दीनदयाल उपाध्याय के नाम कर दिया जाए। यह सुनते ही कई योद्घा विचलित हो गए। कहा इतिहास को भगवा रंग ओढाया जा रहा है हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। यह मुगलों का सराय था और मुगलों का... आगे पढ़े

फिर भी बोलो दुर्गा मैय्या की जय

Updated on 26 September, 2017, 18:23
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल "लछमी देवी दर दर भटकें बेबस निर्धन चारटके को दुर्गा पर गुंडे लहटे हैंं निर्बल अबला जान समझ के। सरस्वती को दिया मजूरी डाट दपटकर बेलदार ने, लिया अँगूठा मस्टर बुक पर काटपीट कर ठेकेदार ने। मातृशक्ति का पर्व मनाते जाएं  हम हर वर्ष रातजागरण,भजनकीर्तन क्या बढि़या उत्कर्ष।।" कई साल पहले महिला सशक्तीकरण... आगे पढ़े

प्रमुदित बौद्धिकों का ढेंचू..ढेंचू

Updated on 26 September, 2017, 18:22
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल मृणाल पांडे का एक ट्वीट चर्चाओं में है। गधे की फोटो के साथ जुमला जयंती और वैशाखनंदन वाला। चूंकि ये पुण्य विचार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर व्यक्त किए गए इसलिए इसकी और व्याख्या की जरुरत नहीं है कि यह किसके लिए और क्यों था। इस... आगे पढ़े