Thursday, 14 December 2017, 1:36 PM

साँच कहै ता मारन धावै

विकास का शोकगीत कहां गाएं किसे सुनाएं

Updated on 12 December, 2017, 11:41
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   हमारे गांव के सीवान में महुआ के दो बड़े दरख्त हुआ करते थे, उम्र कोई दो सौ वर्ष। उन्हीं के बगल से गांव जाने का रास्ता गुजरता था। पहले ढर्रा था, फिर मुरमवाली सड़क से पक्की डामर रोड़ होते हुए तरक्की ऐसी हुई कि अब शानदार टू... आगे पढ़े

एक ही रास्ता, पानी को गिरफ्तार करो

Updated on 8 December, 2017, 2:30
जयराम शुक्ल   इजराइल की गैलीना मनुस्किन मेरी सोशल मीडिया मित्र हैं। वे पूरी दुनिया घूमती हैं पर भारत से उनका खास लगाव है। वे ये इतिहास जानती हैं कि यहूदियों को जब दुनिया भर से खदेड़ा जा रहा था तब भारत में ही शरण मिली थी। कभी कभार मैं उनसे इजराइल... आगे पढ़े

इसलिए संकट में है गाँवों का वजूद

Updated on 8 December, 2017, 2:29
...जयराम शुक्ल   खजुराहो में अन्ना हजारे ने भारतमाता के मर्म की वो बात कही जिसका सपना पाले गांधी जी इहलोक से प्रस्थान कर गए। अन्ना ने कहा आज गांव संकट मेंं हैंं इस देश को बचाना है तो गांवों को बचाना होगा। इसके लिए बड़े आंदोलन की जरूरत है। उन्होंने ग्राम... आगे पढ़े

विरोधाभास के वायुमंडल में भविष्य का विमर्श

Updated on 8 December, 2017, 2:28
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   बुंदेलखंड अजीब विरोधाभासों के बीच सांस लेता है। एक ओर तलवार का शौर्य, तो दूसरी ओर छेनी-हथौड़ी से रचा गया नाजुक शिल्पलोक। एक ओर अकाल की काली छाया में सिसकता बचपन, तो दूसरी ओर मर्करी के झरनों से नहाया यौवन। आकाश से गरजते हुए हवाई जहाज जब... आगे पढ़े

तैरती बातें भी काफी कुछ कह देती हैं

Updated on 8 December, 2017, 2:28
साँच कहै ता.जयराम शुक्ल    दीनदयाल विचार प्रकाशन की पत्रिका..चरैवेति..का संपादन करते हुए शिवराजसिंह चौहान के 9 साल पूरा होने एक विशेषांक निकाला था। खास बात यह थी कि इसमें अपने विचार देने के लिए राजधानी के ज्यादातर उन पत्रकार मित्रों से आग्रह किया था जो अक्सर सरकार की खिचाई करते हुए... आगे पढ़े

राक्षस फाँसी से भी कहाँ डरते हैं

Updated on 8 December, 2017, 2:28
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   मध्यप्रदेश में एक के बाद एक घट रही दुष्कर्म की जघन्य घटनाओं के चलते सरकार का चिंतित होना स्वाभाविक है। कैबिनेट ने 12 वर्ष तक की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने के अपराध की सजा फाँसी देने की बात कही है। आईपीसी,सीआरपीसी और एवीडेंस एक्ट में बदलाव... आगे पढ़े

माफ करना मेरे बच्चो, हमारे पास कुछ भी नहीं है

Updated on 15 November, 2017, 9:19
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल   अभी कुछ दिन पहले एक कवि सम्मेलन में जाना हुआ। कभी कविताई भी कर लेता था सो पुराना कवि मानते हुए आयोजकों ने अध्यक्ष बना दिया। संगोष्ठी और कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करना बड़ा दुश्कर काम है। सबकी सुनो, आखिरी तक बैठो और सुनाओ तब जब दरी-जाजम... आगे पढ़े

उस डेढ़ पसली में अब वो बात कहां

Updated on 15 November, 2017, 9:19
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल   आदमी जब फिसलता है तो खुद के शरीर का बोझ ही उसे पटक देता है। अखाड़ों में बड़े बड़े सूरमाओं को जो देंह पछाड़ देती है अटके वक्त में वही स्वयं की दुश्मन बन जाती है। कल तक जो खूबियां थी आज वही मजाक बना देती हैं।... आगे पढ़े

कुछ मेरी भी सुनो..हे दिल्ली के देवो

Updated on 15 November, 2017, 9:18
जयराम शुक्ल   देशभर का अमन चैन हरने वाली दिल्ली की नींद हराम है। वो धुंधकाल से गुजर रही है। हर साल यह और गहन होता जाता है। मैंने मित्र से पूछा तो बोले पता नहीं किनके पापों का फल भोग रहा हूँ। फिर दार्शनिक अंदाज में बोले-जानते हो ये स्माँग गली-गली ... आगे पढ़े

आपन जात कबीर की

Updated on 15 November, 2017, 9:18
जयराम शुक्ल   मित्र ने आपत्ति दर्ज कराई-कबीर तो जेष्ठ में उमस के बीच आग बरसते दिनों में काशी में पैदा हुए थे यहां तो मंद-मंद शरद ऋतु में प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है।मैंने कहा- कबीर जैसे औघड़ महापुरुष का तो नित्यप्रतिदिन आठों याम,चौबीसों घंटे, प्रतिक्षण प्रकटोत्सव मनाया जाना चाहिए। नाम की... आगे पढ़े

पैराडाइज लीक्सः खबरों की प्रणम्य सहकारिता

Updated on 15 November, 2017, 9:18
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल   लाख लानतों और मलानतों के बीच अभी भी पत्रकारिता आखिरी उम्मीद के रूप में बची हुई है। पनामा के बाद पैराडाइज लीक्स ने यह साबित किया है कि दुनिया के आर्थिक स्त्रोतों को लूटकर सात समंदर पर कहीं भी गाड़ कर रखो हमारी नजर रहेगी। सरकारें भलें... आगे पढ़े

किसको कहेें मसीहा किस पर यकीं करें

Updated on 15 November, 2017, 9:17
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   8 नवंबर को देश में पुष्यनक्षत्र सा कोई योग बना था। एक कालाधन दिवस मना रहे है, तो दूजे धन का कालादिवस। एक दिन में दो-दो दिवस। ऊपर से पैराडाइज पेपर्स लीक काण्ड। यानी कि भ्रष्टाचार और राजनीति का मणि-कांचन योग। एक कह रहे हैं कि हमने... आगे पढ़े

तुम्हीं ने दर्द दिया है तुम्हीं दवा देना

Updated on 8 November, 2017, 7:41
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   दो मसले मुझे हमेशा बहुत परेशान करते हैं। एक डाक्टरों की पर्ची और दूसरी बड़ी अदालतों के फैसलों की इबारत। मैं अँग्रेजी माध्यम से विग्यान का स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधिधारी हूँ जब मैं असहज और परेशान हो जाता हूँ तो उन लोगों की क्या कहिए जिन्हें पढाई... आगे पढ़े

खादी, मखमल और टाट के पैबन्द

Updated on 8 November, 2017, 7:40
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल    सत्तर के दशक में हम लोग एक कविता की दो पंक्तियों को दीवारों पर नारे की तरह लिखा करते थे ..खादी ने मखमल से ऐसी सांठ-गांठ कर डाली है, टाटा, बिड़ला, डामिलया की बरहों मास दिवाली है। उन दिनों किसी भी नेता के खिलाफ सबसे बड़ा लांछन... आगे पढ़े

इस साइबर सडांध से अपराध ही पनपेगा

Updated on 8 November, 2017, 7:39
.जयराम शुक्ल   अभी कुछ दिन पहले ही मित्र ने मैसज शेयर किया कि नोटबंदी होती न होती पोर्नबंदी हो जाती तो समाज का बड़ा कल्याण होता। रोज ब रोज अखबार की सुर्खियों और चैनल्स की ब्रेकिंग देखकर लगा कि बात में दम है, यह विचार सोलह आने सही है। दिल्ली के... आगे पढ़े

विन्ध्यप्रदेशः एक भूली बिसरी दास्तां

Updated on 8 November, 2017, 7:39
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   इतिहास के कुछ घटनाक्रम कभी कभी कचोटने वाले होते हैं। 1नवंबर हम विन्ध्यवासियों के लिए भारी साँसत का दिन होता है। वो इसलिए कि मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर हँसे कि विन्ध्यप्रदेश के बलिदान दिवस पर रोएं। मन को लाख दबा के रखें पर विन्ध्यप्रदेश सामने आ... आगे पढ़े

कोई हसीन नजारा तो है नजर के लिए

Updated on 8 November, 2017, 7:39
साँच कहै ता....जयराम शुक्ल हम फुरसतिया लोगों को बैठे-ठाले किसी का मजाक बनाने,खिल्ली उड़ाने में बहुत मजा आता है। परपीड़ा से उपजे आनंद की अनुभूति ही गजब की होती है। परसाई जी ने दसवें रस की खोज की थी..निंदारस। हमारा संभाषण, हमारी पत्रकारिता, हमारी रोजमर्रा की सोच निंदा रस की चासनी... आगे पढ़े

इसलिए हिन्दू राष्ट्रवादी हैं सरदार पटेल

Updated on 1 November, 2017, 13:14
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   31 अक्टूबर की तारीख का बड़ा महत्व है,इसी दिन ही सरदार बल्लभभवन भाई पटेल पैदा हुए थे। इस महान हस्ती को इतिहास के पन्ने से अलग कर दिया जाए तो हम भारतवासीयों की पहचान रीढविहीन और लिजलिजी हो जाएगी। इसलिए इस दिन को मैं प्रातः स्मरणीय मानता... आगे पढ़े

सत्ता में बौद्धिकों की अहमियत पर सवाल

Updated on 1 November, 2017, 13:14
साँँच कहै ता...जयराम शुक्ल   अभी हाल ही में एक राष्ट्रीय समेनार में भाग लेने का मौका मिला। विषय था..कुशल प्रशासनिक रणनीति बनाने में अकादमिक योगदान की जरूरत। इत्तेफाकन् मुझे ही मुख्य वक्ता की भूमिका निभानी पड़ी वजह जिन कुलपति महोदय को उद्घाटन के लिए आना था ऐन वक्त पर नहीं आए।... आगे पढ़े

कारपोरेट की इल्लियां अब खेतों की ओर

Updated on 1 November, 2017, 13:13
साँच कहै ता  .... जयराम शुक्ल   तरकारियों के भाव आसमान पर टँग गए। ठेलेवाले कुम्हड़े तक के दाम पौव्वा में बताते हैं। पूछो तो इसके पीछे भगवान को दोषी मानते हैं कि वे बरसे नहीं इसलिए ये समस्या है। गए साल बताते थे कि भगवान कुछ ज्यादा ही बरस गए इसलिए... आगे पढ़े

न हो कमीज तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे

Updated on 1 November, 2017, 13:13
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल   लोकभाषा के बडे़ कवि कालिका त्रिपाठी ने कभी रिमही में एक लघुकथा सुनाई थी। कथा कुछ ऐसी थी कि..दशहरे के दिन ननद और भौजाई एक खेत में घसियारी कर रही थी। घास काटते-काटते बात चल पड़ी..  ननद बोली-भौजी ये दशहरा क्या होता है..? भौजी ने अकबकाते हुए जवाब दिया-... आगे पढ़े

राजनीति में शाब्दिक पतन का दौर

Updated on 1 November, 2017, 13:13
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल लोकप्रिय व्यंगकवि माणिक वर्मा की एक कविता की अर्धीली है..इन नीचाइयों की अजब ऊँचाइयाँ..। पैमाना सफलता या उपलब्धि भर नापने का नहीं होता,उसके विलोम को भी आँकने का होता है। बुरा आदमी कितना बुरा है यह भी अच्छा आदमी कितना अच्छा है के बरक्स तय होता है।... आगे पढ़े

कुछ भी कहें पर ये वायरस अच्छे हैंं

Updated on 1 November, 2017, 13:13
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल बीमारियों का अपना समाजवाद होता है। उनके वायरस यह नहीं देखते कि कौन छोटा है कौन बड़ा। एसी में रहने वालों को भी डेंगू हो सकता है, झुग्गी में रहने वाले भी बचे रह सकते हैं। गाँव में सुना था कि झाड़फूंक करने वाले भूत,प्रेत,जिन्नों को पटाए... आगे पढ़े

चित्रकूट की चिंता राम हवाले

Updated on 1 November, 2017, 13:12
जयराम शुक्ल शब्द यदि वाकय में ब्रह्म होते तो इनकी अवहेलना करने वाले सारे पापी आज नरक में होते और इस धरती का बोझ कुछ कम होता। मैं ये इसलिये कह रहा हूँ कि पिछले तीन दशक में भाई लोगों ने चित्रकूट की चिंता में इतने शब्द खर्च कर दिये गए... आगे पढ़े

आर्थिक विषमताः तीन आने बनाम पंद्रह आने

Updated on 15 October, 2017, 11:00
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल मुट्ठीभर गोबरी का अन्न लेकर लोकसभा पहुंचे डा.राममनोहर लोहिया ने प्रधानमंत्री नेहरू से कहा-लो तुम भी खाओ इसे, तुम्हारे देश की जनता यही खा रही है। आज अखबार में जब विश्व के हंगर इन्डेक्स में 119 देशों में भारत के 100 वें स्थान में रहने की स्थिति... आगे पढ़े

विरोध की विश्वसनीयता भी सलीब पर

Updated on 15 October, 2017, 10:59
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल डाक्टर राममनोहर लोहिया के व्यक्तित्व के इतने आयाम हैं जिनका कोई पारावार नहीं। उनसे जुडा़ एक प्रसंग प्राख्यात समाजवादी विचारक जगदीश जोशी ने बताया था, जो विपक्ष के विरोध की मर्यादा और उसके स्तर के भी उच्च आदर्श को रेखांकित करता है। बात तिरसठ-चौंसठ की है। लोहिया... आगे पढ़े

सिस्टम के दो पाटों में पिसते वनवासी

Updated on 15 October, 2017, 10:59
जयराम शुक्ल पिछले महीने विकास संवाद के ओरछा काँन्क्लेव में जाते हुए पन्ना से गुजरना हुआ। रास्ते में सामने से आती हुई एक के बाद एक बसों को देखकर चौंका। चौकने की वजह थी, किसी में गुनौर से गुड़गांव तो किसी में पवई से रोहतक लिखा था। कई और बसों से... आगे पढ़े

इसलिए याद आ गए श्यामरुद्र पाठक

Updated on 15 October, 2017, 10:59
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल कितना अजीब है कि आदमी जब से मशीन बन गया तब से वह अपना धर्म भूल गया पर जिस मशीन को उसने बनाया वह अपना धर्म नहीं भूली। भोपाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में मातृभाषा पर मंथन चल रहा है। स्मृतियों में... आगे पढ़े

इस अरण्यसंस्कृति को नमन करिए

Updated on 10 October, 2017, 9:54
...जयराम शुक्ल अपन को जब भी मौका मिलता है जंगल निकल लेता हूँ। जंगल प्रकृति की पाठशाला है, हर बार कुछ न कुछ सीख मिलती है। जानवर,पेंड़ पौधे,नदी, झरने सभी शिक्षक हैं, बशर्तें उन्हें ध्यान से देखिए, सुनिए समझिए। ये सब उस विराट संस्कृति के हिस्से हैं जो सनातन से चलती... आगे पढ़े

जेपी और नानाजीः नदी-नाव संयोग

Updated on 10 October, 2017, 9:54
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल अक्टूबर का महीना बड़े महत्व का है। पावन,मनभावन और आराधन का। दशहरे से शुरू हुआ, देवप्रबोधिनी तक चलेगा। भगवान मुहूर्त देखकर ही विभूतियों को धरती पर भेजता है। 2 अक्टूबर को गांधीजी,शास्त्रीजी की जयंती थी। 11अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की जयंती है। चारों के... आगे पढ़े