Sunday, 25 February 2018, 9:10 AM

साँच कहै ता मारन धावै

शाब्दिक बेहयाई और संसद की लक्षमणरेखा

Updated on 11 February, 2018, 11:15
साँच कहै ता.जयराम शुक्ल ये अजीब इत्तेफाक है, जिस दिन कैलीफोर्निया की 78 वर्षीय डेमोक्रेट नैंसी पेलोसी अमेरिकी सदन में अपने आठ घंटे के लंबे प्रभावी भाषण के जरिए संसदीय इतिहास रच रहीं थी उसी दिन भारत के सदन में सांसद रेणुका चौधरी अपने अट्टहासों के जरिए संसदीय गरिमा पर चार... आगे पढ़े

अपने-अपने हिस्से का समाजवाद

Updated on 8 February, 2018, 10:15
...जयराम शुक्ल गाँधी और समाजवाद ये दो ऐसे मसले हैं कि हर राजनीतिक दल अपने ब्राँडिंग के रैपर में चिपकाए रखना चाहता है। पर वास्तविकता वैसी ही है जैसे कि गाँधी की तस्वीर वाले नोट की ताकत से सभी किस्म के धतकरम होते हैं और वैसे ही समाजवाद के नाम की ओट... आगे पढ़े

मेरे मरने के बाद लोग सुनेंगे पर ये 'अष्टधातुई' काँग्रेसी नहीं

Updated on 8 February, 2018, 10:14
..जयराम शुक्ल   विंध्य के सफेद शेर कहे जाने वाले श्रीनिवास तिवारी की अंतिम यात्रा में जो शामिल हुआ या देखा उसकी जुबान में बाल ठाकरे की मौत पर उमड़ी भीड़ का वृतांत था। उत्तर भारत में तिवारीजी कमलापति त्रिपाठी के बाद दूसरे ऐसे बड़े नेता थे जिनके लिए पार्टीलाइन तोड़कर ऐसा... आगे पढ़े

दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें

Updated on 13 January, 2018, 11:28
जयराम शुक्ल   स्वामी विवेकानंद युवाओं के आदर्श हैं। उनकी जयंती पर युवा दिवस मनाया जाता है। उनके बारे में इतना कुछ लिखा पढ़ा जा चुका है कि एक औसत युवा भी कुछ न कुछ तो जानता ही है। स्वामीजी ने भारतीय ग्यान परंपरा, अध्यात्म और सनातनी संस्कृति की कीर्तिपताका को विश्व... आगे पढ़े

फिर एक मोड़ पर प्रेस की आजादी

Updated on 11 January, 2018, 10:27
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   भारत में प्रेस की आजादी के सवाल को लेकर दो घटनाएं चर्चाओं में हैं। एक गंभीर चिंता में डालने वाली,दूसरी उम्मीदों की लौ को बचाए रखने वाली। इन दोनों को लेकर शुरू हुआ विमर्श भारत में आजाद प्रेस के भविष्य को लेकर निश्चित ही कोई न कोई... आगे पढ़े

इस पाखंडी दौर में कबीर के गुरू का स्मरण

Updated on 9 January, 2018, 12:35
जयराम शुक्ल   देश में धरम की बयार चल रही है। धर्म यात्राएं निकल रही हैं। पटवरी-कानूनगो-तहसीलदारों के हाथों आगे बढ़ते हुए धर्मध्वजा कलेक्टर लोग आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें कोई हर्ज भी नहीं। चलो इसी बहाने ब्यूरोक्रेसी पतित से पावन हो रही है।  हो सकता है ये पावन चित्त ही देश... आगे पढ़े

जिस बात का खतरा है समझो कि वो कल होगी

Updated on 9 January, 2018, 12:34
..जयराम शुक्ल   नए साल की शुरुआत उम्मीद के हिसाब से नहीं हुई। महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगाँव की घटना से उपजी हिंसक घृणा ने सूरज की किरणों को ज्वलनशील बनाकर लपटों में बदल दिया। आधे भारत में बर्फवारी और शीतलहर के बीच उसकी आँच यहाँ तक महसूस हो रही है। स्लेट पर  लिखी इबारत... आगे पढ़े

हर पल मनाएं जिन्दगी का जश्न

Updated on 3 January, 2018, 1:32
जयराम शुक्ल    समय की गति के हिसाब से हर नया विहान ही नया वर्ष है। हर क्षण अगले क्षण की पृष्ठभूमि बनता जाता है। सृष्टि के अस्तित्व में आने के बाद से समय की गति ऐसी ही है... ऐसी ही चलती रहेगी महाप्रलय तक।    महाभारत का एक दृष्टान्त है- राजसूय यज्ञ के... आगे पढ़े

विकास का"आदित्य ह्रदय पाठ"है ये सोलर प्लांट

Updated on 24 December, 2017, 20:16
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   रीवा का अल्ट्रामेगा सोलर प्लांट, थर्मलपावर के धुंए और सीमेंट के गर्दोगुबार से गैस चैम्बर में बदल रहे विंध्य के लिए गौरवान्वित करने वाला स्तुत्य काम है। ऊर्जा के अजस्त्र श्रोत सूर्य की रजत रस्मियों को बिजली में बदलने का यह दुनिया का सबसे बड़ा सोलर प्लाँट... आगे पढ़े

चुनाव अब कारपोरेटवाँर की डर्टी ट्रिक्स बन गए ..जयराम शुक्ल

Updated on 15 December, 2017, 6:48
गुजरात विधानसभा चुनाव में जिस तरीके की भाषा और चरित्र हनन की डर्टी ट्रिक्स अपनाई गई और अपनाई जा रही है उससे अब यह कहना बेमानी है कि चुनाव लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। हमसब एक लोकपर्व में राजनीति के कोढ़ को फैलते हुए देखने के लिए अभिशापित हैं।... आगे पढ़े

विकास का शोकगीत कहां गाएं किसे सुनाएं

Updated on 12 December, 2017, 11:41
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   हमारे गांव के सीवान में महुआ के दो बड़े दरख्त हुआ करते थे, उम्र कोई दो सौ वर्ष। उन्हीं के बगल से गांव जाने का रास्ता गुजरता था। पहले ढर्रा था, फिर मुरमवाली सड़क से पक्की डामर रोड़ होते हुए तरक्की ऐसी हुई कि अब शानदार टू... आगे पढ़े

एक ही रास्ता, पानी को गिरफ्तार करो

Updated on 8 December, 2017, 2:30
जयराम शुक्ल   इजराइल की गैलीना मनुस्किन मेरी सोशल मीडिया मित्र हैं। वे पूरी दुनिया घूमती हैं पर भारत से उनका खास लगाव है। वे ये इतिहास जानती हैं कि यहूदियों को जब दुनिया भर से खदेड़ा जा रहा था तब भारत में ही शरण मिली थी। कभी कभार मैं उनसे इजराइल... आगे पढ़े

इसलिए संकट में है गाँवों का वजूद

Updated on 8 December, 2017, 2:29
...जयराम शुक्ल   खजुराहो में अन्ना हजारे ने भारतमाता के मर्म की वो बात कही जिसका सपना पाले गांधी जी इहलोक से प्रस्थान कर गए। अन्ना ने कहा आज गांव संकट मेंं हैंं इस देश को बचाना है तो गांवों को बचाना होगा। इसके लिए बड़े आंदोलन की जरूरत है। उन्होंने ग्राम... आगे पढ़े

विरोधाभास के वायुमंडल में भविष्य का विमर्श

Updated on 8 December, 2017, 2:28
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   बुंदेलखंड अजीब विरोधाभासों के बीच सांस लेता है। एक ओर तलवार का शौर्य, तो दूसरी ओर छेनी-हथौड़ी से रचा गया नाजुक शिल्पलोक। एक ओर अकाल की काली छाया में सिसकता बचपन, तो दूसरी ओर मर्करी के झरनों से नहाया यौवन। आकाश से गरजते हुए हवाई जहाज जब... आगे पढ़े

तैरती बातें भी काफी कुछ कह देती हैं

Updated on 8 December, 2017, 2:28
साँच कहै ता.जयराम शुक्ल    दीनदयाल विचार प्रकाशन की पत्रिका..चरैवेति..का संपादन करते हुए शिवराजसिंह चौहान के 9 साल पूरा होने एक विशेषांक निकाला था। खास बात यह थी कि इसमें अपने विचार देने के लिए राजधानी के ज्यादातर उन पत्रकार मित्रों से आग्रह किया था जो अक्सर सरकार की खिचाई करते हुए... आगे पढ़े

राक्षस फाँसी से भी कहाँ डरते हैं

Updated on 8 December, 2017, 2:28
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   मध्यप्रदेश में एक के बाद एक घट रही दुष्कर्म की जघन्य घटनाओं के चलते सरकार का चिंतित होना स्वाभाविक है। कैबिनेट ने 12 वर्ष तक की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने के अपराध की सजा फाँसी देने की बात कही है। आईपीसी,सीआरपीसी और एवीडेंस एक्ट में बदलाव... आगे पढ़े

माफ करना मेरे बच्चो, हमारे पास कुछ भी नहीं है

Updated on 15 November, 2017, 9:19
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल   अभी कुछ दिन पहले एक कवि सम्मेलन में जाना हुआ। कभी कविताई भी कर लेता था सो पुराना कवि मानते हुए आयोजकों ने अध्यक्ष बना दिया। संगोष्ठी और कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करना बड़ा दुश्कर काम है। सबकी सुनो, आखिरी तक बैठो और सुनाओ तब जब दरी-जाजम... आगे पढ़े

उस डेढ़ पसली में अब वो बात कहां

Updated on 15 November, 2017, 9:19
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल   आदमी जब फिसलता है तो खुद के शरीर का बोझ ही उसे पटक देता है। अखाड़ों में बड़े बड़े सूरमाओं को जो देंह पछाड़ देती है अटके वक्त में वही स्वयं की दुश्मन बन जाती है। कल तक जो खूबियां थी आज वही मजाक बना देती हैं।... आगे पढ़े

कुछ मेरी भी सुनो..हे दिल्ली के देवो

Updated on 15 November, 2017, 9:18
जयराम शुक्ल   देशभर का अमन चैन हरने वाली दिल्ली की नींद हराम है। वो धुंधकाल से गुजर रही है। हर साल यह और गहन होता जाता है। मैंने मित्र से पूछा तो बोले पता नहीं किनके पापों का फल भोग रहा हूँ। फिर दार्शनिक अंदाज में बोले-जानते हो ये स्माँग गली-गली ... आगे पढ़े

आपन जात कबीर की

Updated on 15 November, 2017, 9:18
जयराम शुक्ल   मित्र ने आपत्ति दर्ज कराई-कबीर तो जेष्ठ में उमस के बीच आग बरसते दिनों में काशी में पैदा हुए थे यहां तो मंद-मंद शरद ऋतु में प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है।मैंने कहा- कबीर जैसे औघड़ महापुरुष का तो नित्यप्रतिदिन आठों याम,चौबीसों घंटे, प्रतिक्षण प्रकटोत्सव मनाया जाना चाहिए। नाम की... आगे पढ़े

पैराडाइज लीक्सः खबरों की प्रणम्य सहकारिता

Updated on 15 November, 2017, 9:18
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल   लाख लानतों और मलानतों के बीच अभी भी पत्रकारिता आखिरी उम्मीद के रूप में बची हुई है। पनामा के बाद पैराडाइज लीक्स ने यह साबित किया है कि दुनिया के आर्थिक स्त्रोतों को लूटकर सात समंदर पर कहीं भी गाड़ कर रखो हमारी नजर रहेगी। सरकारें भलें... आगे पढ़े

किसको कहेें मसीहा किस पर यकीं करें

Updated on 15 November, 2017, 9:17
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   8 नवंबर को देश में पुष्यनक्षत्र सा कोई योग बना था। एक कालाधन दिवस मना रहे है, तो दूजे धन का कालादिवस। एक दिन में दो-दो दिवस। ऊपर से पैराडाइज पेपर्स लीक काण्ड। यानी कि भ्रष्टाचार और राजनीति का मणि-कांचन योग। एक कह रहे हैं कि हमने... आगे पढ़े

तुम्हीं ने दर्द दिया है तुम्हीं दवा देना

Updated on 8 November, 2017, 7:41
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   दो मसले मुझे हमेशा बहुत परेशान करते हैं। एक डाक्टरों की पर्ची और दूसरी बड़ी अदालतों के फैसलों की इबारत। मैं अँग्रेजी माध्यम से विग्यान का स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधिधारी हूँ जब मैं असहज और परेशान हो जाता हूँ तो उन लोगों की क्या कहिए जिन्हें पढाई... आगे पढ़े

खादी, मखमल और टाट के पैबन्द

Updated on 8 November, 2017, 7:40
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल    सत्तर के दशक में हम लोग एक कविता की दो पंक्तियों को दीवारों पर नारे की तरह लिखा करते थे ..खादी ने मखमल से ऐसी सांठ-गांठ कर डाली है, टाटा, बिड़ला, डामिलया की बरहों मास दिवाली है। उन दिनों किसी भी नेता के खिलाफ सबसे बड़ा लांछन... आगे पढ़े

इस साइबर सडांध से अपराध ही पनपेगा

Updated on 8 November, 2017, 7:39
.जयराम शुक्ल   अभी कुछ दिन पहले ही मित्र ने मैसज शेयर किया कि नोटबंदी होती न होती पोर्नबंदी हो जाती तो समाज का बड़ा कल्याण होता। रोज ब रोज अखबार की सुर्खियों और चैनल्स की ब्रेकिंग देखकर लगा कि बात में दम है, यह विचार सोलह आने सही है। दिल्ली के... आगे पढ़े

विन्ध्यप्रदेशः एक भूली बिसरी दास्तां

Updated on 8 November, 2017, 7:39
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   इतिहास के कुछ घटनाक्रम कभी कभी कचोटने वाले होते हैं। 1नवंबर हम विन्ध्यवासियों के लिए भारी साँसत का दिन होता है। वो इसलिए कि मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर हँसे कि विन्ध्यप्रदेश के बलिदान दिवस पर रोएं। मन को लाख दबा के रखें पर विन्ध्यप्रदेश सामने आ... आगे पढ़े

कोई हसीन नजारा तो है नजर के लिए

Updated on 8 November, 2017, 7:39
साँच कहै ता....जयराम शुक्ल हम फुरसतिया लोगों को बैठे-ठाले किसी का मजाक बनाने,खिल्ली उड़ाने में बहुत मजा आता है। परपीड़ा से उपजे आनंद की अनुभूति ही गजब की होती है। परसाई जी ने दसवें रस की खोज की थी..निंदारस। हमारा संभाषण, हमारी पत्रकारिता, हमारी रोजमर्रा की सोच निंदा रस की चासनी... आगे पढ़े

इसलिए हिन्दू राष्ट्रवादी हैं सरदार पटेल

Updated on 1 November, 2017, 13:14
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   31 अक्टूबर की तारीख का बड़ा महत्व है,इसी दिन ही सरदार बल्लभभवन भाई पटेल पैदा हुए थे। इस महान हस्ती को इतिहास के पन्ने से अलग कर दिया जाए तो हम भारतवासीयों की पहचान रीढविहीन और लिजलिजी हो जाएगी। इसलिए इस दिन को मैं प्रातः स्मरणीय मानता... आगे पढ़े

सत्ता में बौद्धिकों की अहमियत पर सवाल

Updated on 1 November, 2017, 13:14
साँँच कहै ता...जयराम शुक्ल   अभी हाल ही में एक राष्ट्रीय समेनार में भाग लेने का मौका मिला। विषय था..कुशल प्रशासनिक रणनीति बनाने में अकादमिक योगदान की जरूरत। इत्तेफाकन् मुझे ही मुख्य वक्ता की भूमिका निभानी पड़ी वजह जिन कुलपति महोदय को उद्घाटन के लिए आना था ऐन वक्त पर नहीं आए।... आगे पढ़े

कारपोरेट की इल्लियां अब खेतों की ओर

Updated on 1 November, 2017, 13:13
साँच कहै ता  .... जयराम शुक्ल   तरकारियों के भाव आसमान पर टँग गए। ठेलेवाले कुम्हड़े तक के दाम पौव्वा में बताते हैं। पूछो तो इसके पीछे भगवान को दोषी मानते हैं कि वे बरसे नहीं इसलिए ये समस्या है। गए साल बताते थे कि भगवान कुछ ज्यादा ही बरस गए इसलिए... आगे पढ़े

साँच कहै ता मारन धावै