Tuesday, 23 May 2017, 2:11 PM

साँच कहै ता मारन धावै

टनाटनदास और तैमूर

Updated on 24 December, 2016, 10:17
वेशक नाम में कुछ भी नहीं धरा है। गधे को घोड़ा कह देने से वह घोड़ा नहीं हो जाता और न आम, इमली। गधा गधा ही रहेगा और आम आम ही। चरित्र नहीं बदलता। कपूत का नाम कुलदीपक रखो तो क्या उजियारा करने लगेगा कुलवंश का, नहीं। उसे जो करना है, वही करेगा।... आगे पढ़े

इस महाभारत में कौरव ही कौरव

Updated on 28 April, 2015, 12:37
इस महाभारत में कौरव ही कौरव    वेदव्यास ने महाभारत लिखने के बाद दावा किया कि दुनिया में जो कुछ है वो इसमें है और जो यहां नहीं है वह कहीं भी नहीं है। इस लोकसभा चुनाव में आप महाभारत की झलक देख सकते हैं। बात भीष्म से शुरू करें कि दुर्योधन... आगे पढ़े

चुनाव में राजनीति के गैंग्स आॅॅफ वासेपुर

Updated on 28 April, 2015, 12:36
चुनाव में राजनीति के गैंग्स आॅॅफ वासेपुर पार्टी का मतलब लोकतांत्रिक इकाई स्तर के कार्यकर्ताओं द्वारा चुना हुआ संगठन जो सदस्यों की सामूहिक राय के आधार पर चलता है। गिरोह में आंतरिक लोकतंत्र की कोई जगह नहीं होती। माफिया सत्तातंत्र के समानांतर अपराधियों का समूह होता है जो व्यवस्था को अपनी... आगे पढ़े

या मोदी सर्वभूतेषु पीएमरूपेण संस्थिता

Updated on 28 April, 2015, 12:34
या मोदी सर्वभूतेषु पीएमरूपेण संस्थिता घरों के रात में भी खुले ताले और शहर में निर्भयता से घूमते नर नरियों को देख कर इनदिनों ऐसे लग रहा है जैसे इस साल वसंत के साथ रामराज ने दस्तक दी हो। पूछने पर रहस्य का पता चला कि ये इलेक्शन का साइड इफेक्ट... आगे पढ़े

डेमोक्रेसी की पीठ पर शनि की अढैय्या

Updated on 28 April, 2015, 12:33
डेमोक्रेसी की पीठ पर शनि की अढैय्या अपने देश की दो खास बातें जो दुनिया में कहीं नहीं। इन्टेलीजेन्स ब्यूरो और ज्योतिष। इनके आंकलन कभी मिथ्या नहीं होते। जैसे मुंबई हमले के बाद आईबी ने कहा- कि मैंने पहले ही कहा था कि हमला होगा, तो हुआ। मान लीजिए हमला नहीं... आगे पढ़े

इस देश का यारो क्या कहना

Updated on 28 April, 2015, 12:30
इस देश का यारो क्या कहना प्रचंड राष्ट्रप्रेम की चाशनी में डूबे इस गाली-गलौज भरे चुनाव को यदि स्वर्ग से सरदार पटेल, विवेकानंदजी या बापू देख रहे होंगे तो वे निश्चित ही अफसोस करते होंगे कि उनके झंडाबरदारों के रगों में ये कौन सा लूहू हिलारें ले रहा है। उन्हें कौन... आगे पढ़े

सियासत के बाजार में रद्दी के भाव वाले लोग

Updated on 28 April, 2015, 12:28
सियासत के बाजार में रद्दी के भाव वाले लोग इस साल वसंत के बाद का पतझड़ पेड़ों में आने की बजाय कांग्रेस में आ गया। डाली-डाली, पत्ता-पत्ता सब झड़ने को बेताब दिख रहे हैं। जब सोए तब कांगे्रसी थे, जागते ही भाजपाई हो गए। कुछ तो मौका देखके चौका मार रहे... आगे पढ़े

चुनाव के रंगमंच में बेसिर-पैर के प्रहसन

Updated on 28 April, 2015, 12:26
चुनाव के रंगमंच में बेसिर-पैर के प्रहसन ऐसे विचित्र चुनाव से शायद ही किसी पीढ़ी का वास्ता पड़ा हो। देश के बुनियादी मुद्दों को छोड़कर सभी बातें हो रही हैं। कांग्रेस ने मोदी की पत्नी का क्या पता लगा लिया मानों वास्कोडिगामा ने भारत खोज लिया हो। अपने भोपाल के कांग्रेसियों... आगे पढ़े

चुनावी वॉर रूमों से निकलते कलह के कोरस

Updated on 28 April, 2015, 12:26
चुनावी वॉर रूमों से निकलते कलह के कोरस जब कोई इस चुनाव को लोकतंत्र का महोत्सव कहता है तब मुझे लगता है कि देश के लिए इससे भद्दा कोई दूसरा मजाकिया शब्द हो ही नहीं सकता। मैं इस चुनाव को मर्यादाहीन व अराजक एक ऐसा राष्ट्रीय कलह मानता हूं जिसमें चारित्रिक... आगे पढ़े

अर्थनीति का भावी मॉडल इस चुनाव से समझें

Updated on 28 April, 2015, 12:20
अर्थनीति का भावी मॉडल इस चुनाव से समझें नई सरकार की आर्थिक मॉडल कैसे होगा  इस चुनाव की अर्थव्यवस्था के बरक्स भी समझा जा सकता है।  एक जानकारी के अनुसार इस लोकसभा चुनाव में सरकारी खजाने से कुलजमा 3600 करोड़ रूपयों के खर्च होने का अनुमान है। यह खर्च चुनाव के... आगे पढ़े

इन्हें ..माउथ डायरिया..है

Updated on 28 April, 2015, 12:20
इन्हें ..माउथ डायरिया..है लोग पूछ रहे हैं इन दिनों नेताओं को कौन सी बीमारी हो गई है? मुंह से दुर्गन्धित शब्द निकल रहे हैं। कोई न कोई बीमारी तो है। बीमारियों का क्या? वे किसी को संक्रमित कर सकती हैं और कैसे भी हो सकती हैं। वैज्ञानिक हर साल कोई न... आगे पढ़े

काशी कबीर की है,सियासी गुंडों की नहीं

Updated on 28 April, 2015, 12:19
काशी कबीर की है,सियासी गुंडों की नहीं   काशी-बनारस में इन दिनों बिना मुहूरत कुंभ भरा है। यह पवित्र नगरी युगों से स्वर्ग की लालसा रखने वालों को पीठ पर ढ़ोती आई है। फिलहाल दस पर सत्तालोलुपों का भारी बोझ है। जिस गली से निकलों वहीं राजनीति के हुड़दंगी। कोई किसी... आगे पढ़े

चौतरे पर हमाम की नंगई

Updated on 28 April, 2015, 12:19
चौतरे पर हमाम की नंगई   दिग्विजय सिंह जो भी करते हैं डंके की चोट पर करते है, जो भी बोलते हैं सवा आना सच बोलते हैं। चौबीस साल छोटी प्रेयसी की फोटो लीक होने के बाद वे औरों की तरह बेटी या छोटी बहन तुल्य भी बता सकते थे। वे... आगे पढ़े

आने को है तैय्यार एक और कालिगुला

Updated on 28 April, 2015, 12:19
आने को है तैय्यार एक और कालिगुला जी हाँ ये चुनाव ऐतिहासिक है। झूठ, फरेब, मक्कारी का तना हुआ वितान है। चक्कियों को हवा में उड़ाता हुआ पिसान(आटा) है। घिघियाती नौकरशाही है, मिमियाता हुआ मीडिया है। झूंठ ही झ्ांूठ की रस्सियां बुनते जाओ ये इंडिया है। जी हाँ ये चुनाव ऐतिहासिक... आगे पढ़े

बहुत बिजी हैं नमो नमो

Updated on 28 April, 2015, 12:17
बहुत बिजी हैं नमो नमो नमो नमों भई नमो नमो अब तो बोलो नमो नमो सुबह दोपहर शाम ही काहे दिन भर बोलो नमो नमो,   नमो नमो हर सभा सभा नमो नमो कर बही हवा कोई मर्ज बस एक इलाज नमो नमो है वही दवा।   अडवानी जी नमो नमो मुरली सुषमा नमो नमो अमित शाह से काम चलाओ बहुत बिजी हैं नमो... आगे पढ़े

ताकि सनद रहे

Updated on 28 April, 2015, 12:16
ताकि सनद रहे पिछले दो दशकों देश के शीर्ष नाटककारों में शुमार श्री योगेश त्रिपाठी द्वारा अपनी बोली में लिखे नाटकों व नाट्य रूपांतरणों की पुस्तक के बारे में चर्चा करें उससे पहले अपनी बोली के नामरूपों के द्वंद से निपट लिया जाए। लोकनाट्य परंपराओं का पुनर्वालोकन हो जाए। इतिहास की ओर पलटकर कुछ ऐसे... आगे पढ़े

विशेष टिप्पणी; दुनिया समझे दर्द के रिश्तों की तपिश

Updated on 28 April, 2015, 12:15
विशेष टिप्पणी; दुनिया समझे दर्द के रिश्तों की तपिश पेशावर से उठे दर्द के सैलाब की धाराएं चौतरफा फूट पड़ी हैं। इसका आवेग हिन्दुस्तान की ओर जरा तीव्र है। एक कवि ने लिखा था किसी वाकए पर- हादसा कोई गुजर गया ऐसे, हर घर में कोई मर गया हो जैसे। आज... आगे पढ़े

किन गांवों को आदर्श बनाएंगे जनाब!

Updated on 28 April, 2015, 12:14
किन गांवों को आदर्श बनाएंगे जनाब! नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्कारों की पाठशाला से भले ही तपकर निकले हों पर प्रधानमंत्री के तौर पर पिछले छ: महीनों में उन्होंने जितने फैसले लिए उनमें ज्यादातर में महात्मा गांधी की छाप नजर आती है। सांसद आदर्श गांव योजना हो या... आगे पढ़े

वैदिक वाड्.मय से निकला है विज्ञानं

Updated on 27 April, 2015, 16:10
वैदिक वाड्.मय से निकला है विज्ञानं   मिथिला प्रसाद त्रिपाठी संस्कृत का सर्वाधिक प्राचीन साहित्य तो वेद ही है,ये भारतीय चिन्तन एवं भारतीय ज्ञान विज्ञान के लिए भी सर्वाधिक प्राचीन प्रामाणिक ग्रन्थ है। उन दिनों भी भारत मंे विज्ञान के कई क्षेत्र विकसित थे। भौतिकषास्त्र, रयायनषास्त्र, वनस्पतिषास्त्र, कृषिविज्ञान, गणितषास्त्र, नक्षत्रविज्ञान, जीवविज्ञान, धातुविज्ञान विज्ञान,आयुर्वेद,स्थापत्य... आगे पढ़े

आरोपों की सियासत और विश्वास का संकट

Updated on 27 April, 2015, 13:18
आरोपों की सियासत और विश्वास का संकट   राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप अपरिहार्य लोकतांत्रिक धतकरम है। विपक्ष हमेशा आरोपों के जरिए सत्ता को कठघरे में खड़ा करता आया है। सत्ता प्रतिष्ठान इस बात से सतर्क रहता आया है कि ऐसी कोई स्थिति न बने कि सामने वाले को अंगुली उठाने का अवसर न मिले। किसी जमाने... आगे पढ़े

झूठ के पांव पीछे

Updated on 27 April, 2015, 12:52
झूठ के पांव पीछे   अन्ना हजारे देश के ऐसे एनजीओ समूहों के मुखौटे है जो विदेशी चंदे से देश की विकास योजनाओं में बाधा डालने के लिए जाने जाते हैं। व्यक्तिगत तौर पर वे भले ही ईमानदार हों। संभव है कि मोदी जी के नेतृत्व में जिस तरह देश तेजी से चल पड़ा है... आगे पढ़े

ये पब्लिक पॉलिटिक्स है प्यारे

Updated on 27 April, 2015, 9:46
कोई कुछ कहे पर इन्द्रप्रस्थ के महासमर के परिणाम के बारे में एक बात साफ है कि यह पार्टी पॉलटिक्स पर पब्लिक पालटिक्स का झन्नाटेदार तमाचा है। आम आदमी पार्टी बहुसंख्यक जनता की आहत आकांक्षाओं की मुखर स्वर है, एक राजनीतिक संगठन से कहीं ज्यादा। इतिहास गवाह है कि आदमी... आगे पढ़े

पटेल, टैगोर के बाद अब निराला पर नजर

Updated on 27 April, 2015, 9:45
  लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर के बाद अब आरएसएस और बीजेपी ने महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' पर अपनी नजर डाली है। मध्य प्रदेश बीजेपी के मुखपत्र 'चरैवेति' में निराला को 'हिंदू राष्ट्रवादी चेतना के प्रखर कवि' के बतौर जगह दी गई है। 'चरैवेति' के संपादक जयराम... आगे पढ़े

पाकिस्तान में है वैश्विक आतंक की गर्भनाल

Updated on 27 April, 2015, 9:44
संयुक्त राष्ट्र की सहमति से अमेरिका ने इराक पर महज इसलिए हमला किया था क्योंकि उसे संदेह था कि सद्दाम हुसैन नरसंहार के लिए जैविक और रासायनिक हथियार जुटा चुके हैं। विनाश के ये हथियार मिले या नहीं मिले पर बगदाद धूल में मिल गया और सद्दाम हुसैन को चूहे की मौत मिली।... आगे पढ़े

इजराइली मॉडल के बरक्स

Updated on 27 April, 2015, 9:43
चीन और पाकिस्तान की जुगलबंदी के साथ भारत को जिस सामरिक तरीके से घेरने की व्यूह रचना की जा रही है, उसका जवाब अब जीरो टालरेन्स का इजराइल मॉडल ही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत जी ने संघ की सागर शिविर के बाद अपने सार्वजनिक संबोधन में भारत को इस तरह की रणनीति... आगे पढ़े

हर पल मनाएं जिन्दगी का जश्न

Updated on 27 April, 2015, 9:42
    peoples samachar me संपादकीय लेख समय की गति के हिसाब से हर नया विहान ही नया वर्ष है। हर क्षण अगले क्षण की पृष्ठभूमि बनता जाता है। सृष्टि के अस्तित्व में आने के बाद से समय की गति ऐसी ही है... ऐसी ही चलती रहेगी महाप्रलय तक। महाभारत का एक दृष्टान्त... आगे पढ़े