Thursday, 19 October 2017, 11:05 AM

साँच कहै ता मारन धावै

आर्थिक विषमताः तीन आने बनाम पंद्रह आने

Updated on 15 October, 2017, 11:00
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल मुट्ठीभर गोबरी का अन्न लेकर लोकसभा पहुंचे डा.राममनोहर लोहिया ने प्रधानमंत्री नेहरू से कहा-लो तुम भी खाओ इसे, तुम्हारे देश की जनता यही खा रही है। आज अखबार में जब विश्व के हंगर इन्डेक्स में 119 देशों में भारत के 100 वें स्थान में रहने की स्थिति... आगे पढ़े

विरोध की विश्वसनीयता भी सलीब पर

Updated on 15 October, 2017, 10:59
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल डाक्टर राममनोहर लोहिया के व्यक्तित्व के इतने आयाम हैं जिनका कोई पारावार नहीं। उनसे जुडा़ एक प्रसंग प्राख्यात समाजवादी विचारक जगदीश जोशी ने बताया था, जो विपक्ष के विरोध की मर्यादा और उसके स्तर के भी उच्च आदर्श को रेखांकित करता है। बात तिरसठ-चौंसठ की है। लोहिया... आगे पढ़े

सिस्टम के दो पाटों में पिसते वनवासी

Updated on 15 October, 2017, 10:59
जयराम शुक्ल पिछले महीने विकास संवाद के ओरछा काँन्क्लेव में जाते हुए पन्ना से गुजरना हुआ। रास्ते में सामने से आती हुई एक के बाद एक बसों को देखकर चौंका। चौकने की वजह थी, किसी में गुनौर से गुड़गांव तो किसी में पवई से रोहतक लिखा था। कई और बसों से... आगे पढ़े

इसलिए याद आ गए श्यामरुद्र पाठक

Updated on 15 October, 2017, 10:59
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल कितना अजीब है कि आदमी जब से मशीन बन गया तब से वह अपना धर्म भूल गया पर जिस मशीन को उसने बनाया वह अपना धर्म नहीं भूली। भोपाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में मातृभाषा पर मंथन चल रहा है। स्मृतियों में... आगे पढ़े

इस अरण्यसंस्कृति को नमन करिए

Updated on 10 October, 2017, 9:54
...जयराम शुक्ल अपन को जब भी मौका मिलता है जंगल निकल लेता हूँ। जंगल प्रकृति की पाठशाला है, हर बार कुछ न कुछ सीख मिलती है। जानवर,पेंड़ पौधे,नदी, झरने सभी शिक्षक हैं, बशर्तें उन्हें ध्यान से देखिए, सुनिए समझिए। ये सब उस विराट संस्कृति के हिस्से हैं जो सनातन से चलती... आगे पढ़े

जेपी और नानाजीः नदी-नाव संयोग

Updated on 10 October, 2017, 9:54
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल अक्टूबर का महीना बड़े महत्व का है। पावन,मनभावन और आराधन का। दशहरे से शुरू हुआ, देवप्रबोधिनी तक चलेगा। भगवान मुहूर्त देखकर ही विभूतियों को धरती पर भेजता है। 2 अक्टूबर को गांधीजी,शास्त्रीजी की जयंती थी। 11अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की जयंती है। चारों के... आगे पढ़े

चैनलों के चाल, चरित्र और चेहरे

Updated on 8 October, 2017, 11:17
जयराम शुक्ल सोशल मीडिया में जीएसटी के रोलबैक को लेकर मचे शोर की तस्दीक करने के लिए सोचा, कि चलो देखें टीवी चैनल्स में क्या चल रहा है। पिछले एक महीने से राम रहीम की वही एनीमेटेड रहस्यमयी गुफा देखते देखते उकता सा गया था सो कई दिनों से चैनल्स खोलने... आगे पढ़े

कलयुग केवल नाम "अधारा" वाकई

Updated on 8 October, 2017, 11:16
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल आज से कोई दस बारह साल पहले जब यूपीए सरकार ने यूनिक आईडी की अवधारणा दी थी  तब स्तंभकार व मैनेजमेंट गुरू रघुरामन ने इसकी बड़ी ही दिलचस्प सरल व सहज व्याख्या की थी। यही यूनिक आईडी को आधार कहा जाता है। यह आधार नंबर अब जीवन... आगे पढ़े

विषमता का बोझा और कबतक ढोएगी रेल

Updated on 8 October, 2017, 11:16
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल राज्यपाल या मुख्यमंत्री रेल से चलें आज कोई इसकी कल्पना नहीं कर सकता। इस दर्जे के महापुरुषों की यात्राएं भी खबर बनती हैं। पंद्रह साल पहले एक ऐसी ही घटना खबर बनी। हुआ यह कि अपने प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच पटरी नहीं बैठती थी।... आगे पढ़े

दुखिया एक किसान है रोवै औ खोवै

Updated on 8 October, 2017, 11:15
साँच कहै ता../ जयराम शुक्ल लगता है भगवान ने किसान और बैल की किस्मत एक साथ गढी है। दोनों परस्पर पूरक हैं इसलिए जब बैल का नाम लो तो किसान की आकृति उभरती है। दोनों के भाग्य में डंडा है। चौराहे पर बैल मिल जाए तो उस पर डंडे की बारिश,राजपथ... आगे पढ़े

जिन्हें रावण से हमदर्दी है उनके लिए

Updated on 8 October, 2017, 11:15
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल "त्रिलोक विजेता प्रकांड पंडित प्रचंड पराक्रमी परम शिवभक्त महान साहित्यकार लंकेश दशानन को षडयंत्र पूर्वक उसके भाई को मिला कर उसकी हत्या कर इस कपटी दुनिया से मुक्त कराने के दिन की बधाई।" इस दशहरे में एक शुभचिंतक ने जस का तस मुझे यही संदेश भेजा। यह उन्होंने... आगे पढ़े

जरख़ेज जमीन की बीमार फसलें

Updated on 8 October, 2017, 11:14
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल भोपाल से लौटते समय रेल में एक मित्र से भेंट हो गई। वे आरटीओ महकमे से थे। साथ में लाल रंग के लेदर के एक जैसे ही पाँच सूटकेस लिए । उनके साथ एक मिस्त्रीनुमा आदमी भी था,जो सूटकेस सँभाले था। मैंने मित्र से पूछा- बड़ी खरीदारी... आगे पढ़े

पर्वसंस्कृति का द्वंद्वात्मक बाजारवाद

Updated on 8 October, 2017, 11:14
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल बाजार के ढंग निराले होते हैं। वह हमारी जिंदगी को भी अपने हिसाब से हांकता है। कभी पंडिज्जी लोग तय करते थे कि किस त्योहार को कैसे मनाया जाय अब बाजार तय करता है। शरद ऋतु के स्वागत में श्री कृष्ण गोपियों के साथ रास रचाते थे।... आगे पढ़े

बीएचयू में सियासत की "लंकेटिंग"

Updated on 27 September, 2017, 9:46
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल छात्रों के साधारण से आंदोलन में राजनीति का मिर्च-मसाला कैसे मिल जाता है और उस पर मीडिया का छौंक बघार कौन सा रूप दे देता है बीएचयू प्रकरण इसका ताजा उदाहरण है। बात को बतंगड और मूल मुद्दों को लंगड़ ऐसे ही किया जाता है। छात्राओं का... आगे पढ़े

माँ पहाड़ावाली की भी तो कुछ सुनिए

Updated on 26 September, 2017, 18:23
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल चौतरफा भक्ति भाव का वातावरण है। इन नौ दिनों सभी झंझटों को ताक पर रखकर भक्तगण प्रमुदित, आनंदित रहते हैं। त्योहारों के रूप में आनंद का बंदोबस्त हमारे पुरखे कर गए । हर त्योहार मनुष्य की जिजीविषा बढा देता है। ये न होते तो सचमुच जिंदगी कितनी... आगे पढ़े

एक यायावर महाव्रती का स्मरण करते हुए

Updated on 26 September, 2017, 18:23
साँच कहै ता...जयराम शुक्ल अभी कुछ दिन पहले बात उठी कि मुगलसराय जंक्शन पं.दीनदयाल उपाध्याय के नाम कर दिया जाए। यह सुनते ही कई योद्घा विचलित हो गए। कहा इतिहास को भगवा रंग ओढाया जा रहा है हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। यह मुगलों का सराय था और मुगलों का... आगे पढ़े

फिर भी बोलो दुर्गा मैय्या की जय

Updated on 26 September, 2017, 18:23
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल "लछमी देवी दर दर भटकें बेबस निर्धन चारटके को दुर्गा पर गुंडे लहटे हैंं निर्बल अबला जान समझ के। सरस्वती को दिया मजूरी डाट दपटकर बेलदार ने, लिया अँगूठा मस्टर बुक पर काटपीट कर ठेकेदार ने। मातृशक्ति का पर्व मनाते जाएं  हम हर वर्ष रातजागरण,भजनकीर्तन क्या बढि़या उत्कर्ष।।" कई साल पहले महिला सशक्तीकरण... आगे पढ़े

प्रमुदित बौद्धिकों का ढेंचू..ढेंचू

Updated on 26 September, 2017, 18:22
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल मृणाल पांडे का एक ट्वीट चर्चाओं में है। गधे की फोटो के साथ जुमला जयंती और वैशाखनंदन वाला। चूंकि ये पुण्य विचार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर व्यक्त किए गए इसलिए इसकी और व्याख्या की जरुरत नहीं है कि यह किसके लिए और क्यों था। इस... आगे पढ़े

आभासी दुनिया से निकलो..प्यारो

Updated on 26 September, 2017, 18:22
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल छात्र जीवन में हम लोग राजनीति के बारे में खूब चर्चा करते थे। यह राजनीति कालेज और विश्वविद्यालय के परिसर के बाहर की भी होती थी। मँहगाई, बेरोजगारी समेत देश के वे तमाम मुद्दे जो उस समय उबाल पर होते थे। हमें नारे बहुत आकर्षित करते थे।... आगे पढ़े

अर्जन सिंह एन्ड पुअर बजरंगी प्रसाद

Updated on 18 September, 2017, 8:33
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल एयर मार्शल अर्जन सिंह के निधन की खबर के साथ एक पुरानी खबर आँखों के सामने तैर गई जो कई वर्षों से छाती में बोझ बनकर दफन थी। वह थी, टाइम्स आफ इंडिया..की  एक क्लिपिंग जिसे भारतीय तैराकी के पितामह और प्रथम अर्जुन पुरस्कार विजेता कैप्टन बजरंगी... आगे पढ़े

आदमी को पहाड़ खाते देखा है..।

Updated on 18 September, 2017, 8:32
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल भोपाल से इंदौर जाते हुए जब देवास बायपास से गुजरता हूँ तो कलेजा हाथ में आ जाता है। बायपास शुरू होते ही बाँए हाथ में हनुमानजी की विराट प्रतिमा है, उसके पीछे खड़े पहाड़ का जो दृश्य है,बेहद दर्दनाक है। उसे देखकर कई भाव उभरते हैं। कि... आगे पढ़े

जो ना समझे वो अनाडी़ है

Updated on 18 September, 2017, 8:32
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल एक मित्र सायकिल की दुकान पर मिल गए। बाहर उनकी चमचमाती कार खड़ी थी। मैंने पूछा-यहां कैसे? वो बोले- डाक्टर ने कहा सायकिल से चला करिए सो सायकिल से बचपन शुरू हुआ और अब बुढापा भी। दूकान वाले ने दार्शनिक अंदाज में कहा- क्या करियेगा ये जिंदगी... आगे पढ़े

श्रम,शौर्य और हुंकार है हिन्दी

Updated on 15 September, 2017, 19:26
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल अपना हिन्दी दिवस सैनिक स्कूल के बच्चों के बीच मना। रीवा का सैनिक स्कूल देश के सबसे पुराने और गौरवशाली स्कूलों में से है। भारत चीन युद्ध के बाद ऐसी जरूरत महसूस हुई कि पाँचवी से ही सैन्यशिक्षा दी जाए।  उन दिनों जब सब राजे रजवाड़े अपनी... आगे पढ़े

हिन्दी के दाँत,खाने के कुछ दिखाने के कुछ

Updated on 14 September, 2017, 21:49
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल दिलचस्प संयोग है कि हिन्दी दिवस हर साल पितरपक्ष में आता है। हम लगेहाथ हिन्दी के पुरखों को याद करके उनकी भी श्राद्ध और तर्पण कर लेते हैं। पिछले साल भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन रचा गया था। सरकारी स्तर पर कई दिशा निर्देश निकले,संकल्प व्यक्त किए... आगे पढ़े

अब चड्ढी पहन के फूल नहीं खिलते

Updated on 14 September, 2017, 21:49
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल ........जंगल जंगल बात चली है पता चला है, अरे चड्ढी पहनके फूल खिला है,फूल खिला है।                               ..    महाकवि गुलजार हम लोग के जमाने का बचपन क्या मस्त था। न पीठ पर बस्ते का बोझा, न सबक का टेंशन, न ट्यूशन की भागमभाग। माँ-बाप सबकुछ भगवान और स्कूल के मास्साब... आगे पढ़े

..रंगाखुश और राम रहीम

Updated on 12 September, 2017, 10:52
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल सन् 75 मे शोले के तूफानी दौर में एक फिल्म आई थी ..रंगाखुश..। इसे महानगरीय सिनेमा ने नोटिस नहीं लिया, लेकिन यह हमारे लिए खास थी। वजह लगभग समूची फिल्म अपने रीवा के गांवों कस्बों और खूबसूरत बरदहा और छहिया घाटी समेत सफेद बाघों के पर्यावासी जंगलों... आगे पढ़े

कौव्वे इसलिए हमारे पुरखे

Updated on 11 September, 2017, 10:55
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल पितरपख लगा है कौव्वे कहीं हेरे नहीं मिल रहे। इन पंद्रह दिनों में हमारे पितर कौव्वे बनके आते थे। अपने हिस्से का भोग लगाते थे।  कौव्वे पितर बनके तर गए या फिर पितर ही कौव्वा बनकर आने से मना कर दिया। मैंने मित्र से पूछा--आखिर क्या वजह... आगे पढ़े

अंधी रेहड़ के काने गड़रिये

Updated on 11 September, 2017, 10:53
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल घर से निकलते ही काना दिख जाए तो उसे बड़ा अशुभ मानते थेे।लोग रास्ता बदल देते थे या यात्रा रद्द कर देते थे। उन दिनों गाँवों में ऐसे टोटकों का रिवाज था।(टीवी चैनल तो इसे और पुख्ता करने में जुटे हैं) पढे़ लिखे लोग भी झांसे में... आगे पढ़े

शब्द संभारे बोलिए

Updated on 9 September, 2017, 8:41
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल फर्ज करिए कि एक ऐसी प्रयोगशाला बना ली जाए जो हवा में तैरते हुए शब्दों को पकड़कर एक कंटेनर में बंद कर दे, फिर भौतिकशास्त्रीय विधि से  उसका घनत्वीकरण कर ठोस पदार्थ में बदल दिया जाए तो उसका स्वरूप और उसकी ताकत क्या होगी? सृष्टि का ये... आगे पढ़े

लंकेश अवधेश के झगड़े में कबीर

Updated on 9 September, 2017, 8:41
साँच कहै ता.../जयराम शुक्ल सोशल मीडिया आँसुओं से तर है। शहर की सड़कों पर पिघले हुए मोम की परत है। कहा जा रहा है अभिव्यक्ति की आजादी रक्तरंजित है। बच सको तो बचो नहीं तुम भी मारे जाओगे। कुछ कह रहे हैं भागो भागो भेडिया आया। कुछ कह रहे जागो जागो... आगे पढ़े