Monday, 10 December 2018, 5:41 PM

साँच कहै ता मारन धावै

जा पर विपदा परत है ते आवहिं एहि देस

Updated on 28 September, 2018, 13:11
साँच कहै ता/-जयराम शुक्ल चित्रकूट की महिमा को लेकर एक दोहा मशहूर है- चित्रकूट मा बसि रहें रहिमन अवध नरेश, जा पर विपदा परत है ते आवत एंहि देश।। कांग्रेस विपदा में है। मध्यप्रदेश में तीन पंचवर्षी से बाहर। देश के अन्य प्रांतों से भी वह मुट्ठी के रेत जैसी सरकती जा रही है।... आगे पढ़े

इस धुएँ को कल की आग समझिए..!

Updated on 21 September, 2018, 8:41
साँच कहै ता- जयराम शुक्ल पहले तीन सच्चे किस्से फिर आगे की बात एक- यह सचमुच हैरत में ड़ालने वाली बात थी। सत्ताधारी दल के राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त एक महाशय ने जो ग्लानिपूर्वक सुनाया उसे आप पढ़े- मेरा ड्राइवर अनुसूचित जातिवर्ग से था। कोई पाँच साल से घर की कार चलाने के साथ... आगे पढ़े

जैसे उड़ि जहाज के पंछी..

Updated on 15 September, 2018, 8:29
साँच कहै ता../जयराम शुक्ल   एक मित्र सायकिल की दुकान पर मिल गए। बाहर उनकी चमचमाती कार खड़ी थी। मैंने पूछा-यहां कैसे? वो बोले- डाक्टर ने कहा सायकिल से चला करिए सो सायकिल से बचपन शुरू हुआ और अब बुढापा भी। दूकान वाले ने दार्शनिक अंदाज में कहा- क्या करियेगा ये जिंदगी... आगे पढ़े

भला ऐसा समाजवाद और कहाँ..

Updated on 13 September, 2018, 20:01
-जयराम शुक्ल   जैसा कि पिछले साल "अगले बरस तू लौकर आ" का वायदा किया था, गणपत बप्पा घर-घर पधार गए। क्या महाराष्ट्र, क्या गुजरात, समूचा देश आज से गणपति मय है।    बडे़ गणेशजी, छोटे गणेशजी, मझले गणेशजी।  गणेशजी जैसा सरल और कठिन देवता और कौन? लालबाग के राजा के गल्ले में एक... आगे पढ़े

जब अर्जुन सिंह "रणछोड" बने

Updated on 12 September, 2018, 10:45
चर्चे चुनाव के -जयराम शुक्ल   मध्यप्रदेश की राजनीति में चुरहट सबसे चर्चित नाम है। चुरहट के गढ़ भेदने की व्यूहरचना भाजपा के एजेंडे में हमेशा सर्वोपरि रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के बीच शुरू हुई तल्खियों ने चुरहट को इस बार फिर चुनावी राजनीति के हाटसीट... आगे पढ़े

राष्ट्रद्रोह को असहमति के साथ मत फेंटिए जनाब!

Updated on 4 September, 2018, 8:19
साँच कहै ता- जयराम शुक्ल   डाक्टर राममनोहर लोहिया ने कहा था- जब हम किसी का जिंदाबाद बोलते हैं तो उसका मुर्दाबाद करने का अधिकार स्वमेव मिल जाता है। डाक्टर लोहिया नेहरू युग में असहमति के प्रखर स्वर रहे हैं। स्वस्थ लोकतंत्र में असहमति का दर्जा सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वह... आगे पढ़े

नोटबंदी से ज्यादा जरूरी है पोर्नबंदी

Updated on 6 July, 2018, 10:04
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   अब यह बताने की जरूरत नहीं कि बलात्कार फिर हत्या जैसे अपराधों का सैलाब यकायक क्यों फूट पड़ा। जवाब है वर्जनाएं टूट गईं सबकुछ खुल्लमखुल्ला हो गया। पहले कैसेट्स में ब्लू फिल्में आईं,फिर ये कम्प्यूटर में घुसीं और अब इनकी जगह जेब के मोबाइल फोन में बन... आगे पढ़े

सत्ता में बौद्धिकों की अहमियत पर सवाल

Updated on 4 July, 2018, 9:10
जयराम शुक्ल   अभी हाल ही में एक राष्ट्रीय सेमीेनार में भाग लेने का मौका मिला। विषय था..कुशल प्रशासनिक रणनीति बनाने में अकादमिक योगदान की जरूरत। इत्तेफाकन् मुझे ही मुख्य वक्ता की भूमिका निभानी पड़ी वजह जिन कुलपति महोदय को उद्घाटन के लिए आना था ऐन वक्त पर नहीं आए। वैसे कुलपतियों... आगे पढ़े

चाटुकारों के झाँसे ने देश को तानाशाही से उबार लिया

Updated on 4 July, 2018, 9:09
-जयराम शुक्ल   चाटुकारिता भी कभी-कभी इतिहास में सम्मान योग्य बन जाती है। आपातकाल  के उत्तरार्ध में यही हुआ। पूरे देश भर से चाटुकार काँग्रेसियों और गुलाम सरकारी मशीनरी ने इंदिरा गांधी को जब यह फीडबैक दिया कि आपकी लोकप्रियता चरम पर है, जनता आपको अपना भाग्यविधाता मानने लगी है तब इंदिरा... आगे पढ़े

इसलिए बढ़ रहा है धरतीमाता का बुखार

Updated on 5 June, 2018, 9:20
 .जयराम शुक्ल   इस साल धरतीमाता पिछले साल से ज्यादा तपीं। हरीतिमा से ढँके भोपाल का पारा 45 सेल्सियस तक झूल रहा है। आज से बीस-पच्चीस साल पहले अमरकंटक और पचमढ़ी में एसी की मशीनें नहीं थीं। इन देसी हिल स्टेशनों में अब बिना एसी गुजारा नहीं। आज वहां जाएं तो झुलस... आगे पढ़े

विंध्यप्रदेश की हत्या कथा..फिर

Updated on 30 May, 2018, 21:38
साँच कहै ता.. -जयराम शुक्ल विंध्यप्रदेश की हत्या कथा में पं.नेहरू जी की भूमिका ..को लेकर इससे पहले मेरे पोस्ट पर ..बहुत प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कोई संदर्भ स्त्रोत जानना चाहता है तो कुछ मित्र लाँछन, तंज और गाली की भाषा तक उतर चुके हैं..। खैर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भोगने... आगे पढ़े

बदला तो काफी कुछ है यदि देखना चाहें तो

Updated on 27 May, 2018, 20:39
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल घुमाफिरा कर आँकड़ों में उलझने और उलझाने से पहले ये छोटे-छोटे चार सच्चे किस्से, फिर आगे की बात..। मेरे पड़ोस में एक इंजीनियर साहब हैं। हाल ही में उन्हें एक निर्माण परियोजना की नई साइट मिली है उसका बजट अरबों में है। मैंने यूँहीं बधाई देदी भई-अब तो... आगे पढ़े

फिलहाल काँग्रेस की गति और नियति

Updated on 16 May, 2018, 10:20
साँच कहै ता...जयराम शुक्ल   कर्नाटक के असमंजस भरे चुनाव परिणाम के बीच सरकार कौन बनाएगा? इससे ज्यादा यदि चर्चा किसी बात पर हो रही है तो वह कांग्रेस की अधोगति और राहुल गांधी की नियति को लेकर। प्रतिक्रियाएं निकलकर आ रहीं हैं कि क डूबते जहाज को बचाना इनके बस की... आगे पढ़े

वनवासियों की मुश्किलें हमारे अंत की शुरूआत

Updated on 16 May, 2018, 10:19
सॉंच कहै ता- जयराम शुक्ल   कभी-कभी दूसरे के हिस्से का श्रेय और सुख अनायास ही मिल जाता है। अवधेशप्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के अनुसूचित जाति अध्ययन केंद्र के राष्ट्रीय सेमीनार में मुख्य वक्ता के रूप में यशस्वी व विद्वान, प्रशासक शरदचंद्र बेहार साहब को बोलना था। इस गर्मी और लगन की... आगे पढ़े

बिरादर..! तुम्हारी जाति क्या है?

Updated on 24 April, 2018, 13:16
जयराम शुक्ल   जबलपुर के सांसद राकेश सिंह मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष मनोनीत किए गए।  उनके नाम की चर्चा चल ही रही थी, उसी बीच मैंने चार लाइन की एक छोटी सी पोस्ट डाल दी कि जबलपुर साइंस कालेज में वे मेरे सहपाठी रहे हैं, छात्र राजनीति में वे... आगे पढ़े

इस घटाघोप को छाँटिए वरना इतिहास माफ नहीं करेगा..!

Updated on 10 April, 2018, 8:09
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   सड़कों पर पंद्रह लाशों(अवर्णों-सवर्णों की) के बिछनें, सैकड़ों के घायल होने, अरबों की संपत्ति फुँकने के बाद उन कलेजों को जरूर कुछ ठंडक मिली होगी जो सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या को अपनी डूबती राजनीति के लिए संजीवनी मंत्र मानकर चल रहे हैं।    ये तो उन्हें पता चल गया... आगे पढ़े

इनके ही लहू से सियासत सुर्ख दिखती है

Updated on 10 April, 2018, 8:09
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   "सड़कों पर बिछी लाशें, बहते खून,जलती बसें और दुकानों की आँच से इस मौसमी तपिश में भी उन कलफदारों के कलेजे में ठंडक पहुँच रही होगी जो इस बात पर यकीन करते हैं कि सड़कों पर बहने वाले लहू से ही सियासत और सुर्ख होती है"   भारत बंद... आगे पढ़े

राजनीति के गैंग्स आॅॅफ वासेपुर

Updated on 30 March, 2018, 8:46
 साँच कहै ता..जयराम शुक्ल ............................................   पार्टी का मतलब लोकतांत्रिक इकाई स्तर के कार्यकर्ताओं द्वारा चुना हुआ संगठन जो सदस्यों की सामूहिक राय के आधार पर चलता है।    गिरोह में आंतरिक लोकतंत्र की कोई जगह नहीं होती।    माफिया सत्तातंत्र के समानांतर अपराधियों का समूह होता है जो व्यवस्था को अपनी जेब में रखता है।    अब इस... आगे पढ़े

अब इनके बारे में क्या खयाल है आपका

Updated on 30 March, 2018, 8:45
.जयराम शुक्ल   कम से कम अब ये धारणा तोड़ देनी चाहिए कि हर आतंकी मुसलमान ही क्यों होता है? आतंकवाद अब जाति-धर्मों से ऊपर यह एक नई जमात है जिसमें चुपके से कोई भी शामिल हो सकता है, पड़ोस का वह गुमसुम सा रहने वाला लड़का या अपने घर, पार्टी, दफ्तर... आगे पढ़े

इन सबकों से न सँम्हले तो समझो गए

Updated on 25 March, 2018, 22:00
साँच कहै ता...जयराम शुक्ल   हमारे लोकजीवन में शगुन-अपशगुन का बड़ा महत्व है। घर में वधु प्रवेश, पुत्र-पुत्री रत्नों की प्राप्ति से लेकर मेहमानों के आने के बाद की शुभ-अशुभ घटनाओं को इसी नजरिए से देखा जाता है। राजनीति में तो शगुन- अपशगुन को बड़ी ही गंभीरता से लिया जाता है। कैबिनेट... आगे पढ़े

इन टिकटों से इसलिए नहीं चौंकिए!

Updated on 19 March, 2018, 8:18
साँच कहै ता...जयराम शुक्ल   ये तो लगभग नरसिंहराव जैसी ही घटना हुई, हैदराबाद लौटने के लिए डेरा-डकूला बाँधे बैठे थे कि बन गए प्रधानमंत्री। अपने राजमणि पटेलजी के साथ भी कुछ  ऐसा ही घटा। दोबार कबीना मंत्री रहने वाले पटेल को काँग्रेस की टिकट  बंदकर रिटायरमेंट दे दिया था, हमेशा राष्ट्रीय... आगे पढ़े

त्रिपुरा के जिस 'बिप्लब' को मैंने जाना

Updated on 19 March, 2018, 8:17
साँच कहै ता...जयराम शुक्ल   बिप्लब देब त्रिपुरा के मुख्यमंत्री चुन लिए गए। एक और विप्लव शुरू हो गया जो त्रिपुरा, पंश्चिमबंगाल, आँध्र, तामिलनाडु होते हुए चौतरफा चल रहा है, जमीन में, हवा में, संसद में, टीवी-सोशल मीडिया में। यह विप्लव वैचारिक नहीं हुड़दंगियों का ज्यादा लगता है।    बहरहाल इस विप्लव के बारे... आगे पढ़े

संभावनाओं के क्षितिज में अवनि की उड़ान

Updated on 25 February, 2018, 11:32
..जयराम शुक्ल    शब्दचित्र कभी-कभी ही अर्थवान होते हैं लेकिन अवनि चतुर्वेदी के लिए यह बिलकुल सटीक बैठता है। अवनि यानी धरती ने व्योम की अनंत ऊँचाइयाँ नापने की ठानी है। इस अवनि की पृष्ठभूमि महानगर नहीं अपितु धूलधूसरित और सदियों से व्यवस्था से उपेक्षित वो इलाका है जहाँ भारतमाता अभी भी... आगे पढ़े

शाब्दिक बेहयाई और संसद की लक्षमणरेखा

Updated on 11 February, 2018, 11:15
साँच कहै ता.जयराम शुक्ल ये अजीब इत्तेफाक है, जिस दिन कैलीफोर्निया की 78 वर्षीय डेमोक्रेट नैंसी पेलोसी अमेरिकी सदन में अपने आठ घंटे के लंबे प्रभावी भाषण के जरिए संसदीय इतिहास रच रहीं थी उसी दिन भारत के सदन में सांसद रेणुका चौधरी अपने अट्टहासों के जरिए संसदीय गरिमा पर चार... आगे पढ़े

अपने-अपने हिस्से का समाजवाद

Updated on 8 February, 2018, 10:15
...जयराम शुक्ल गाँधी और समाजवाद ये दो ऐसे मसले हैं कि हर राजनीतिक दल अपने ब्राँडिंग के रैपर में चिपकाए रखना चाहता है। पर वास्तविकता वैसी ही है जैसे कि गाँधी की तस्वीर वाले नोट की ताकत से सभी किस्म के धतकरम होते हैं और वैसे ही समाजवाद के नाम की ओट... आगे पढ़े

मेरे मरने के बाद लोग सुनेंगे पर ये 'अष्टधातुई' काँग्रेसी नहीं

Updated on 8 February, 2018, 10:14
..जयराम शुक्ल   विंध्य के सफेद शेर कहे जाने वाले श्रीनिवास तिवारी की अंतिम यात्रा में जो शामिल हुआ या देखा उसकी जुबान में बाल ठाकरे की मौत पर उमड़ी भीड़ का वृतांत था। उत्तर भारत में तिवारीजी कमलापति त्रिपाठी के बाद दूसरे ऐसे बड़े नेता थे जिनके लिए पार्टीलाइन तोड़कर ऐसा... आगे पढ़े

दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें

Updated on 13 January, 2018, 11:28
जयराम शुक्ल   स्वामी विवेकानंद युवाओं के आदर्श हैं। उनकी जयंती पर युवा दिवस मनाया जाता है। उनके बारे में इतना कुछ लिखा पढ़ा जा चुका है कि एक औसत युवा भी कुछ न कुछ तो जानता ही है। स्वामीजी ने भारतीय ग्यान परंपरा, अध्यात्म और सनातनी संस्कृति की कीर्तिपताका को विश्व... आगे पढ़े

फिर एक मोड़ पर प्रेस की आजादी

Updated on 11 January, 2018, 10:27
साँच कहै ता..जयराम शुक्ल   भारत में प्रेस की आजादी के सवाल को लेकर दो घटनाएं चर्चाओं में हैं। एक गंभीर चिंता में डालने वाली,दूसरी उम्मीदों की लौ को बचाए रखने वाली। इन दोनों को लेकर शुरू हुआ विमर्श भारत में आजाद प्रेस के भविष्य को लेकर निश्चित ही कोई न कोई... आगे पढ़े

इस पाखंडी दौर में कबीर के गुरू का स्मरण

Updated on 9 January, 2018, 12:35
जयराम शुक्ल   देश में धरम की बयार चल रही है। धर्म यात्राएं निकल रही हैं। पटवरी-कानूनगो-तहसीलदारों के हाथों आगे बढ़ते हुए धर्मध्वजा कलेक्टर लोग आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें कोई हर्ज भी नहीं। चलो इसी बहाने ब्यूरोक्रेसी पतित से पावन हो रही है।  हो सकता है ये पावन चित्त ही देश... आगे पढ़े

जिस बात का खतरा है समझो कि वो कल होगी

Updated on 9 January, 2018, 12:34
..जयराम शुक्ल   नए साल की शुरुआत उम्मीद के हिसाब से नहीं हुई। महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगाँव की घटना से उपजी हिंसक घृणा ने सूरज की किरणों को ज्वलनशील बनाकर लपटों में बदल दिया। आधे भारत में बर्फवारी और शीतलहर के बीच उसकी आँच यहाँ तक महसूस हो रही है। स्लेट पर  लिखी इबारत... आगे पढ़े

साँच कहै ता मारन धावै