healthprosegs phenterminehttps://buypropeciaonlinecheap.com/ उपदेश

Thursday, 21 September 2017, 5:53 PM

उपदेश

एक चमत्कारी घटना से जब दादू बन गए संत

Updated on 1 March, 2015, 13:00
दादू दयाल प्रसिद्ध संत हुए हैं। उनकी वाणी ने अनगिनत लोगों को प्रेरणा दी है। संत होने से पहले उनकी एक दुकान हुआ करती थी। उसी से उनकी गुजर-बसर होती थी। एक बार ऐसी घटनी हुई कि उनका जीवन ही बदल गया। एक दिन वह जब अपनी दुकान पर बैठे हिसाब... आगे पढ़े

कृपा को महसूस करें: मोरारी बापू का चिंतन..

Updated on 27 February, 2015, 13:21
कृपा भक्ति का सर्वश्रेष्ठ वरदान है। हम यह महसूस करें कि परित: कृपा बरस रही है। मोरारी बापू का चिंतन.. तुलसी दास और जगद्गुरु आदि शंकराचार्य दोनों ने सत्संग को आवश्यक माना है। शंकराचार्य कहते हैं, एक तो मनुष्य होना अपने आप में दुर्लभ घटना है, फिर उसमें मुमुक्षु भाव जागे... आगे पढ़े

बड़े काम की हैं ये चार बातें

Updated on 26 February, 2015, 13:15
एक साधु थे। उनसे शिक्षा लेने के लिए बहुत से स्त्री पुरुष आते थे। साधु उन्हें बड़ी ही उपयोगी बातें बताया करते थे। एक दिन उन्होंने कहा, 'तुम लोग चार बातें याद रखो तो जीवन का आनंद ले सकते हो।' लोगों ने पूछा, 'स्वामी जी, वे चार बातें क्या हैं ?' स्वामीजी... आगे पढ़े

इंसानियत का नाता

Updated on 25 February, 2015, 13:50
ईश्वर की नजर में सब इंसान बराबर हैं। ऐसे में किसी को नीचा या या ऊंचा समझना ठीक नहीं। एक-दूसरे को आदर-सम्मान और यथासंभव सहयोग देने से ही समाज व देश मजबूत होकर आगे बढ़ता है। विश्व सामाजिक न्याय दिवस (20 फरवरी) को था। मिसेज शर्मा फुर्सत मिलते ही बुटीक के... आगे पढ़े

लक्ष्य को पाना हो सकता है आसान

Updated on 24 February, 2015, 13:22
जाग रे सब रैन बिहाणी, जाए जनम अंजलि का पाणी। घडि़-घडि़ घडि़याल बजावे, जे दिन जादू सो बहुरि न आवै॥ - दादू अर्थ : जागो, रात बीत चुकी है। हमारा जीवन इस तरह रीत रहा है, जैसे अंजुरी में भरा हुआ पानी रिसने लगता है। ऐसे में घंटे-घडि़याल बजाकर समय व्यर्थ करने से... आगे पढ़े

इस तरह, मृत्यु के समय भी आप ईश्वर का नाम स्मरण कर मोक्ष पा सकते

Updated on 23 February, 2015, 13:14
अपने आखिरी क्षणों में मृत्यु के समय जब प्राण शरीर को त्यागने वाले हों तब भी आप नारायण नाम ही स्मरण करेंगे क्योंकि यह स्वाभाविक रूप से आपको आएगा और यह कई प्रकार से उत्थान करेगा। प्रश्न- गुरुदेव, कहा जाता है कि जीवन के अंतिम क्षणों में नारायण का नाम जपने... आगे पढ़े

मीठा सच

Updated on 21 February, 2015, 13:31
इंग्लैंड के राजा चाल्र्स द्वितीय को बड़ी कुशलता से अपनी राय दी साहित्यकार जॉर्ज बर्नार्ड शॉ न् प्रसिद्ध साहित्यकार जॉर्ज बर्नार्ड शॉ के जीवन के बारे में यह कहानी कही जाती है, जो हमें बताती है कि सत्य तब कड़वा नहीं लगता है, जब उसे बोलने का हुनर मालूम हो। इंग्लैंड... आगे पढ़े

बारिश देने वाले देवता के रूप में पूजे जाते है, पांडवों के ये आराध्यदेव

Updated on 20 February, 2015, 13:02
मंडी जनपद के देवी-देवताओं में बड़ादेव कमरूनाग का विशेष स्थान है। शिवरात्रि महोत्सव में शिरकत करने वाले बड़ादेव कमरूनाग जनपद के देवी-देवताओं में महामहिम हैं। देव परंपरा के अुनसार बड़ादेव कमरूनाग को मंडी जनपद में वरिष्ठ देवता के रूप में पूजा जाता है। बड़ादेव को वर्षाप्रदाय यानी बारिश देने वाले देवता... आगे पढ़े

घर में अवश्य लगाएं तुलसी के पौधे क्योंकि..

Updated on 19 February, 2015, 13:39
तुलसी एक ऐसा पौधा है। जिसके लाभ अनेकानेक हैं और इसे विज्ञान भी मान चुका है। तुलसी के कई प्रकार हैं जैसे रक्त तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी, मुख्यरूप से विद्यमान है। तुलसी की इन सभी प्रजातियों के गुण अलग है। इन्हीं में से कुछ ऐसे... आगे पढ़े

स्वयं से करें प्रेम

Updated on 18 February, 2015, 13:33
स्वामी विवेकानंद 'राजयोग में लिखते हैं, 'प्रत्येक इंसान ईश्वर का अंश है। यदि कोई इंसान ईश्वर के प्रति अपनी भक्ति दिखाना चाहता है, तो सबसे पहले स्वयं की अवहेलना करना छोड़े और स्वयं से प्यार करना सीखे। प्रेम से ही चेतना जाग्रत होती है। जब मैंने योग और ध्यान के माध्यम... आगे पढ़े

मनुष्य के शरीर में पंचतत्वों का संतुलन परमावश्यक है

Updated on 16 February, 2015, 13:11
मनुष्य के शरीर में पंचतत्वों का संतुलन परमावश्यक है। मनुष्य जीवन में भौतिक भाव सदैव रहता है, लेकिन हमें इस भाव का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। मनुष्य को अगर वन में छोड़ दें, तब भी प्रकृति उसे भौतिकता का बोध करा ही देती है। प्रकृति में तरह-तरह के पेड़-पौधे और... आगे पढ़े

नृत्य ही पूजा है

Updated on 14 February, 2015, 8:11
मेरे लिए नृत्य ही पूजा है. नृत्य ही ध्यान है. नृत्य से ज्यादा सुगम कोई उपाय नहीं, सहज कोई समाधि नहीं. जितनी आसानी से तुम अहंकार को नृत्य में विगलित कर पाते हो उतना किसी और चीज में कभी नहीं कर पाते. नाच सको अगर दिल भरकर तो मिट जाओगे. नाच... आगे पढ़े

सुख की भीतरी नदी, हमारे दुख के क्या कारण है

Updated on 13 February, 2015, 11:43
महात्मा बुद्ध ने कहा था कि जीवन दुखाय है, किंतु उन्होंने दुख के कारणों और उसे दूर करने के उपायों पर भी प्रकाश डाला है। बुद्ध दुख की नाव पर बैठाकर सुख की भीतरी नदी में ले जाते हैं। धम्मपद का पहले ही पद का अर्थ है- 'मन सभी प्रवृत्तियों का... आगे पढ़े

सत्संग सफलता का प्रवेश द्वार

Updated on 12 February, 2015, 10:51
सत्संग का अर्थ लोग प्रवचन सुनना समझते हैं, लेकिन इसका अर्थ है अच्छे लोगों से मिलना, अच्छी पुस्तकेें पढ़ना, अच्छी बातें सोचना आदि। किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने का यह प्रवेश द्वार है। सत्संगत्वे निस्संगत्वं निस्संगत्वे निर्मोहत्वम। निर्मोहत्वे निश्चलतत्वं निश्चलतत्वे जीवन्मुक्ति:।। अर्थ : सत्संग से निस्संगता पैदा होती है और निस्संगता से अमोह!... आगे पढ़े

अनमोल वचन

Updated on 11 February, 2015, 10:13
सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्। सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृता:॥18-48॥ अर्थ : हे कौन्तेय (अर्जुन), अपने आरंभ के सहज-स्वाभाविक कर्म को दोष होने पर भी नहीं त्यागना चाहिए, क्योंकि आरंभ में कर्मों में कोई न कोई दोष होता ही है, जैसे आरंभ में अग्नि धुएं से घिरी होती है...। भावार्थ : जब भी... आगे पढ़े

नर हो ना निराश करो मन को...

Updated on 10 February, 2015, 13:52
जीवन के किसी मोड़ पर असफलता मिलने पर हमें निराश होने की बजाय अदम्य उत्साह और ऊर्जा के साथ लक्ष्य-पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। हार से ही जीतने का रास्ता मिलता है। हारने के बाद हम गलतियों को नहीं दोहराते, तब सफल होने का अवसर आता है। इस... आगे पढ़े

कुछ भी घृणा योग्य नहीं..

Updated on 9 February, 2015, 13:55
मित्रों फूल बन जाती है और गंदगी खाद बनकर सुगंध में परिणत हो जाती है। ऐसे ही मनुष्य के विकार हैं, जो पशु जैसे दिखते हैं, वही दिशा परिवर्तित होने पर दिव्यता बन जाते हैं। वस्तुत: अदिव्य कुछ भी नहीं है। जीवन दिव्यता है। भेद केवल अभिव्यक्ति का है। इस... आगे पढ़े

पूर्ण ज्ञान का मार्ग

Updated on 8 February, 2015, 8:53
एक ज्ञान है, जो भर तो देता है मन को बहुत सारी जानकारी से, लेकिन हृदय को शून्य नहीं करता है. एक ज्ञान है, जो मन को भरता नहीं, खाली करता है. हृदय को शून्य का मंदिर बनाता है. एक ज्ञान है, जो सीखने से मिलता है और एक ज्ञान है... आगे पढ़े

प्रेम और मोह में अंतर

Updated on 7 February, 2015, 13:16
यजुर्वेद में लिखा है कि बुराइयों को द्वेष की अपेक्षा प्रेम से दूर करना ज्यादा सरल है। इसी प्रकार ताओ धर्म कहता है कि प्रेम के आधार पर ही मनुष्य वीर बन सकता है। प्रेम ही है, जो अंधकार को प्रकाश में, निर्जीवता को जीवन में और मरघट को उद्यान... आगे पढ़े

तुम को भूल जाओ..जीवन उत्सव हो जाएगा

Updated on 6 February, 2015, 8:34
कुछ लोग केवल भीड़ में उत्सव मना सकते हैं, कुछ एकान्त में, कुछ मौन में खुशी मना सकते हैं। मैं तुमसे कहता हूं, दोनों करो। एकांत में उत्सव मनाओं और लोगों के साथ भी। अकेले होने पर भीड़ को महसूस करना अज्ञानता है। भीड़ में भी एकान्त महसूस करना बुद्धिमता का... आगे पढ़े

अक्षम नहीं, सक्षम

Updated on 5 February, 2015, 13:35
पैट्रिक हेनरी  अमेरिका के जाने-माने संगीतकार है। उनका संघर्ष उन लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो अपनी शारीरिक अक्षमता या संसाधनों की कमी को ही दोष देते रहते हैं और अपने जीवन को खुशहाल बनाने के लिए कोई प्रयत्न ही नहीं करते। पैट्रिक का जन्म 10 मार्च, 1988 को... आगे पढ़े

प्रेम पर आधारित है पुष्टिमार्ग

Updated on 4 February, 2015, 12:50
वल्लभाचार्य ने शुद्धाद्वैत दर्शन के आधार पर पुष्टिमार्ग की आधारशिला रखी थी, जिसमें प्रेम प्रमुख भाव है। वल्लभाचार्य ने पुष्टिमार्ग का प्रतिपादन किया था। उन्होंने ही इस मार्ग पर चलने वालों के लिए वल्लभ संप्रदाय की आधारशिला रखी। पुष्टिमार्ग शुद्धाद्वैत दर्शन पर आधारित है। पुष्टिमार्ग में भक्त भगवान के स्वरूप... आगे पढ़े

औषधि है रामनाम

Updated on 2 February, 2015, 13:11
इलाहाबाद। राम नाम खाते में जमा रामनाम रूपी धन इस लोक के साथ परलोक में भी काम आता है। श्रीराम का नाम जपने वाला व्यक्ति कभी हताश व निराश नहीं होता। देवतीर्थ जगद्गुरु स्वामी अधोक्षजानंद सरस्वती ने उक्त बातें कही। वह शुक्रवार को अक्षयवट मार्ग स्थित रामनाम सेवा संस्थान के... आगे पढ़े

'समय कीमती है, ईश्वर भजन में लगाएं'

Updated on 1 February, 2015, 8:57
सिद्धपीठ कालिका मंदिर, कालका जी में सत्संग सभा में महंत सुरेन्द्रनाथ ने कहा कि जो अपने समय को व्यर्थ खोता है, वह बहुत बड़ा नुकसान करता है। जो समय भगवान के चिंतन-मनन, दूसरों के हित, उपकार के लिए है वह भोग के चिंतन और दूसरों के अहित, अपकार में लगता... आगे पढ़े

शून्य का अर्थ संपूर्ण विसर्जन

Updated on 31 January, 2015, 9:16
शून्य का अर्थ किसी का स्मरण नहीं, समस्त का विसर्जन है. हमने अपने को खोया नहीं है, हमने केवल अपने को विस्मृत किया है. हम अपने को खो सकते ही नहीं. स्वरूप को खोया नहीं जा सकता, केवल विस्मरण है. विस्मरण इसलिए किया कि दूसरी बातों के स्मरण ने चित्त को... आगे पढ़े

समस्या से भागें नहीं, जीवंतता के साथ जिएं

Updated on 30 January, 2015, 12:36
जीवन एक ऐसी नदी है, जिसे कुशलता से पार करने वाला ही विजेता बनता है। इसके लिए उसे समस्याओं के मगरमच्छों का सामना तो करना ही होगा... एक रोमांच पसंद अमीर आदमी ने अपने फॉर्म हाउस में पार्टी रखी। काफी मेहमान आए। पार्टी लॉन में स्वीमिंग पूल था, जिसमें मगरमच्छ तैर... आगे पढ़े

एकाग्रता बढ़ाता है ध्यान

Updated on 29 January, 2015, 14:13
ध्यान हमारी एकाग्रता को इतना बढ़ा देता है कि हमारा हर काम उत्कृष्ट हो जाता है... एक जेन गुरु अपने शिष्यों को ध्यान का प्रशिक्षण दे रहे थे। एक शिष्य उनसे कहने लगा कि अब मैं ध्यान में निष्णात हो गया हूं, अब मुझे लोगों को प्रशिक्षित करने की अनुमति दीजिए।... आगे पढ़े

आत्मा का महत्व शरीर से है

Updated on 27 January, 2015, 10:35
ऐसा माना गया है कि मनुष्य-तन अत्यंत दुर्लभ है और पूर्व जन्मों के पुण्यों के फलस्वरूप प्राप्त होता है। हम प्राय: अपने इस शरीर को ही सब कुछ समझ लेते हैं। इसीलिए संसार में रहकर हम शरीर-सुख के लिए प्रतिपल प्रयासरत रहते हैं, जबकि प्राणी का शरीर तुच्छ है, क्षणभंगुर... आगे पढ़े

इसलिए ईश्वर को पाने में सबसे बड़ी बाधक हमारी बुद्धि है

Updated on 26 January, 2015, 11:31
श्री रमण से किसी ने पूछा था, क्या सीखूं कि मुझे प्रभु उपलब्ध हो जाए? श्री रमण ने कहा, सीखना नहीं है, भूलना है। बहुत स्मरण है, वही बाधा है। जब समस्त स्मरण छूट जाए। स्व-स्मरण जाग्रत हो जाता है। किन्हीं ने पूछा है, जब बुद्धि असफल हो जाती है तो... आगे पढ़े

अभ्यास किसी भी कार्य की कुशलता के लिए परमावश्यक है

Updated on 26 January, 2015, 11:26
अभ्यास किसी भी कार्य की कुशलता के लिए परमावश्यक है। जीवन की सभी परीक्षाओं में सफल होने के लिए अभ्यास सबसे महत्वपूर्ण घटक है। किसी कार्य में विशेषज्ञता, कला में पारंगतता तब प्राप्त होती है जब कार्य व कलाएं ज्ञान के स्वरूप को छोड़कर व्यवहारिकता धारण करती हैं। ज्ञान संबंधी विशेषताओं... आगे पढ़े