Saturday, 18 November 2017, 7:19 PM

उपदेश

शंकराचार्य जयंती: आधुनिकता के प्रणेता

Updated on 23 April, 2015, 13:37
आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत दर्शन द्वारा लोगों के बीच खाइयों को पाटने का प्रयास कर धर्म और दर्शन में आधुनिकता की नींव रखी। उनकी जयंती (23 अप्रैल) पर विशेष... आठवीं शताब्दी की शुरुआत का लगभग दो दशक वैचारिक दृष्टि से भारत के लिए ऐसा क्रांतिकारी समय रहा, जो आज तक... आगे पढ़े

मधुर हो जीवन का हर क्षण

Updated on 22 April, 2015, 12:21
जिस प्रकार हमेशा प्रत्यंचा तनी रहने से धनुष बेकार हो जाता है, उसी प्रकार यदि हम हर वक्त तनाव में रहेंगे, तो हमारी रचनात्मकता क्षीण हो जाएगी। आइए, मन पर भारी सारे बोझ हटा लें और मधुर बना लें जीवन का हर क्षण...। एक बच्चे को अपना मनपसंद खिलौना मिल गया।... आगे पढ़े

परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार कहे जाते

Updated on 21 April, 2015, 12:53
परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार कहे जाते हैं। वह त्रेता युग (रामायण काल) के मुनि थे। उनका जन्म भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि की ओर से करवाए गए पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप हुआ। पौराणिक उल्लेख- परशुरामजी का उल्लेख रामायण, महाभारत, भागवत पुराण और कल्कि पुराण इत्यादि अनेक... आगे पढ़े

भगवान है क्या ?

Updated on 20 April, 2015, 13:28
प्रश्न- भगवान हैं क्या? गुरुरविशंकरजी- क्यों नहीं? अगर भगवान ना होते तो तुम यह प्रश्न ही क्यों पूछोगे? तुम क्या कहोगे अगर एक लहर सागर के अस्तित्व पर सवाल करे? सागर है तभी तो लहर है। जिसके कारण तुम खड़े हो, तुम्हारा अस्तित्व है, तुम सोचते हो, समझते हो, सांस लेते... आगे पढ़े

गुरु का प्रयोजन

Updated on 19 April, 2015, 9:13
गुरु शब्द का अर्थ बड़ा प्यारा है. इसका अर्थ होता है- जिससे अंधकार मिटे. गुरु शब्द का अर्थ होता है- दीया, रोशनी. प्यारा शब्द है. मगर प्यारे से प्यारे शब्द गलत लोगों के हाथों में पड़ कर घातक हो जाते हैं. कितना प्यारा शब्द है! लेकिन उसके क्या-क्या अर्थ हो गए!... आगे पढ़े

रूप का रहस्य, रहस्य का रूप

Updated on 17 April, 2015, 13:27
देहरादून । हिमालयी महाकुंभ श्री नंदा देवी राजजात का अद्भुत, अलौकिक, अतुलनीय, अति प्राचीन, अविस्मरणीय और अति दुर्लभ पड़ाव है रूपकुंड। चमोली जनपद के सीमांत देवाल विकासखंड में समुद्रतल से 4778 मीटर की ऊंचाई पर नंदाकोट, नंदाघाट और त्रिशूल जैसे विशाल हिमशिखरों की छांव में चट्टानों और पत्थरों के विस्तार... आगे पढ़े

कन्फ्यूशियस का जवाब

Updated on 16 April, 2015, 13:17
कन्फ्यूशियस के समय चीन बड़े उतार-चढ़ाव से गुजर रहा था। सभी के मन में अराजकता और रक्तपात का भय समाने लगा। सरकार का एक नुमाइंदा ऐसे माहौल में कन्फ्यूशियस को ढूंढ़ने लगा। उसने कन्फ्यूशियस को एक पेड़ के नीचे ध्यानमग्न देखा। उसने कहा, 'इस विकट समय में आपका मार्गदर्शन चाहिए।... आगे पढ़े

बैसाखी पर पड़ी थी खालसा की नींव

Updated on 14 April, 2015, 12:02
बैसाखी प्रसन्नता का पर्व है। नई फसल से घर में समृद्धि की खुशी होती है, तो इसमें शामिल है खालसा पंथ की स्थापना का स्मरण भी...। बैसाखी (14 अप्रैल) पर विशेष... साखी पंजाब का खास सामाजिक पर्व है, जिसे लोग मिल-जुलकर आनंदपूर्वक मनाते हैं। नई फसल के घर आने की खुशी... आगे पढ़े

अध्यात्म का मूल

Updated on 13 April, 2015, 10:25
सभी धर्म जीवन के सत्य की ही खोज करते हैं। हमें पूजा-पाठ और कर्मकांड में उलझने के बजाय उनका मर्म समझना चाहिए... एकम् सत्य द्वितीय ना अस्ति। सत्य एक और सनातन है। गुरुबाणी में इसे आदि सच, जुगादि सच इत्यादि शब्दों से संजोया गया है। बाइबल में 'मैं सत्य हूं के... आगे पढ़े

प्रथा और परिवर्तन

Updated on 9 April, 2015, 11:47
एक ऐसा इलाका था, जहां की भूमि उर्वर नहीं थी। वहां बहुत कम फल उपजते थे। ईश्वर ने एक नियम बनाया कि वहां के लोग दिन में केवल एक ही फल खाएं। इस नियम को लोगों तक पहुंचाया ईश्वर के दूत ने। लोगों ने दूत की बात मानी और दिन... आगे पढ़े

भाग्य की पुस्तक

Updated on 8 April, 2015, 14:09
एक व्यक्ति का आखिरी समय नजदीक आ गया था। जब वह रेगिस्तानी रास्ते पर जा रहा था, उस समय उसके पास यमदूत आया। यमदूत को वह व्यक्ति पहचान नहीं सका। लेकिन चूंकि वह अच्छा आदमी था, इसलिए उसने यमदूत को पानी पिलाया। इसके बाद उस व्यक्ति ने पूछा, 'तुम कौन... आगे पढ़े

जीवन-मंत्र है गीता ज्ञान

Updated on 7 April, 2015, 13:01
श्रीकृष्ण कहते हैं, जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है। केवल अग्नि का त्याग करने वाला संन्यासी नहीं है तथा केवल क्रियाओं का त्याग करने वाला योगी नहीं है। भावार्थ : यहां कृष्ण निष्काम कर्म करने वाले को संन्यासी व योगी... आगे पढ़े

पास्का-जागरण की चरम सीमा पवित्र मिस्सा

Updated on 6 April, 2015, 8:06
प्रभु यीशू के पुनरुत्‍थान का दिन पास्‍का पर्व यानि ईस्‍टर ईसाई समुदाय ऐतिहासिक घटना के रूप में हर्षोल्‍लास से मनाता है। पास्‍का जागरण चार भागों में संपन्‍न होता है। पहला भाग यानी प्रकाश की धर्म-विधि पहला भाग आग या प्रकाश पर केंद्रित है जो यीशू ख्रीस्‍त का प्रतीक है, जिन्होंने अपने... आगे पढ़े

संत अपने लिए नहीं जीता

Updated on 4 April, 2015, 12:51
संतों को ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। वह अपनी साधना से प्रकृति में फैली ऊर्जा का संग्रह करता है। अपनी इस संग्रहित ऊर्जा से अपने भक्तों का कल्याण करता है। इसलिए संतों के संपर्क में रहने वाला व्यक्ति स्वस्थ और शांत रहता है। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि दुष्ट... आगे पढ़े

अपने जीवन का लक्ष्य

Updated on 4 April, 2015, 9:19
समुद्र में मिलने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने वाली गंगा रास्ते में अवरोध उत्पन्न करने वाली बाधाओं की परवाह नहीं करती। यदि आपने अपने जीवन का लक्ष्य कुछ विशेष तय किया है, तो गंगा से सीख लें... प्रसिद्ध कवि एवं उपन्यासकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय युवावस्था में क्रांतिकारी आंदोलनों में... आगे पढ़े

प्रभु यीशू के दुःखभोग का दिन है गुड फ्राइडे

Updated on 3 April, 2015, 9:01
 फादर सायमन मोहता पवित्र शुक्रवार यानि गुड फ्राइडे मानव मुक्ति का दिन है। यह दिन हमें प्रभु यीशू के दुःखभोग तथा उनके क्रूस पर मरण की ऐतिहासिक घटना को याद दिलाता हैं। इस दिन को सारा ईसाई सामुदाय प्रभु यीशू की इस महान त्याग एवं समर्पण की घटना को याद करता... आगे पढ़े

जानिए भगवान महावीर के अमृत वचन

Updated on 2 April, 2015, 9:02
भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओतप्रोत था। उन्होंने दुनिया को सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया, पूरी दुनिया को उपदेश दिए।     यदि संसार के दु:खों, रोगों, जन्म-मृत्यु, भूख-प्यास आदि से बचना चाहते हों तो अपनी आत्मा को पहचान लो।     दूसरों के साथ... आगे पढ़े

भलाई का भाव होता है यज्ञ

Updated on 2 April, 2015, 8:42
अर्थात: हे कुरुश्रेष्ठ अर्जुन! यज्ञ से बचे हुए अमृत का सेवन करने वाले सनातन ब्रह्म को प्राप्त होते हैं। लेकिन जो यज्ञ नहीं करता उसके लिए यह मनुष्यलोक ही सुखद नहीं है, फिर परलोक की तो बात ही क्या? एक भाव होता है 'मेरा' दूसरा है 'मेरे लिए' और तीसरा है... आगे पढ़े

गीता ज्ञान

Updated on 1 April, 2015, 13:32
विषयों (वस्तुओं) के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे लगाव हो जाता है। इससे उनमें इच्छा पैदा होती है और इच्छाओं से क्रोध का जन्म होता है। भावार्थ : हमारे भीतर क्रोध तभी पैदा होता है, जब हमारी इच्छा के विरुद्ध परिणाम आता है। इच्छाओं को हम स्वयं भी... आगे पढ़े

हतोत्साहित मन पराजय की पहली सीढ़ी

Updated on 1 April, 2015, 8:08
महाभारत का युद्ध चल रहा था। एक ओर अर्जुन थे, जिनके सारथी थे 'श्री कृष्ण'। तो दूसरी ओर कर्ण थे और उनका सारथी 'शल्य'। भगवान श्री कृष्ण ने कर्ण के सारथी से कहा- 'तुम हमारे विरुद्ध जरूर लड़ना पर मेरी एक बात जरूर मानना।' जब कर्ण प्रहार करे तब कहना कि,... आगे पढ़े

मुझे हर रोगी में दिखाई देते हैं प्रभु यीशू

Updated on 31 March, 2015, 7:49
प्रख्यात समाज सेविका और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मदर टेरेसा से एक बार पत्रकार खुशवंत सिंह ने सवाल किया, 'मदर', मुझे बताइए कि कोढ़ और गैंग्रीन जैसे घिनौने रोग वाले रोगियों को छूने का अभ्यास आपने कैसे किया ? पत्रकार की आंखों में झांकते हुए मदर ने निर्विकार भाव से... आगे पढ़े

गंगा से सीख: अपना लक्ष्य हासिल करें

Updated on 27 March, 2015, 12:16
समुद्र में मिलने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने वाली गंगा रास्ते में अवरोध उत्पन्न करने वाली बाधाओं की परवाह नहीं करती। यदि आपने अपने जीवन का लक्ष्य कुछ विशेष तय किया है, तो गंगा से सीख लें.. सिद्ध कवि एवं उपन्यासकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय युवावस्था में क्रांतिकारी आंदोलनों में... आगे पढ़े

जीवन का रहस्य

Updated on 25 March, 2015, 12:52
धर्म का पहला संबंध जीवन के रहस्य के अनुभव से है- वह जो जीवन की मिस्ट्री है. और समग्र जीवन ही रहस्यपूर्ण है- एक छोटे से पत्थर से लेकर आकाख़् के सूरज तक, एक छोटे बीज से लेकर आकाख़् को छूते वृक्षों तक- सभी कुछ, जो भी है, अत्यंत रहस्यपूर्ण... आगे पढ़े

वृक्ष के नीचे किया ध्यान और इन्हें मिला ज्ञान

Updated on 23 March, 2015, 14:42
बिहार की राजधानी पटना से दक्षिणपूर्व में लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित है बोधगया। यह गया जिले का एक छोटा शहर है। कहते हैं बोधगया में 'बोधि वृक्ष' के नीचे तपस्या कर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। तभी से यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत... आगे पढ़े

पुनर्जीवन की नवरात्रि: रवि शंकर जी

Updated on 23 March, 2015, 13:15
नव के दो अर्थ हैं- नया एवं नौ रात्रि का अर्थ है रात, जो हमें आराम और शांति देती है। यह नौ दिन समय है स्वयं के स्वरूप को पहचानने का और अपने स्रोत मकी ओर वापस जाने का। इस परिवर्तन के काल में प्रकृति पुराने को त्याग कर फिर... आगे पढ़े

जब मां ने अपने बेटे से मांगे दुर्लभ गहने

Updated on 20 March, 2015, 8:33
बंगाल के मेदिनीपुर जिले के वीरसिंह गांव में एक छोटा बालक अपनी मां के साथ रहता था। एक दिन बालक ने अपनी मां से पूछा, 'मां तुम्हें कौन से गहने अच्छे लगते हैं?' मेरी इच्छा है कि में तुम्हारे लिए गहने बनवाऊं। यह सुनकर मां बोली, 'बेटा बहुत दिनों से मुझे... आगे पढ़े

जिसके भीतर सुबह हो जाती है, उसकी कभी रात नहीं होती

Updated on 19 March, 2015, 11:47
जिसके भीतर सुबह हो जाती है, उसकी कभी रात नहीं होती। यदि हम अपने अंदर के सूरज का उदय करेंगे तो अंधकार का अस्तित्व स्वत: ही समाप्त हो जाएगा। कथावाचक मोरारी बापू के प्रवचन का अंश... पचास यानी 5 (पांच) और 0 (शून्य)...। शून्य हटते ही पचास पांच हो जाता है।... आगे पढ़े

जाकी रही भावना जैसी...

Updated on 18 March, 2015, 13:29
अगर हमारे चश्मे पर धूल जमी हुई है, तो हमें पूरी दुनिया ही धुंधली नजर आएगी। आलोचना करने से पहले हमें अपनी अंतर्दृष्टि को जरूर परखना चाहिए, तभी हमें सब कुछ साफ-साफ नजर आएगा... एक युवा दंपति ट्रांसफर होकर नए घर में रहने आए। पति-पत्नी अपनी नई गृहस्थी में मन रमाने... आगे पढ़े

सर्वव्यापी है चेतना

Updated on 16 March, 2015, 11:02
अध्यात्म मानता है कि सृष्टि के मूल में एक ही शक्ति या चेतना है। जब वह जड़ पदार्र्थो से संयोग करती है, तो जीवों के रूप में व्यक्त होती है। हमारे वैज्ञानिकों ने भी चेतना के बारे में अवधारणाएं दी हैं.. महान वैज्ञानिक न्यूटन के अनुसार, हमारा मस्तिष्क ज्ञान की खोज... आगे पढ़े

हंसी में ही प्रभु की सच्ची प्रार्थना है

Updated on 15 March, 2015, 12:56
श्रीश्री प्रवचन ''आप हंसते हो तो सारी प्रकृति आपके साथ हंसती है। यह हंसी प्रतिध्वनि होती है और गूंजती है, यही वास्तविक जीवन है। जब सब आपके अनुसार हो रहा हो तो कोई भी हंस सकता है, लेकिन जब आपके विपरीत हो रहा हो और आप हंस सके तो समझो... आगे पढ़े