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Thursday, 21 September 2017, 5:53 PM

उपदेश

जीवन-मंत्र है गीता ज्ञान

Updated on 7 April, 2015, 13:01
श्रीकृष्ण कहते हैं, जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है। केवल अग्नि का त्याग करने वाला संन्यासी नहीं है तथा केवल क्रियाओं का त्याग करने वाला योगी नहीं है। भावार्थ : यहां कृष्ण निष्काम कर्म करने वाले को संन्यासी व योगी... आगे पढ़े

पास्का-जागरण की चरम सीमा पवित्र मिस्सा

Updated on 6 April, 2015, 8:06
प्रभु यीशू के पुनरुत्‍थान का दिन पास्‍का पर्व यानि ईस्‍टर ईसाई समुदाय ऐतिहासिक घटना के रूप में हर्षोल्‍लास से मनाता है। पास्‍का जागरण चार भागों में संपन्‍न होता है। पहला भाग यानी प्रकाश की धर्म-विधि पहला भाग आग या प्रकाश पर केंद्रित है जो यीशू ख्रीस्‍त का प्रतीक है, जिन्होंने अपने... आगे पढ़े

संत अपने लिए नहीं जीता

Updated on 4 April, 2015, 12:51
संतों को ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। वह अपनी साधना से प्रकृति में फैली ऊर्जा का संग्रह करता है। अपनी इस संग्रहित ऊर्जा से अपने भक्तों का कल्याण करता है। इसलिए संतों के संपर्क में रहने वाला व्यक्ति स्वस्थ और शांत रहता है। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि दुष्ट... आगे पढ़े

अपने जीवन का लक्ष्य

Updated on 4 April, 2015, 9:19
समुद्र में मिलने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने वाली गंगा रास्ते में अवरोध उत्पन्न करने वाली बाधाओं की परवाह नहीं करती। यदि आपने अपने जीवन का लक्ष्य कुछ विशेष तय किया है, तो गंगा से सीख लें... प्रसिद्ध कवि एवं उपन्यासकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय युवावस्था में क्रांतिकारी आंदोलनों में... आगे पढ़े

प्रभु यीशू के दुःखभोग का दिन है गुड फ्राइडे

Updated on 3 April, 2015, 9:01
 फादर सायमन मोहता पवित्र शुक्रवार यानि गुड फ्राइडे मानव मुक्ति का दिन है। यह दिन हमें प्रभु यीशू के दुःखभोग तथा उनके क्रूस पर मरण की ऐतिहासिक घटना को याद दिलाता हैं। इस दिन को सारा ईसाई सामुदाय प्रभु यीशू की इस महान त्याग एवं समर्पण की घटना को याद करता... आगे पढ़े

जानिए भगवान महावीर के अमृत वचन

Updated on 2 April, 2015, 9:02
भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओतप्रोत था। उन्होंने दुनिया को सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया, पूरी दुनिया को उपदेश दिए।     यदि संसार के दु:खों, रोगों, जन्म-मृत्यु, भूख-प्यास आदि से बचना चाहते हों तो अपनी आत्मा को पहचान लो।     दूसरों के साथ... आगे पढ़े

भलाई का भाव होता है यज्ञ

Updated on 2 April, 2015, 8:42
अर्थात: हे कुरुश्रेष्ठ अर्जुन! यज्ञ से बचे हुए अमृत का सेवन करने वाले सनातन ब्रह्म को प्राप्त होते हैं। लेकिन जो यज्ञ नहीं करता उसके लिए यह मनुष्यलोक ही सुखद नहीं है, फिर परलोक की तो बात ही क्या? एक भाव होता है 'मेरा' दूसरा है 'मेरे लिए' और तीसरा है... आगे पढ़े

गीता ज्ञान

Updated on 1 April, 2015, 13:32
विषयों (वस्तुओं) के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे लगाव हो जाता है। इससे उनमें इच्छा पैदा होती है और इच्छाओं से क्रोध का जन्म होता है। भावार्थ : हमारे भीतर क्रोध तभी पैदा होता है, जब हमारी इच्छा के विरुद्ध परिणाम आता है। इच्छाओं को हम स्वयं भी... आगे पढ़े

हतोत्साहित मन पराजय की पहली सीढ़ी

Updated on 1 April, 2015, 8:08
महाभारत का युद्ध चल रहा था। एक ओर अर्जुन थे, जिनके सारथी थे 'श्री कृष्ण'। तो दूसरी ओर कर्ण थे और उनका सारथी 'शल्य'। भगवान श्री कृष्ण ने कर्ण के सारथी से कहा- 'तुम हमारे विरुद्ध जरूर लड़ना पर मेरी एक बात जरूर मानना।' जब कर्ण प्रहार करे तब कहना कि,... आगे पढ़े

मुझे हर रोगी में दिखाई देते हैं प्रभु यीशू

Updated on 31 March, 2015, 7:49
प्रख्यात समाज सेविका और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मदर टेरेसा से एक बार पत्रकार खुशवंत सिंह ने सवाल किया, 'मदर', मुझे बताइए कि कोढ़ और गैंग्रीन जैसे घिनौने रोग वाले रोगियों को छूने का अभ्यास आपने कैसे किया ? पत्रकार की आंखों में झांकते हुए मदर ने निर्विकार भाव से... आगे पढ़े

गंगा से सीख: अपना लक्ष्य हासिल करें

Updated on 27 March, 2015, 12:16
समुद्र में मिलने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने वाली गंगा रास्ते में अवरोध उत्पन्न करने वाली बाधाओं की परवाह नहीं करती। यदि आपने अपने जीवन का लक्ष्य कुछ विशेष तय किया है, तो गंगा से सीख लें.. सिद्ध कवि एवं उपन्यासकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय युवावस्था में क्रांतिकारी आंदोलनों में... आगे पढ़े

जीवन का रहस्य

Updated on 25 March, 2015, 12:52
धर्म का पहला संबंध जीवन के रहस्य के अनुभव से है- वह जो जीवन की मिस्ट्री है. और समग्र जीवन ही रहस्यपूर्ण है- एक छोटे से पत्थर से लेकर आकाख़् के सूरज तक, एक छोटे बीज से लेकर आकाख़् को छूते वृक्षों तक- सभी कुछ, जो भी है, अत्यंत रहस्यपूर्ण... आगे पढ़े

वृक्ष के नीचे किया ध्यान और इन्हें मिला ज्ञान

Updated on 23 March, 2015, 14:42
बिहार की राजधानी पटना से दक्षिणपूर्व में लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित है बोधगया। यह गया जिले का एक छोटा शहर है। कहते हैं बोधगया में 'बोधि वृक्ष' के नीचे तपस्या कर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। तभी से यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत... आगे पढ़े

पुनर्जीवन की नवरात्रि: रवि शंकर जी

Updated on 23 March, 2015, 13:15
नव के दो अर्थ हैं- नया एवं नौ रात्रि का अर्थ है रात, जो हमें आराम और शांति देती है। यह नौ दिन समय है स्वयं के स्वरूप को पहचानने का और अपने स्रोत मकी ओर वापस जाने का। इस परिवर्तन के काल में प्रकृति पुराने को त्याग कर फिर... आगे पढ़े

जब मां ने अपने बेटे से मांगे दुर्लभ गहने

Updated on 20 March, 2015, 8:33
बंगाल के मेदिनीपुर जिले के वीरसिंह गांव में एक छोटा बालक अपनी मां के साथ रहता था। एक दिन बालक ने अपनी मां से पूछा, 'मां तुम्हें कौन से गहने अच्छे लगते हैं?' मेरी इच्छा है कि में तुम्हारे लिए गहने बनवाऊं। यह सुनकर मां बोली, 'बेटा बहुत दिनों से मुझे... आगे पढ़े

जिसके भीतर सुबह हो जाती है, उसकी कभी रात नहीं होती

Updated on 19 March, 2015, 11:47
जिसके भीतर सुबह हो जाती है, उसकी कभी रात नहीं होती। यदि हम अपने अंदर के सूरज का उदय करेंगे तो अंधकार का अस्तित्व स्वत: ही समाप्त हो जाएगा। कथावाचक मोरारी बापू के प्रवचन का अंश... पचास यानी 5 (पांच) और 0 (शून्य)...। शून्य हटते ही पचास पांच हो जाता है।... आगे पढ़े

जाकी रही भावना जैसी...

Updated on 18 March, 2015, 13:29
अगर हमारे चश्मे पर धूल जमी हुई है, तो हमें पूरी दुनिया ही धुंधली नजर आएगी। आलोचना करने से पहले हमें अपनी अंतर्दृष्टि को जरूर परखना चाहिए, तभी हमें सब कुछ साफ-साफ नजर आएगा... एक युवा दंपति ट्रांसफर होकर नए घर में रहने आए। पति-पत्नी अपनी नई गृहस्थी में मन रमाने... आगे पढ़े

सर्वव्यापी है चेतना

Updated on 16 March, 2015, 11:02
अध्यात्म मानता है कि सृष्टि के मूल में एक ही शक्ति या चेतना है। जब वह जड़ पदार्र्थो से संयोग करती है, तो जीवों के रूप में व्यक्त होती है। हमारे वैज्ञानिकों ने भी चेतना के बारे में अवधारणाएं दी हैं.. महान वैज्ञानिक न्यूटन के अनुसार, हमारा मस्तिष्क ज्ञान की खोज... आगे पढ़े

हंसी में ही प्रभु की सच्ची प्रार्थना है

Updated on 15 March, 2015, 12:56
श्रीश्री प्रवचन ''आप हंसते हो तो सारी प्रकृति आपके साथ हंसती है। यह हंसी प्रतिध्वनि होती है और गूंजती है, यही वास्तविक जीवन है। जब सब आपके अनुसार हो रहा हो तो कोई भी हंस सकता है, लेकिन जब आपके विपरीत हो रहा हो और आप हंस सके तो समझो... आगे पढ़े

धर्म के मायने प्रेम, करुणा और सद्भावना है

Updated on 14 March, 2015, 12:16
धर्म सफल और सार्थक जीवन का आधार है। यह सिर पर धारण करने वाली पगड़ी नहीं, जिसे घर से दुकान के लिए चले तो पहन लिया और दुकान पर जाकर उतार कर रख दिया। धर्म तो आत्मा का स्वभाव है। धर्म के मायने प्रेम, करुणा और सद्भावना है। उसका प्रतीक फिर... आगे पढ़े

मन को विश्राम देकर ही हम सृजनशील हो सकते हैं

Updated on 13 March, 2015, 13:32
हम में से अधिकांश लोगों के मन बहुत सारी बातों से भरे पड़े हैं। सुखद-दुखद अनुभवों, ज्ञान, व्यवहार और रीति-रिवाजों से। हमारा मन कभी खाली नहीं रहता। जबकि सृजन उसी मन में हो सकता है, जो पूरी तरह से खाली हो। जब आप कोई चीज कहीं रखकर भूल जाएं या किसी... आगे पढ़े

सफल होने के लिए जरूरी है छटपटाहट

Updated on 12 March, 2015, 7:41
महान दार्शनिक सुकरात से एक बार एक युवक मिला। उसने सफलता पाने का उपाय पूछा। सुकरात ने उसे अगले दिन आने के लिए कहा। अगले दिन युवक ने फिर से वही सवाल पूछा तो सुकरात ने उसे फिर से अगले दिन आने को कहा। कई महीने बीत जाने के बाद भी... आगे पढ़े

अनमोल वचन

Updated on 10 March, 2015, 12:03
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो कर्मण:। शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मण:॥ अर्थ : जो तुम्हारा काम है, उसे करो। क्योंकि कर्म से ही अकर्म पैदा होता है। कर्म किए बिना तो शरीर की यात्रा भी संभव नहीं हो सकती। भावार्थ : इस श्लोक का भावार्थ है अपने कर्तव्य से डिगना नहीं चाहिए।... आगे पढ़े

फूलों की सुंदरता में छुपे राज को जानकर दिल भर आएगा

Updated on 10 March, 2015, 12:01
किसान रतिराम रोज सुबह उठकर दूर झरने से स्वच्छ पानी लाया करता था। वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें एक लाठी से कांवड़ की तरह कंधे पर लटका लेता था। एक घड़ा तो सही था, मगर दूसरा कहीं से फूटा हुआ था। घर पहुंचते-पहुंचते वह आधा... आगे पढ़े

क्यों मुस्कुराए बौद्ध संत

Updated on 9 March, 2015, 12:54
एक चीनी कवि सू तुंग-पो को राजदरबार में राज कवि की पदवी प्राप्त थी, इस बात का उसे अभिमान था। वहीं एक बौद्ध संत भी थे बुद्धस्तंप, जिनके दर्शन-चिंतन के आगे कवि महोदय टिक न पाते थे। एक दिन सू बौद्ध मंदिर गए। वहां उन्होंने बुद्धस्तंप नाम के एक बौद्ध संत... आगे पढ़े

शिखा रखने के यह पांच फायदे नहीं जानते होंगे

Updated on 8 March, 2015, 8:38
सिर के पीछे एक केन्द्रस्थान होता है प्राचीन काल में लोग भले ही पूरे सिर के बाल कटवा लेते थे लेकिन इस स्थान के बाल नहीं कटवाते थे। इस स्थान के बालों को शिखा के नाम से जाना जाता है। आज भी बहुत से लोग हैं जो शिखा रखते हैं। शास्त्रों... आगे पढ़े

मानसिक जंजीरों को खोल कर तो देखिए

Updated on 7 March, 2015, 12:31
एक व्यक्ति कहीं से जा रहा था, अचानक उसे सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा और वह रुक गया। उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है। उसे इस बात पर आश्चर्य हुआ कि हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस... आगे पढ़े

जब फरिश्ता ने दिया खलीफा उमर को दिव्य संदेश

Updated on 5 March, 2015, 9:19
एक बार खलीफा उमर अपने धर्मस्थान पर बैठे थे कि उन्हें स्वर्ग की ओर उड़ता हुआ एक फरिश्ता दिखाई दिया। उसके कन्धे पर एक बड़ी सी पुस्तक थी। खलीफा ने उसे बुलाकर पूछा, इस पुस्तक में क्या है ? फरिश्ते ने जबाव दिया, इसमें उन लोगों की सूची है, जो... आगे पढ़े

ऐसे कीजिए वासना की परत को छूमंतर

Updated on 4 March, 2015, 9:38
एक धनी व्यक्ति किसी फकीर के पास गया और कहने लगा कि, 'मैं प्रार्थना करना चाहता हूं, लेकिन तमान कोशिशों के बावजूद प्रार्थना नहीं होती। वासना बनी रहती है। चाहे जितना आंख बंद कर लूं लेकिन परमात्मा के दर्शन नहीं होते।' इसीलिए आप बताइए कि मैं क्या करूं? क्या कारण... आगे पढ़े

तो यहां से आया 'प्रतिमा' शब्द

Updated on 2 March, 2015, 11:37
हम मंदिर जाते हैं, चर्च जाते हैं, और यहां ईश्वर की प्रतिमा के सामने नतमस्तक होकर अपनी मनोकामना पूरी होने की अभिलाषा करते हैं। लेकिन हम जिस मूर्ति के सामने सजदा करते हैं, कभी सोचा है ? इस मूर्ति (प्रतिमा) का अर्थ क्या है? अमूमन धार्मिक लोगों का जबाव 'न'... आगे पढ़े