Sunday, 28 May 2017, 10:08 PM

उपदेश

चाणक्य ने इंसानों को जीवन में सफलता के कई उपाए बताए हैं

Updated on 23 July, 2015, 12:40
राजा-रजवाड़ों के सियासत में खंडित भारत को एक सूत्र में बंधने का सपना देखने वाले आचार्य चाणक्य का जन्म करीब 300 ईसा पूर्व हुआ था। आचार्य चाणक्य का संबंध पाटलिपुत्र से था, जिसे उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया।आचार्य चाणक्य को नीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र का जनक भी कहा जाता है। आमतौर पर... आगे पढ़े

ईश्वर प्राप्ति के मार्ग...

Updated on 21 July, 2015, 14:01
आज के पुजारियों ने ईश्वर प्राप्ति के इतने सारे मार्ग बता दिए हैं कि उनकी सीमा खत्म होती नहीं दिखती है। हमें कहा गया कि स्नान करके ही पूजा करें, पूजा भूखे पेट करें, आप उपवास करें, परंतु प्रकृति ने कभी ऐसा नहीं कहा। ये सारे नियम प्रकृति के प्रतिकूल... आगे पढ़े

कर्म का आधार है विचार

Updated on 17 July, 2015, 12:36
विचारों से ही कर्म का जन्म होता है। वे कर्म की नींव हैं। हमारे विचार जितने अच्छे होंगे, उतने ही श्रेष्ठ हमारे कर्म भी होंगे।आचार्य शिवेंद्र नागर का चिंतन... वेदांत में बताया गया है कि शारीरिक कर्म मात्र परिणाम है, उसका वास्तविक कारण कुछ और है। शारीरिक कर्म होते हुए दिखता... आगे पढ़े

जब तक विश्वास है, प्रगति है, जब विश्वास नहीं दुर्गति शुरू

Updated on 15 July, 2015, 7:17
एक बार प्रभु यीशु को साइमन नाम के एक भक्त ने भोज के लिए आमंत्रित किया। प्रभु यीशु जब उस व्यक्ति के घर पहुंचे तो मैग्दालिन नाम की स्त्री ने उनके पैर पकड़ लिए और उन्हें धोने लगी। मैग्दालिन एक वेश्या थी। नगर में उसके चर्चे आम थे, इसलिए वह लोग... आगे पढ़े

आंतरिक उन्नति आवश्यक

Updated on 14 July, 2015, 13:11
उन्नति के लिए आंतरिक शक्ति आवश्यक है। संतों का दायित्व है कि वे युवाओं को आत्मिक बल दें। मोरारी बापू का चिंतन। युवा भारत की शक्ति बनें, इसमें संत समाज बड़ी भूमिका निभा सकता है। देश का युवा धरती मां का गौरव है। युवा का सिर्फ बलवान होना जरूरी नहीं।... आगे पढ़े

बुझने न दें कभी नेकी और शराफत का चिराग

Updated on 11 July, 2015, 13:33
इस्लाम धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए दो मुस्लिम व्यक्ति अरब देश के नज्द नामक कस्बे में पहुंचे। उन दिनों अरब में इस्लाम धर्म का काफी विरोध हो रहा था और मुसलमानों पर तरह-तरह के अत्याचार किए जा रहे थे। ऐसी स्थिति में नज्द के सरदार हारिस ने दोनों मुस्लिम व्यक्तियों को... आगे पढ़े

ऐसे लोगों में छिपे होते हैं महानता के बीज

Updated on 10 July, 2015, 7:21
एक दिन एक निर्धन बालक लकड़ी का गट्ठर लेकर शहर में बेचने आया। उसने लकड़ी के गट्ठर को इस कलात्मक ढंग से बांधा था कि एक सेठजी को पसंद आया। सेठजी ने पूछा, 'बेटा! ये गट्ठर इतने कलात्मक ढंग से किसने बांधा है ?' उस लड़के ने उत्तर दिया, 'जी मैनें।'... आगे पढ़े

ईश्वर की इच्छा

Updated on 8 July, 2015, 13:25
पुरानी बात है। एक व्यक्ति गरीबों, बीमारों और अशक्तों की सेवा करता। उसके भीतर करुणा और दया का सागर लहराता था। उसके गुणों से प्रसन्न होकर ईश्वर ने उसके पास देवदूत भेजा। दूत ने कहा कि ईश्वर आपको वरदान देना चाहते हैं। क्या आप लोगों को रोगमुक्त करने की शक्ति... आगे पढ़े

शास्त्रों से परे धर्म

Updated on 7 July, 2015, 14:00
धर्म के नाम पर झगड़े इसलिए होते हैं, क्योंकि झगड़ने वाले धर्म को जानते ही नहींऔर वे धार्मिक ग्रंथों की बातों में उलझे रहते हैं। धर्म को समझने के लिए ग्रंथों की नहीं, बल्कि स्वयं अनुभव करने की आवश्यकता है। एक बार भारत में विभिन्न संप्रदायों के प्रतिनिधि एकत्र हुए और... आगे पढ़े

जाति से नहीं कर्म से होती है पहचान

Updated on 5 July, 2015, 14:31
एक दिन राजकुमार अभय कुमार को जंगल में नवजात शिशु मिला। वह राजकुमार उसे अपने घर ले आया और उसका नाम जीवक रख लिया। अभय कुमार ने बच्चे को खूब पढ़ाया-लिखाया। जब जीवक बड़ा हुआ तो उसने अभय कुमार से पूछा, 'मेरे माता-पिता कौन हैं?' अभय कुमार ने उस जीवक से... आगे पढ़े

जब किसान के लिए जगह नहीं तो राष्ट्रपति के लिए भी नहीं

Updated on 4 July, 2015, 9:18
अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति टामस जैफरसन एक बार किसी बड़े से होटल में ठहरने के लिए गए। जैफरसन उस समय किसानों जैसी साधारण वेशभूषा में थे। होटल मालिक ने उन्हें साधारण आदमी समझकर जगह देने से इंकार कर दिया। वे चुपचाप चले गए। होटल मालिक तो उन्हें नहीं पहचान सका लेकिन... आगे पढ़े

विवेकानंद की पुण्यतिथि: और इस दुनिया से विदा ली...

Updated on 3 July, 2015, 13:48
4 जुलाई 2015 को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि है। 113 साल पहले इसी दिन यानी 4 जुलाई 1902 को भारतीय चिंतन को समग्र विश्व में फैलाने वाले इस महापुरुष का अवसान हुआ था। आइए जानते हैं, स्वामीजी के जीवन के आखिरी दिन क्या हुआ था - 4 जुलाई 1902 आषाढ़ कृष्ण... आगे पढ़े

इस जहां में कुछ भी असंभव नहीं

Updated on 2 July, 2015, 7:49
अदम्य उत्साह के धनी थे नेपोलियन बोनापार्ट। युद्ध करते हुए एक बार जब नेपोलियन आल्पस पर्वत के पास अपनी सेना सहित पहुचें, तो पहाड़ ने उनका रास्ता रोक लिया। पहाड़ की तलहटी में एक वृद्धा रहती थी। रास्ते की जानकारी लेने जब नेपोलियन उसके पास पहुंचे तो नेपोलियन की बात सुनकर... आगे पढ़े

परमात्मा प्राप्ति के लिए है मनुष्य जन्म

Updated on 2 July, 2015, 7:10
सिद्धपीठ कालिका मंदिर, कालकाजी में सत्संग के अवसर पर महंत सुरेन्द्र नाथ ने कहा कि धन से श्रेष्ठ वस्तु होती है तथा वस्तु से श्रेष्ठ विवेक तथा विवेक से भी श्रेष्ठ सत-तत्व (परमात्मा) होता है। यह मनुष्य जन्म उस सत-तत्व की प्राप्ति के लिए ही है। सिद्धपीठ बालाजी धाम मंदिर, त्रिनगर... आगे पढ़े

सर्वे भवन्तु सुखिन:

Updated on 1 July, 2015, 12:32
विश्वभावना का विचार भारतीय संस्कृति की उदात्त भावनाओं का ही एक अंग है। वसुधैव कुटुम्बकम् (समस्त वसुधा ही परिवार है) और सर्वे भवन्तु सुखिन: (सभी लोग सुखी हों) की कामना और भावना हमारे यहां सनातन काल से रही है। हम सभी का जीवन, हमारा स्वभाव और कार्य-व्यवहार सभी में सबके... आगे पढ़े

स्वार्थ और परमार्थ के रंग

Updated on 30 June, 2015, 11:59
जो परमार्थ दिखावे के लिए होता है, वह स्वार्थ से भी बुरा है और जो स्वार्थ सबके हित में हो, वह परमार्थ से भी अच्छा है। कथावाचक मोरारी बापू का चिंतन... हम जितनी ऊंचाइयों के साथ देखते हैं, स्वार्थ को उतनी ही हेय दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन मेरा मानना... आगे पढ़े

कैकेयी का वचन बना रावण की मृत्यु का कारण

Updated on 27 June, 2015, 16:08
राजा दशरथ की तीन रानियां कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी थीं, और उनके चार पुत्र श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुधन। श्रीराम की एक बहन भी थीं। जिनका उल्लेख महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में नहीं है। अयोध्या के राजा दशरथ पुत्र श्रीराम को प्राणों से भी ज्यादा स्नेह करते थे। श्रीराम के... आगे पढ़े

जानिए यह होता है धर्म का मर्म

Updated on 26 June, 2015, 10:33
एक दिन तपोनिष्ठ कौशिक एक वृक्ष के नीचे बैठे हुए थे। वो वेद पाठ कर रहे थे। तभी उनके ऊपर एक पक्षी ने बीट कर दी। उन्होंने सिर उठाकर देखा तो वहां एक बगुला था। कौशिश को बगुले पर बड़ा ही क्रोध आया। उन्होंने क्रोध भरी आंखों से उसको देखा... आगे पढ़े

मौन की महिमा से होते हैं चमत्कार

Updated on 25 June, 2015, 10:38
श्रीलंका की पहाड़ियों पर एक बौद्ध बहुल गांव था। वहां चोरी बहुत होती थीं इसलिए वहां के लोगों का एक दूसरे पर अविश्वास बढ़ता गया। एक दिन की बात है एक किसान की दुधारू गाय चोरी हो गई तो लोगों का आक्रोश फूट पड़ा।   गांव में पंचायत बुलाई गई। चोर खोजने... आगे पढ़े

ऐसे व्यक्ति होते हैं दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख

Updated on 24 June, 2015, 10:24
एक साहूकार को धन एकत्र का बड़ा शौक था। उसे अपनी योग्यता का बहुत घमंड था। जब कोई महात्मा उसके दर पर आते तो वो उनका सम्मान तो करता लेकिन मन ही मन उन्हें भला-बुरा कहता रहता।   एक दिन उस साहूकार ने एक महात्मा जी को भोजन कराया। फिर एक आईना... आगे पढ़े

प्रसन्नता लाता है ध्यान

Updated on 22 June, 2015, 8:53
ध्यान हमारे भीतर की शुद्धता के ऊपर पड़े क्रोध, ईष्र्या, लोभ, कुंठा आदि के आवरणों को हटाकर हमें सकारात्मक बनाता है... योग की ही अवस्था है ध्यान, जो हमें बहुत से लाभ देता है। पहला लाभ, शांति और प्रसन्नता लाता है। दूसरा, यह सर्वस्व प्रेम का भाव लाता है। तीसरा, सृजनशक्ति... आगे पढ़े

योग से समृद्ध होता जीवन

Updated on 21 June, 2015, 11:00
योग का ही परिणाम है पूरी सृष्टि। गणित के योग की तरह ही यह हमारे गुणों की अभिवृद्धि करता है। हमारे भीतर की चेतना को जगाकर हमें संस्कारवान और हृष्ट-पुष्ट बनाता है। योग के महत्व पर डॉ. प्रणव पण्ड्या का आलेख... बाहरी धन-संपदा से ज्यादा महत्वपूर्ण है भीतर कीसंपदा। अंतस... आगे पढ़े

सत्य आधा नहीं किया जा सकता

Updated on 19 June, 2015, 9:37
शक्ति हो भी सकती है, नहीं भी हो सकती है, न में भी खो सकती है। इसलिए योग मानता है, सृष्टि सिर्फ एक पहलू है, प्रलय दूसरा पहलू है। ऐसा नहीं है कि सब कुछ सदा रहेगा, खोएगा, शून्य भी हो जाएगा। फिर-फिर होता रहेगा, खोता रहेगा। जैसे एक बीज... आगे पढ़े

यदि हमारी दृष्टि नहीं बदल सकी तो धर्म का प्रयोजन ही क्या रहा

Updated on 19 June, 2015, 9:36
संन्यासी - शिष्य, आज मैं कहीं जा रहा हूं। तुम नए-नए आए हो, आश्रम का यह नियम है कि रात को अंधेरा नहीं रहना चाहिए। ध्यान रखना, आश्रम में अंधेरा न आ जाए। शिष्य नया-नया और भोला था। बहुत भोला। संन्यासी बाहर चला गया। संध्या हुई। अंधेरा होने लगा। शिष्य ने... आगे पढ़े

इन्होंने की थी ऐसी गलती, कहीं आप तो नहीं करते

Updated on 14 June, 2015, 13:34
एक गांव में एक वैद्य रहता था। दवा लेने के लिए कई लोग उसके पास आते रहते हैं। लेकिन उसकी दवा के खाने से दो-तीन लोगों की मौत हो गई। इसलिए अब कोई व्यक्ति उस वैद्य से इलाज करवाने नहीं आता था। ऐसे में वैद्य को भूखे ही सोना पढ़ता था।... आगे पढ़े

उचित व्यवहार से किसान हुआ आत्म प्रफुल्लित

Updated on 7 June, 2015, 8:52
यह उस समय की बात है जब अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बने थे। लेकिन प्रसिद्ध नेता के तौर पर लोग पहचानने लगे थे। एक दिन वे महत्वपूर्ण सभा में व्याख्यान दे रहे थे। उस सभा में लिंकन के गांव का एक किसान भी बैठा हुआ था। लिंकन की कोई... आगे पढ़े

मन सर्वाधिक तीव्रगामी व शक्तिशाली होता है

Updated on 6 June, 2015, 9:39
भारत के जिन मनीषियों ने परमात्म तत्व को जाना, सत्य पर अमल किया, उन्होंने जागरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सिर्फ सोते समय ही आदमी मूच्र्छित नहीं होता, बल्कि जिसे हम जाग्रत अवस्था कहते हैं, उस वक्त भी वह मूच्र्छित होता है। इन समस्त मूच्र्छाओं से जो... आगे पढ़े

प्रिंस के पवित्र स्पर्श से वो हो गया धन्य

Updated on 6 June, 2015, 9:29
विश्वयुद्ध के दिन थे। 'प्रिंस ऑफ वेल्स' एडवर्ड अष्टम एक दिन युद्ध में घायल लोगों को देखने इंग्लैंड के एक निजी अस्पताल में पहुंचे। जब घायलों से मिलकर वे बाहर गेट पर आए तो उन्होंने अस्पताल के अधिकारियों से कहा, आप लोग तो घायलों की संख्या 36 बता रहे हैं।... आगे पढ़े

जब चार्ल्स ने मारा नहले पर दहला

Updated on 3 June, 2015, 6:38
कथाकार चार्ल्स डिफेन्स की इंग्लैंड में ख्याति फैल गई तो एक दिन महारानी विक्टोरिया ने उन्हें अपने महल में आमंत्रित किया। जब वो वहां पहुंचे तो उन्होंने उनसे कहानी सुनाने का आग्रह किया। चार्ल्स परम स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्हें महरानी के महल में पहुंचकर कहानी सुनाने में अपना अपमान महसूस हुआ।... आगे पढ़े

सेवा-कर्म पूजा के समान

Updated on 1 June, 2015, 13:36
अनासक्त होकर किए जाने वाले अच्छे कर्म कर्म-योग में आते हैं। संसारी लोग अगर अनासक्त होकर, ईश्वर पर भक्ति रखकर, उन्हें फल समर्पण करते हुए संसार के कर्म करें तो वह भी कर्मयोग है। इस युग में अनासक्त होकर कर्म करना बहुत ही कठिन है, परंतु कर्मयोग को कोई चाह... आगे पढ़े