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Thursday, 21 September 2017, 5:53 PM

उपदेश

राशि के अनुसार इन उपायों को अपनाकर धन की प्राप्ति की जा सकती है

Updated on 17 August, 2015, 13:19
 धन भौतिक सुविधाओं की प्राप्ति का साधन है इसके बिना संसार में जीना असंभव तो नहीं पर मुश्किल बहुत है लोग धन-प्राप्ति और उसे बढ़ाने के लिये तरह-तरह के उपाय अपनाते हैं लेकिन राशि के अनुसार इन उपायों को अपनाकर धन की प्राप्ति की जा सकती है। मेष राशि शाम के समय... आगे पढ़े

बड़ी-बड़ी बातें नहीं कम बात करें तो बेहतर

Updated on 15 August, 2015, 12:45
एक व्यक्ति दुनिया घूमकर आया और बड़ी-बड़ी बातें करने लगा। जो भी उसके पास जाता तो वह उससे कई प्रश्न किया करता। जब यह बात गौतम बुद्ध को पता चली तो वह वेश बदलकर उस व्यक्ति के पास पहुंचे। उस व्यक्ति ने उनसे प्रश्न किया। 'कौन हो तुम? कहीं ब्राह्मण तो... आगे पढ़े

शायद ही इस धरती पर कोई ऐसा मनुष्य हो जो अपने जीवन में सुख न चाहता हो

Updated on 14 August, 2015, 11:32
 संस्कृत के एक विद्वान ने सुख और दुख की व्याख्या करते हुए लिखा है कि जो वस्तु, व्यवहार और व्यक्ति हमारे अनुकूल होता है, वह हमारे लिए सुखकारक होता है। शायद ही इस धरती पर कोई ऐसा मनुष्य हो जो अपने जीवन में सुख न चाहता हो और अपने पूरे... आगे पढ़े

यह है आत्मा की मुक्ति का सच्चा मार्ग

Updated on 12 August, 2015, 8:32
किसी धनी व्यक्ति के घर एक संत भिक्षा लेने के लिए गए। उस व्यक्ति के यहां एक तोता था वो पिंजरे में कैद था। तोता संत को देखकर बहुत खुश हुआ। भिक्षा लेने के बाद जब संत जाने लगे तो तोते ने कहा, 'हे महात्मा! में इस पिंजरे में काफी दिनों... आगे पढ़े

दु:ख में भी बनें सहज

Updated on 11 August, 2015, 12:08
जीवन में दु:ख आते हैं और हमें प्रभावित करते हैं लेकिन उन दु:खों का सामना करते हुए संयमित होने का प्रयास ही आत्मशांति की ओर ले जाता है। पिछले हफ्ते वर्ल्डकप फुटबॉल में अर्जेंटीना की हार के बाद मैसी एक नायक की तरह उभरे। कैसा क्षण था कि विजेता टीम को... आगे पढ़े

यह चक्र है लाजवाब

Updated on 9 August, 2015, 21:16
बहुत समय पहले की बात है। पर्शिया राज्य के नागरिक पक्षियों से काफी परेशान थे। बहुत सारे पक्षी आते और वहां के किसानों की फसलों को तबाह कर जाते। परेशान किसान अपना दुःख लेकर वहां के राजा फ्रेडरिक के पास पहुंचे। फ्रेडरिक क्रोधित हो गया। उसने तत्काल घोषणा की कि राज्य... आगे पढ़े

विवेक के प्रयोग से हम विरोधियों को भी सकारात्मक संदेश दे सकते हैं

Updated on 7 August, 2015, 13:49
जापान के किसी गांव में एक समुराई बूढ़ा योद्धा रहता था। उसके पास कई समुराई युद्धकला सीखने आते थे। एक बार एक विदेशी योद्धा उसे पराजित करने के लिए आया। वह साहसी था। उसके बारे में यहां तक कहा जाता था कि वह जहां भी जाता विजय होकर ही वापस... आगे पढ़े

ऐसे खोजिए सच्चा दोस्त

Updated on 7 August, 2015, 7:36
विश्व के सबसे अमीर लोगों में से एक 'हेनरी फोर्ड' जब अपनी कीर्ति और कमाई की ऊंचाईयों तक पहुंच गए तो एक पत्रकार ने उनसे पूछा था, 'सर आप एक सफल व्यक्ति हैं, क्या आपको अपने जीवन में कोई कमी महसूस होती है?' हेनरी फोर्ड बोले, 'मेरे पास सब कुछ है... आगे पढ़े

क्या है गुरु का महत्व?

Updated on 4 August, 2015, 7:33
सद्‌गुरु के व्यक्तित्व का अनोखापन कई बार लोगों के मन में सवाल पैदा कर देता है कि आखिर वो हैं कौन? वो खुद बता रहे हैं कि वो सिर्फ एक द्वार के समान हैं। तो क्या है इस द्वार के उस पार ? प्रश्न: जिन लोगों ने आपसे दीक्षा ली है, उनके... आगे पढ़े

मृत्यु ब्रह्मांड की शक्तियों से जीव का संबंध विच्छेद होने का नियम है

Updated on 31 July, 2015, 13:29
आज तक जीवन-मृत्यु के सत्य को ठीक से इसलिए नहीं समझा गया कि विज्ञान ने प्रत्यक्ष प्रमाण के आधार पर निष्कर्ष निकालने का प्रयास किया है। संसार में सब कुछ प्रत्यक्ष और परोक्ष, दोनों शक्तियों से बना है। जो प्रत्यक्ष है उसे अणु कहते हैं, जो अप्रत्यक्ष है उसे विभु... आगे पढ़े

आत्मा एक विभिन्न धर्मों में मत अनेक

Updated on 29 July, 2015, 7:17
संस्कृत शब्द 'आत्मा' का अनुवाद अक्सर अंग्रेजी में 'सोल' या फिर 'स्पिरिट' के रूप में किया जाता है। मगर इन तीनों शब्दों की जड़ें अलग-अलग हैं और अर्थ भी। 'स्पिरिट' ग्रीक मूल का है, 'सोल' ईसाई मूल का और 'आत्मा' हिंदू मूल का। ग्रीस में लोग मानते थे कि जब कोई... आगे पढ़े

आइए जानें, क्‍यों और किसलिए शिवभक्त उठाते हैं कांवड़

Updated on 28 July, 2015, 13:08
हरिद्वार । शिवभक्त चल पड़े हैं कांवड़ लेकर गंगाजल भरने गोमुख व हरिद्वार। चंद दिन शेष रह गए हैं कांवड़ मेला शुरू होने में पर धर्मनगरी शिवभक्तों के स्वागत को तैयार है। पहले शारदीय कांवड़ का महत्व ज्यादा था पर अब धीरे धीरे श्रावण मास की कांवड़ का चलन अधिक... आगे पढ़े

अहंकार की माया के कारण नहीं दिखाई देते हमें ईश्वर

Updated on 26 July, 2015, 12:08
अधिकतर लोग ईश्वर की सत्ता को मानते हैं, फिर क्या वजह है कि लोग यह मानते हुए भी उसे देख नहीं पाते? इसका जवाब यह है कि उन लोगों को ईश्वर इसलिए दिखाई नहीं देता, क्योंकि माया का आवरण मनुष्य के ऊपर पड़ा होता है। जैसे सूर्य सबको प्रकाश और... आगे पढ़े

हमारे आसपास मौजूद हैं ये तीन डाकू

Updated on 25 July, 2015, 9:09
बहुत पुरानी बात है। एक समय जंगल से एक यात्री अपनी मंजिल की ओर जा रहा था। अचानक उसे तीन डाकुओं ने घेर लिया और उसका सारा धन लूट लिया। उस व्यक्ति को लूट लेने के बाद एक डाकू बोला,'अब इस आदमी को जिंदा छोड़ देने से क्या लाभ?'यह कहकर उसने... आगे पढ़े

संसार में आए हैं तो कष्ट सहन करना ही पड़ेगा

Updated on 24 July, 2015, 12:19
इंदौर। संसार में आए हैं तो कष्ट सहन करना ही पड़ेगा। सहने से शक्ति बढ़ती है। भगवान राम ने भी राजपाट छोड़कर वनवास सहन किया। कुसंग का असर जल्दी होता है, सत्संग के असर में देर लगती है। परमात्मा न तो सुख देते हैं, न दुख। ये दोनों हमारे कर्मों... आगे पढ़े

चाणक्य ने इंसानों को जीवन में सफलता के कई उपाए बताए हैं

Updated on 23 July, 2015, 12:40
राजा-रजवाड़ों के सियासत में खंडित भारत को एक सूत्र में बंधने का सपना देखने वाले आचार्य चाणक्य का जन्म करीब 300 ईसा पूर्व हुआ था। आचार्य चाणक्य का संबंध पाटलिपुत्र से था, जिसे उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया।आचार्य चाणक्य को नीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र का जनक भी कहा जाता है। आमतौर पर... आगे पढ़े

ईश्वर प्राप्ति के मार्ग...

Updated on 21 July, 2015, 14:01
आज के पुजारियों ने ईश्वर प्राप्ति के इतने सारे मार्ग बता दिए हैं कि उनकी सीमा खत्म होती नहीं दिखती है। हमें कहा गया कि स्नान करके ही पूजा करें, पूजा भूखे पेट करें, आप उपवास करें, परंतु प्रकृति ने कभी ऐसा नहीं कहा। ये सारे नियम प्रकृति के प्रतिकूल... आगे पढ़े

कर्म का आधार है विचार

Updated on 17 July, 2015, 12:36
विचारों से ही कर्म का जन्म होता है। वे कर्म की नींव हैं। हमारे विचार जितने अच्छे होंगे, उतने ही श्रेष्ठ हमारे कर्म भी होंगे।आचार्य शिवेंद्र नागर का चिंतन... वेदांत में बताया गया है कि शारीरिक कर्म मात्र परिणाम है, उसका वास्तविक कारण कुछ और है। शारीरिक कर्म होते हुए दिखता... आगे पढ़े

जब तक विश्वास है, प्रगति है, जब विश्वास नहीं दुर्गति शुरू

Updated on 15 July, 2015, 7:17
एक बार प्रभु यीशु को साइमन नाम के एक भक्त ने भोज के लिए आमंत्रित किया। प्रभु यीशु जब उस व्यक्ति के घर पहुंचे तो मैग्दालिन नाम की स्त्री ने उनके पैर पकड़ लिए और उन्हें धोने लगी। मैग्दालिन एक वेश्या थी। नगर में उसके चर्चे आम थे, इसलिए वह लोग... आगे पढ़े

आंतरिक उन्नति आवश्यक

Updated on 14 July, 2015, 13:11
उन्नति के लिए आंतरिक शक्ति आवश्यक है। संतों का दायित्व है कि वे युवाओं को आत्मिक बल दें। मोरारी बापू का चिंतन। युवा भारत की शक्ति बनें, इसमें संत समाज बड़ी भूमिका निभा सकता है। देश का युवा धरती मां का गौरव है। युवा का सिर्फ बलवान होना जरूरी नहीं।... आगे पढ़े

बुझने न दें कभी नेकी और शराफत का चिराग

Updated on 11 July, 2015, 13:33
इस्लाम धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए दो मुस्लिम व्यक्ति अरब देश के नज्द नामक कस्बे में पहुंचे। उन दिनों अरब में इस्लाम धर्म का काफी विरोध हो रहा था और मुसलमानों पर तरह-तरह के अत्याचार किए जा रहे थे। ऐसी स्थिति में नज्द के सरदार हारिस ने दोनों मुस्लिम व्यक्तियों को... आगे पढ़े

ऐसे लोगों में छिपे होते हैं महानता के बीज

Updated on 10 July, 2015, 7:21
एक दिन एक निर्धन बालक लकड़ी का गट्ठर लेकर शहर में बेचने आया। उसने लकड़ी के गट्ठर को इस कलात्मक ढंग से बांधा था कि एक सेठजी को पसंद आया। सेठजी ने पूछा, 'बेटा! ये गट्ठर इतने कलात्मक ढंग से किसने बांधा है ?' उस लड़के ने उत्तर दिया, 'जी मैनें।'... आगे पढ़े

ईश्वर की इच्छा

Updated on 8 July, 2015, 13:25
पुरानी बात है। एक व्यक्ति गरीबों, बीमारों और अशक्तों की सेवा करता। उसके भीतर करुणा और दया का सागर लहराता था। उसके गुणों से प्रसन्न होकर ईश्वर ने उसके पास देवदूत भेजा। दूत ने कहा कि ईश्वर आपको वरदान देना चाहते हैं। क्या आप लोगों को रोगमुक्त करने की शक्ति... आगे पढ़े

शास्त्रों से परे धर्म

Updated on 7 July, 2015, 14:00
धर्म के नाम पर झगड़े इसलिए होते हैं, क्योंकि झगड़ने वाले धर्म को जानते ही नहींऔर वे धार्मिक ग्रंथों की बातों में उलझे रहते हैं। धर्म को समझने के लिए ग्रंथों की नहीं, बल्कि स्वयं अनुभव करने की आवश्यकता है। एक बार भारत में विभिन्न संप्रदायों के प्रतिनिधि एकत्र हुए और... आगे पढ़े

जाति से नहीं कर्म से होती है पहचान

Updated on 5 July, 2015, 14:31
एक दिन राजकुमार अभय कुमार को जंगल में नवजात शिशु मिला। वह राजकुमार उसे अपने घर ले आया और उसका नाम जीवक रख लिया। अभय कुमार ने बच्चे को खूब पढ़ाया-लिखाया। जब जीवक बड़ा हुआ तो उसने अभय कुमार से पूछा, 'मेरे माता-पिता कौन हैं?' अभय कुमार ने उस जीवक से... आगे पढ़े

जब किसान के लिए जगह नहीं तो राष्ट्रपति के लिए भी नहीं

Updated on 4 July, 2015, 9:18
अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति टामस जैफरसन एक बार किसी बड़े से होटल में ठहरने के लिए गए। जैफरसन उस समय किसानों जैसी साधारण वेशभूषा में थे। होटल मालिक ने उन्हें साधारण आदमी समझकर जगह देने से इंकार कर दिया। वे चुपचाप चले गए। होटल मालिक तो उन्हें नहीं पहचान सका लेकिन... आगे पढ़े

विवेकानंद की पुण्यतिथि: और इस दुनिया से विदा ली...

Updated on 3 July, 2015, 13:48
4 जुलाई 2015 को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि है। 113 साल पहले इसी दिन यानी 4 जुलाई 1902 को भारतीय चिंतन को समग्र विश्व में फैलाने वाले इस महापुरुष का अवसान हुआ था। आइए जानते हैं, स्वामीजी के जीवन के आखिरी दिन क्या हुआ था - 4 जुलाई 1902 आषाढ़ कृष्ण... आगे पढ़े

इस जहां में कुछ भी असंभव नहीं

Updated on 2 July, 2015, 7:49
अदम्य उत्साह के धनी थे नेपोलियन बोनापार्ट। युद्ध करते हुए एक बार जब नेपोलियन आल्पस पर्वत के पास अपनी सेना सहित पहुचें, तो पहाड़ ने उनका रास्ता रोक लिया। पहाड़ की तलहटी में एक वृद्धा रहती थी। रास्ते की जानकारी लेने जब नेपोलियन उसके पास पहुंचे तो नेपोलियन की बात सुनकर... आगे पढ़े

परमात्मा प्राप्ति के लिए है मनुष्य जन्म

Updated on 2 July, 2015, 7:10
सिद्धपीठ कालिका मंदिर, कालकाजी में सत्संग के अवसर पर महंत सुरेन्द्र नाथ ने कहा कि धन से श्रेष्ठ वस्तु होती है तथा वस्तु से श्रेष्ठ विवेक तथा विवेक से भी श्रेष्ठ सत-तत्व (परमात्मा) होता है। यह मनुष्य जन्म उस सत-तत्व की प्राप्ति के लिए ही है। सिद्धपीठ बालाजी धाम मंदिर, त्रिनगर... आगे पढ़े

सर्वे भवन्तु सुखिन:

Updated on 1 July, 2015, 12:32
विश्वभावना का विचार भारतीय संस्कृति की उदात्त भावनाओं का ही एक अंग है। वसुधैव कुटुम्बकम् (समस्त वसुधा ही परिवार है) और सर्वे भवन्तु सुखिन: (सभी लोग सुखी हों) की कामना और भावना हमारे यहां सनातन काल से रही है। हम सभी का जीवन, हमारा स्वभाव और कार्य-व्यवहार सभी में सबके... आगे पढ़े