Sunday, 28 May 2017, 3:49 PM

उपदेश

ध्यान-तन्मयता का नाम समाधि

Updated on 16 December, 2013, 13:17
ध्यान के द्वारा परिवर्तन तभी संभव है जब ध्यान में जाने के लिए गहरी आस्था हो. आस्था का निर्माण हुए बिना ध्यान में जाने की क्षमता अर्जित नहीं हो सकती. कुछ व्यक्तियों में नैसर्गिक आस्था होती है और कुछ व्यक्तियों की आस्था का निर्माण करना पड़ता है. आस्था पर संकल्प का... आगे पढ़े

उस सेठ ने दान मांगने आई भगिनी निवेदिता को थप्पर क्यों मारा?

Updated on 9 December, 2013, 22:15
भगिनी निवेदिता ने एक दिन देखा कि स्वामी विवेकानंद कह रहे थे कि बेसहारा अनाथ बच्चे साक्षात भगवान के समान हैं। यह सुनकर भगिनी निवेदिता ने संकल्प ले लिया कि वह बंगाल में अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए एक आश्रम की स्थापना करेंगी। इसके लिए वह कोलकाता के धनाढ्यों... आगे पढ़े

बहुत जरूरी है वक्त पर सही फैसला लेना

Updated on 7 December, 2013, 12:15
कभी-कभी दो अच्छे इंसान भी साथ रहकर एक दूसरे की जिंदगी को दुखद बना देते हैं। वे अलग-अलग तो अच्छे होते हैं, पर आपस में घुल-मिल नहीं पाते। मेरी दोस्त रोहिणी के साथ ऐसा ही हुआ। उसकी अरेंज मैरिज को कुछ ही दिन हुए थे कि उसे लगा उसने गलत... आगे पढ़े

बुद्घि जरूरी है लेकिन अधिक बुद्घि नुकसान का कारण बन सकता है

Updated on 3 December, 2013, 8:43
संसार में धन दौलत से भी जिस चीज को अधिक महत्व दिया गया है वह है बुद्घि। लेकिन कहते हैं अगर बुद्घि जरूरत से अधिक हो जाए तो यह भी नुकसान कर जाती है। क्योंकि जितनी बुद्घि होगी उतना ही अधिक तर्क लगाएंगे परिणाम तर्क कुतर्क बन जाएगा। कुतर्क से... आगे पढ़े

धन दौलत नहीं घर को यह स्वर्ग बना देता है

Updated on 2 December, 2013, 8:09
सुधांशु जी महाराज अध्यात्मिक गुरु भारत वर्ष में एक महान् कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य हुए हैं। उन्होंने कहा है वह गृहस्थाश्रम धन्य है, स्वर्ग तुल्य है जिस गृहस्थाश्रम में ये विशेषताएं हों।      जिस घर में सदा प्रसन्नता दिखाई देती हो, जिस घर में हंसने की, मुस्कराने की स्थिति दिखाई देती हो, हंसने की... आगे पढ़े