Monday, 24 July 2017, 10:22 PM

उपदेश

ज्ञान वही है जो हमें सत्य की ओर ले जाए

Updated on 19 December, 2013, 15:16
ज्ञान वही है जो हमें सत्य की ओर ले जाए और सत्य वही है जो धर्म को स्थापित करे। ज्ञान तत्व प्रकाश जैसा होता है, जिससे वस्तुत: मनुष्य का जीवन रूपांतरित होता है। जीवन अर्थपूर्ण और यथार्थ के धरातल तक पहुंचता है। वहीं दूसरी तरफ अज्ञान से मनुष्य का समस्त... आगे पढ़े

आत्मा की चेतना को जगाने वाला ध्यान

Updated on 19 December, 2013, 13:02
उलझनों या आवेशों पर नियंत्रण जब तक नहीं होता, तब तक शक्ति का विकास कठिन है। इसलिए आज सबसे बड़ी मांग है कि प्रत्येक व्यक्ति ध्यान में प्रवेश करें। शक्ति के लिए जरूरी है कि शरीर और मन साथ में जुड़े रहें। शरीर एक काम करता है, तो मन दूसरा... आगे पढ़े

व्यवहार की शालीनता

Updated on 18 December, 2013, 11:14
सद्व्यवहार उस पुष्प के समान है जो धवल और दृढ़ चरित्र रूपी वृक्ष पर खिलता है। व्यवहार की शालीनता न केवल अन्य व्यक्तियों को प्रसन्न करती है, बल्कि शालीन व्यक्ति के मन-मस्तिष्क को भी आनंदित करती है। प्रख्यात विचारक और मनीषी श्रीअरविंद का कहना था कि जीवन के समस्त बाहरी क्रियाकलाप... आगे पढ़े

महाज्ञानी बनना है तो इस रहस्य को समझ लें

Updated on 17 December, 2013, 12:58
संसार में किसी से भी कह दें कि तुम अज्ञानी हो तो वह आपको मारने-पीटने के लिए दौड़ेगा। कारण यह है कि कोई भी अपने आपको अज्ञानी मानने को तैयार नहीं होता। जबकि सच तो यह है कि बड़ी-बड़ी उपाधियां और डिग्रियां लेकर ऊंचे पदों पर काम करने वाले व्यक्ति... आगे पढ़े

आत्मा को पता होता है उसे कौन सा शरीर मिलने वाला है

Updated on 17 December, 2013, 12:56
स्वामी शिवानंद सरस्वती जीवात्मा प्राण, मन तथा इंद्रियों के साथ मृत्यु के समय अपने पूर्व शरीर को छोड़ देती है और एक नया शरीर धारण करती है। अविद्या, शुभ-अशुभ कर्म तथा पूर्वजन्मों के संस्कारों को भी वह अपने साथ ही ले जाती है। जिस प्रकार कीड़ा दूसरी घास पर अपने पांवों... आगे पढ़े

ध्यान-तन्मयता का नाम समाधि

Updated on 16 December, 2013, 13:17
ध्यान के द्वारा परिवर्तन तभी संभव है जब ध्यान में जाने के लिए गहरी आस्था हो. आस्था का निर्माण हुए बिना ध्यान में जाने की क्षमता अर्जित नहीं हो सकती. कुछ व्यक्तियों में नैसर्गिक आस्था होती है और कुछ व्यक्तियों की आस्था का निर्माण करना पड़ता है. आस्था पर संकल्प का... आगे पढ़े

उस सेठ ने दान मांगने आई भगिनी निवेदिता को थप्पर क्यों मारा?

Updated on 9 December, 2013, 22:15
भगिनी निवेदिता ने एक दिन देखा कि स्वामी विवेकानंद कह रहे थे कि बेसहारा अनाथ बच्चे साक्षात भगवान के समान हैं। यह सुनकर भगिनी निवेदिता ने संकल्प ले लिया कि वह बंगाल में अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए एक आश्रम की स्थापना करेंगी। इसके लिए वह कोलकाता के धनाढ्यों... आगे पढ़े

बहुत जरूरी है वक्त पर सही फैसला लेना

Updated on 7 December, 2013, 12:15
कभी-कभी दो अच्छे इंसान भी साथ रहकर एक दूसरे की जिंदगी को दुखद बना देते हैं। वे अलग-अलग तो अच्छे होते हैं, पर आपस में घुल-मिल नहीं पाते। मेरी दोस्त रोहिणी के साथ ऐसा ही हुआ। उसकी अरेंज मैरिज को कुछ ही दिन हुए थे कि उसे लगा उसने गलत... आगे पढ़े

बुद्घि जरूरी है लेकिन अधिक बुद्घि नुकसान का कारण बन सकता है

Updated on 3 December, 2013, 8:43
संसार में धन दौलत से भी जिस चीज को अधिक महत्व दिया गया है वह है बुद्घि। लेकिन कहते हैं अगर बुद्घि जरूरत से अधिक हो जाए तो यह भी नुकसान कर जाती है। क्योंकि जितनी बुद्घि होगी उतना ही अधिक तर्क लगाएंगे परिणाम तर्क कुतर्क बन जाएगा। कुतर्क से... आगे पढ़े

धन दौलत नहीं घर को यह स्वर्ग बना देता है

Updated on 2 December, 2013, 8:09
सुधांशु जी महाराज अध्यात्मिक गुरु भारत वर्ष में एक महान् कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य हुए हैं। उन्होंने कहा है वह गृहस्थाश्रम धन्य है, स्वर्ग तुल्य है जिस गृहस्थाश्रम में ये विशेषताएं हों।      जिस घर में सदा प्रसन्नता दिखाई देती हो, जिस घर में हंसने की, मुस्कराने की स्थिति दिखाई देती हो, हंसने की... आगे पढ़े